भारत में खत्म हो चुका है MBA का दौर... जानिए देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने ऐसा क्यों कहा? 

अपने बच्चों और दोस्तों के बच्चों को दी गई सलाह का जिक्र करते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि भारत ने ऐतिहासिक रूप से वेल्डिंग, प्लंबिंग, कारपेंट्री (बढ़ईगीरी) और इलेक्ट्रिकल वर्क जैसे व्यावसायिक पेशों (वोकेशनल प्रोफेशंस) को हमेशा कमतर आंका है. जबकि स्विट्जरलैंड, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों में इन ट्रेड स्किल्स (व्यावसायिक कौशल) को बहुत सम्मान दिया जाता है.

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CEA बोले- सॉफ्टवेयर और MBA का जमाना गया CEA बोले- सॉफ्टवेयर और MBA का जमाना गया

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 16 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:17 AM IST

देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने देश के युवाओं को पारंपरिक करियर रास्तों पर दोबारा सोचने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि बदलते आर्थिक परिवेश में अब सिर्फ डिग्रियां इस बात की गारंटी नहीं दे सकतीं कि आपको नौकरी मिल ही जाएगी.

एक एएनआई (ANI) पॉडकास्ट में बात करते हुए नागेश्वरन ने कहा कि आज भी देश के कई छात्र शिक्षा के एक तय ढर्रे पर जैसे ग्रेजुएशन करना, फिर उसके बाद हायर स्टडीज या सीधे यूपीएससी (UPSC) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट जाना आद‍ि में चल रहे हैं. छात्र यह सोचे बिना इसमें कूद रहे हैं कि क्या इन डिग्रियों से उन्हें आगे चलकर कोई स्थायी रोजगार मिल भी पाएगा या नहीं.

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अपने बच्चों और दोस्तों के बच्चों को दी गई सलाह का जिक्र करते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि भारत ने ऐतिहासिक रूप से वेल्डिंग, प्लंबिंग, कारपेंट्री (बढ़ईगीरी) और इलेक्ट्रिकल वर्क जैसे व्यावसायिक पेशों (वोकेशनल प्रोफेशंस) को हमेशा कमतर आंका है. जबकि स्विट्जरलैंड, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों में इन ट्रेड स्किल्स (व्यावसायिक कौशल) को बहुत सम्मान दिया जाता है.

'सॉफ्टवेयर और MBA का दौर अब बीत चुका है'
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि ग्लोबलाइजेशन के दौर ने एक समय पर सॉफ्टवेयर, कंप्यूटर साइंस और एमबीए (MBA) की पढ़ाई को बहुत बढ़त दी थी, लेकिन अब वह दौर खत्म हो चुका है।" उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि आने वाला कल ट्रेड स्किल्स, सॉफ्ट स्किल्स और उन पेशों का है जहां मानवीय समझ और इंसान की मौजूदगी सबसे जरूरी है.

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अपनी बात को समझाने के लिए उन्होंने एक युवा शेफ (रसोइया) के साथ हुई बातचीत का उदाहरण दिया. वह शेफ सोशल मीडिया पर अपने अन्य दोस्तों के करियर को देखकर खुद को पिछड़ा हुआ महसूस कर रहा था. नागेश्वरन ने उसे सलाह दी कि वह सोशल मीडिया पोस्ट देखकर अपनी तरक्की का अंदाजा न लगाए. उन्होंने कहा कि खाना पकाने के हुनर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से इतनी आसानी से नहीं बदला जा सकता.

उन्होंने उस युवा से कहा कि तुमने एक ऐसा हुनर सीखा है जिसकी नकल तकनीक इतनी आसानी से नहीं कर सकती. आने वाले सालों में काउंसलिंग, केयरगिविंग (देखभाल) और हॉस्पिटैलिटी (आतिथ्य सत्कार) जैसे करियर बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं.

रोजगार का सेहत से है सीधा कनेक्शन
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने रोजगार की क्षमता को देश के स्वास्थ्य से भी जोड़ा. उन्होंने कहा कि अक्सर चर्चा इस बात पर होती है कि क्या भारत अमीर होने से पहले ही बूढ़ा हो जाएगा, लेकिन बड़ी चिंता यह है कि क्या हमारा देश समृद्ध होने से पहले ही 'अन हेल्दी' होता जा रहा है.

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश के कई हेल्थ इंडिकेटर्स में सुधार के बावजूद, हर आय वर्ग के लोगों में मोटापा तेजी से बढ़ा है. सुस्त जीवनशैली, शारीरिक एक्टिविटी की कमी और देर रात खाने की आदतें इस ट्रेंड की मुख्य वजह हैं. नागेश्वरन के मुताबिक, आर्थिक विकास सिर्फ टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर के भरोसे नहीं होता, बल्कि इसके लिए नागरिकों का स्वस्थ और कार्यकुशल होना भी जरूरी है. उत्पादकता, रोजगार और आय बढ़ाने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना बेहद आवश्यक है.

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देश के युवाओं को मुख्य आर्थिक सलाहकार ने युवाओं को एक बहुत ही सीधा और साफ संदेश दिया है कि अपना पूरा फोकस उन स्किल्स (हुनर) को सीखने में लगाएं जिन्हें टेक्नोलॉजी आसानी से रिप्लेस न कर सके, और अपनी प्रोफेशनल डिग्रियों की तरह ही अपनी सेहत पर भी पूरा इन्वेस्ट करें.

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