दक्षिण अमेरिका (जिसे लैटिन अमेरिका भी कहते हैं) और उत्तर अमेरिका (खासकर संयुक्त राज्य अमेरिका) के बीच लंबे समय से तनाव और दुश्मनी चल रही है. यह दुश्मनी इतिहास की जड़ों से जुड़ी है, जहां अमेरिका ने दक्षिण अमेरिकी देशों में हस्तक्षेप किया, उनकी अर्थव्यवस्था पर कब्जा जमाया और राजनीतिक रूप से दबाव बनाया. वेनेजुएला पर अमेरिकी हमला और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ना, इस दुश्मनी को और बढ़ा रही हैं.
दुश्मनी की शुरुआत 19वीं सदी से हुई, जब यूरोपीय देशों (स्पेन, पुर्तगाल) से दक्षिण अमेरिकी देश आजाद हो रहे थे. अमेरिका ने 1823 में मोनरो डॉक्ट्रिन घोषित किया, जिसमें कहा गया कि अमेरिका महाद्वीप (उत्तर और दक्षिण अमेरिका) में यूरोपीय हस्तक्षेप नहीं होने देगा. लेकिन असल में यह अमेरिका की खुद की विस्तारवादी नीति थी. अमेरिका ने दक्षिण अमेरिका को अपना 'बैकयार्ड' माना और वहां की सरकारों को नियंत्रित करने की कोशिश की.
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जैसे- 1846-1848 में मैक्सिकन-अमेरिकन युद्ध में अमेरिका ने मैक्सिको पर हमला करके उसकी आधी जमीन (कैलिफोर्निया, टेक्सास समेत) हथिया ली. यह पहला बड़ा उदाहरण था जहां अमेरिका ने दक्षिण अमेरिकी देश पर कब्जा किया.
20वीं सदी में अमेरिका ने कई बार दक्षिण अमेरिका में सैन्य हस्तक्षेप किया. इसका मुख्य कारण था आर्थिक हित – अमेरिकी कंपनियां (जैसे यूनाइटेड फ्रूट कंपनी) वहां के केले, कॉफी और तेल जैसी संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती थीं.
स्पैनिश-अमेरिकन युद्ध (1898): अमेरिका ने क्यूबा और फिलीपींस पर स्पेन से लड़ाई की और क्यूबा को 'स्वतंत्र' बनाया, लेकिन असल में अमेरिका ने वहां सैन्य बेस बनाए और अर्थव्यवस्था नियंत्रित की. यह दुश्मनी का बड़ा उदाहरण है, जहां अमेरिका ने दक्षिण अमेरिका को अपनी कॉलोनी जैसा बनाया.
पनामा कैनाल (1903): अमेरिका ने कोलंबिया से अलग होकर पनामा को नया देश बनवाया. कैनाल पर कब्जा किया. अमेरिकी राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट ने कहा कि मैंने कैनाल लिया, जबकि कांग्रेस बहस कर रही थी. यह घटना दक्षिण अमेरिका में अमेरिकी हस्तक्षेप का प्रतीक है.
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ये घटनाएं दिखाती हैं कि अमेरिका ने दक्षिण अमेरिका की लोकतांत्रिक सरकारों को गिराकर तानाशाहों को समर्थन दिया, जिससे वहां गरीबी और अस्थिरता बढ़ी.
अमेरिका ने दक्षिण अमेरिका की प्राकृतिक संपदा का शोषण किया. अमेरिकी कंपनियां वहां सस्ते मजदूरों से काम कराती थीं. मुनाफा अमेरिका ले जाती थीं. विश्व बैंक और आईएमएफ जैसी संस्थाओं (जिनमें अमेरिका का दबदबा है) ने दक्षिण अमेरिकी देशों को कर्ज दिया, लेकिन शर्तें ऐसी कि वे कभी चुकता नहीं कर पाते. यह 'कर्ज का जाल' दुश्मनी का बड़ा कारण है.
उदाहरण: अर्जेंटीना का आर्थिक संकट (2001) – अमेरिकी नीतियों की वजह से अर्जेंटीना दिवालिया हो गया, लाखों लोग बेरोजगार हुए.
हाल के वर्षों में भी दुश्मनी जारी है. अमेरिका ने क्यूबा पर 60 साल से ज्यादा का आर्थिक प्रतिबंध लगाया है, जिससे क्यूबा की अर्थव्यवस्था बर्बाद हुई. वेनेजुएला पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए. अब 2026 में डेल्टा फोर्स के जरिए राष्ट्रपति मादुरो को पकड़ लिया, जिसे दक्षिण अमेरिका 'आक्रमण' बता रहा है.
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आज दक्षिण अमेरिका में बाएं झुकाव वाली सरकारें (ब्राजील, वेनेजुएला) अमेरिका की नीतियों का विरोध कर रही हैं. चीन और रूस जैसे देश दक्षिण अमेरिका में निवेश कर रहे हैं, जो अमेरिका को पसंद नहीं. जलवायु परिवर्तन, माइग्रेशन और ड्रग तस्करी जैसे मुद्दों पर भी मतभेद हैं. वेनेजुएला की हालिया घटना से लैटिन अमेरिका में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. कई देशों ने अमेरिका की निंदा की है.
दक्षिण और उत्तर अमेरिका की दुश्मनी इतिहास, अर्थव्यवस्था और राजनीति से जुड़ी है. अमेरिका की 'बिग ब्रदर' वाली नीति ने दक्षिण अमेरिका में गुस्सा पैदा किया है. अगर अमेरिका समानता की नीति अपनाए, तो यह दुश्मनी कम हो सकती है. लेकिन वर्तमान घटनाएं जैसे वेनेजुएला हमला दिखाती हैं कि तनाव अभी जारी है.
ऋचीक मिश्रा