परीक्षा पे चर्चा नहीं, अब परीक्षा की समीक्षा की जरूरत... NEET पर बोले जयराम रमेश  

साल भर रात-दिन जागकर पढ़ाई करना, कोचिंग की लाखों की फीस भरना और आखिरी में पता चलना कि जिस व्यवस्था के भरोसे भविष्य टिका था, वह खुद भ्रष्टाचार और अक्षमता के दीमक से खोखली हो चुकी है. आज भारत का युवा और उनके माता-पिता इसी दर्द और गुस्से से गुजर रहे हैं. इसे लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार के शिक्षा तंत्र पर तीखा हमला बोलते हुए इसे अक्षमता, राजनीतिकरण और भ्रष्टाचार से ग्रस्त बताया है. 

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Jairam Ramesh On NEET Jairam Ramesh On NEET

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 16 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:57 PM IST

NEET UG 2026 पेपर लीक होने के बाद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. छात्र, अभिभावक समेत बड़े-बड़े नेता भी इस विवाद को खुद से दूर नहीं कर पा रहे हैं. इसे लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए मोदी सरकार के शिक्षा तंत्र पर तीखा हमला बोलते हुए इसे अक्षमता, राजनीतिकरण और भ्रष्टाचार से ग्रस्त बताया है. 

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सोशल मीडिया पर किया पोस्ट 

जयराम रमेश ने मोदी सरकार के शिक्षा तंत्र पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले कुछ सालों में शिक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर, राजनीतिक हस्तक्षेप वाली और भ्रष्ट साबित हुई है. उन्होंने कहा कि आए दिन कोई न कोई विवाद सामने आता रहता है, जैसे एनसीईआरटी किताबों का विवाद, पेपर लीक, एनएएसी रिश्वत मामला, आईसीएचआर घोटाला और विश्वविद्यालयों में खाली पड़े शिक्षकों के पद. 

आए दिन होते रहते हैं विवाद 

पेपर लीक और घोटाले: परीक्षाओं की साख पर बार-बार सवाल उठ रहे हैं. चाहे पेपर लीक का मामला हो या NAAC जैसी संस्थाओं में कथित रिश्वत कांड. 

एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों के बदलावों को लेकर लगातार बहस छिड़ी हुई है. 

खाली पद और नियुक्तियां: देश के बड़े-बड़े केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुलपतियों (VC) के पद खाली पड़े हैं या नियुक्तियों पर सवाल उठ रहे हैं. इसके अलावा कॉलेजों में शिक्षकों के हजारों पद सालों से खाली पड़े हुए हैं, जिससे सीधे तौर पर पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
 

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शिक्षा मंत्री पर भी लगाया आरोप

जब देश के शिक्षा मंत्रालय से इन कमियों को को लेकर सवाल होते हैं, तो जवाब सुधार के बजाय अक्सर राजनीतिक बयानों में बदल जाता है. हाल ही में जब मीडिया ने पूछा कि मंत्रालय ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार को लेकर संसदीय शिक्षा स्थायी समिति की सिफारिशों को क्यों नहीं माना? तो इसके जवाब में कथित तौर पर यह कह दिया गया कि इस समिति में विपक्ष के सदस्य शामिल हैं, इसलिए इसे गंभीरता से नहीं लिया गया. 

सच्चाई क्या है?

संसद की इस समिति में कुल 30 सदस्य हैं जिनमें से 17 सदस्य खुद सत्ताधारी दल (BJP) के ही हैं. इस समिति ने जिन सुधारों की बात कही थी, वे काफी हद तक खुद सरकार द्वारा बनाई गई के राधाकृष्णन विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट से मेल खाते हैं. विपक्ष का बहाना बनाकर संसद की इस रिपोर्ट को खारिज करना न सिर्फ अपनी ही पार्टी के सांसदों का, बल्कि देश की लोकतांत्रिक और संसदीय परंपराओं का अपमान है. 

परीक्षा पे चर्चा नहीं, अब परीक्षा की समीक्षा की जरूरत 

प्रधानमंत्री हर साल छात्रों के तनाव को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम करते हैं, जिसकी काफी पब्लिसिटी भी होती है. लेकिन आज देश के युवा जिस मानसिक तनाव और अनिश्चितता से गुजर रहे हैं, उसे देखते हुए भाषणों से ज्यादा ठोस सुधारों की जरूरत है. आज देश को परीक्षा पे चर्चा की नहीं बल्कि परीक्षा कराने वाले पूरे सिस्टम की परीक्षा की समीक्षा करने की जरूरत है. देश के करोड़ों छात्रों और उनके माता-पिता के आंसुओं, उनकी मेहनत और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शिक्षा मंत्रालय को अपने अहंकार को छोड़कर जिम्मेदारी लेनी होगी. 

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