सोशल मीडिया पर अपनी कॉर्पोरेट नौकरी के बारे में शिकायत करना एक आम बात हो गई है. लेकिन अब एक क्रिएटर की कॉर्पोरेट लाइफ पर बेबाक राय ने ऑनलाइन हलचल मचा दी है. जिससे एक ऐसी बहस छिड़ गई है जो शायद लाखों ऑफिस कर्मचारियों ने कम से कम एक बार खुद से जरूर की होगी. इंस्टाग्राम पर वायरल हुए एक वीडियो में 24 साल के अनमोल वारिकू ने तर्क दिया कि लोग अपनी कॉर्पोरेट नौकरियों के बारे में शिकायत करने में बहुत अधिक समय गुजार देते हैं और अपने फैसलों को स्वीकार करने में पर्याप्त समय नहीं देते हैं. उनका साफ कहना था कि अगर आपकी नौकरी सच में अच्छी नहीं है, तो इसके बारे में लगातार शिकायत करना बंद करें. लेकिन अगर यह सच में टॉक्सिक है, तो इसे छोड़ दें और कुछ बेहतर की तलाश करें.
केवल शिकायत करने से आती है नेगेटिविटी
वायरल वीडियो में कर्मचारी ने कहा कि कई लोग कॉर्पोरेट नौकरी की शिकायत करते रहते हैं, लेकिन फिर भी रोज उसी नौकरी पर जाते हैं. उनका मानना है कि काम को लेकर लगातार नकारात्मक बातें करने से व्यक्ति और ज्यादा परेशान होता है, खासकर जब नौकरी उसकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा हो. उन्होंने यह भी कहा कि हर किसी के लिए अपने शौक को करियर या बिजनेस बनाना संभव नहीं है. इसलिए एक सामान्य और स्थिर नौकरी करना कोई बुरी बात नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि ज्यादातर लोग न तो बड़े उद्यमी बनते हैं, न मशहूर सेलिब्रिटी और न ही स्टार खिलाड़ी. इस सच्चाई को स्वीकार करना हार मानना नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी में संतोष और खुशी पाने का एक तरीका है.
कई लोगों ने जताई सहमति
ये वीडियो देखने के बाद उन कर्मचारियों ने इसका समर्थन किया जो मानते हैं कि सोशल मीडिया अक्सर नौकरी छोड़ने, दुनिया घूमने, स्टार्टअप बनाने और भागदौड़ भरी जिंदगी से बचने को रोमांटिक अंदाज में पेश करता है. कई यूजर्स का मानना है कि ये वीडियो सच को दिखाता है. बिल चुकाने होते हैं, कई जिम्मेदारियां होती है और हर किसी के पास इतने पैसे नहीं होते हैं कि वह अपने शौक के कामों को पूरा करें. कई यूजर्स ने यह भी कहा कि सालों तक नौकरी से नफरत करते हुए और स्थिति को बदलने का कोई प्रयास न करना भावनात्मक रूप से थका देने वाला हो सकता है.
कई लोग उतरे विरोध में
वहीं, इस वीडियो को देख कई लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं. वीडियो के कमेंट में आलोचकों का कहना है कि नौकरी छोड़ देना हर किसी के लिए आसान नहीं होता. कई लोग परिवार की जिम्मेदारियों, पैसों की जरूरत और सीमित नौकरी के विकल्पों के कारण अपनी नौकरी में बने रहते हैं. कुछ लोगों ने इस बात से भी असहमति जताई कि कॉर्पोरेट नौकरी में फंसे रहने का मतलब व्यक्ति में प्रतिभा या मेहनत की कमी है.
उनका कहना है कि करियर की सफलता सिर्फ मेहनत पर नहीं बल्कि अवसर, परिस्थितियों और संसाधनों पर भी निर्भर करती है. इसके साथ ही कई लोगों का मानना है कि नौकरी की समस्याओं पर बात करना हमेशा नकारात्मकता नहीं होती. कई बार यही चर्चा बेहतर कामकाजी माहौल और जरूरी बदलाव की शुरुआत बनती है.
आजतक एजुकेशन डेस्क