क्या वेनेजुएला की तरह ईरान के तेल पर है ट्रंप की नजर? जंगी प्लान के पीछे असली खेल क्या

ट्रंप की नजर ईरान के तेल पर है, ठीक वेनेजुएला की तरह. वह मैक्सिमम प्रेशर नीति से ईरान के तेल निर्यात को रोक रहे हैं- नए सैंक्शंस, 25% टैरिफ और शैडो फ्लीट पर हमले की धमकी दे रहे हैं. असली खेल ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर कर रेजीम चेंज करना है. चीन को अलग-थलग करना और अमेरिकी कंपनियों को तेल का फायदा दिलाना.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजर पूरी तरह से ईरान के तेल पर है. (Photo: ITG) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजर पूरी तरह से ईरान के तेल पर है. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:54 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा कार्यकाल शुरू होते ही मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है. ईरान पर नए प्रतिबंध, सैन्य धमकियां और व्यापारिक दबाव ने सवाल उठा दिए हैं... क्या ट्रंप ईरान के तेल पर कब्जा करना चाहते हैं, जैसे वेनेजुएला में किया? अगर युद्ध की योजना है, तो उसके पीछे असली मकसद क्या है? 

ट्रंप और ईरान का पुराना झगड़ा

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ट्रंप का पहला कार्यकाल (2017-2021) ईरान के लिए मुश्किल था. उन्होंने ओबामा की न्यूक्लियर डील से अमेरिका को बाहर निकाला और मैक्सिमम प्रेशर नीति अपनाई - यानी कड़े प्रतिबंध लगाकर ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना. ईरान का तेल निर्यात 80% गिर गया. अब 2025 में ट्रंप की वापसी के बाद यह नीति और तेज हो गई है.

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2025 की जून में इजरायल और ईरान के बीच 12 दिनों की जंग हुई, जिसमें अमेरिका ने इजरायल की मदद की. ईरान की IRGC (इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) को बड़ा नुकसान हुआ, लेकिन ईरान ने जवाबी हमले किए. अब जनवरी 2026 में ईरान में बड़े विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं - लोग महंगाई, बेरोजगारी और रेजीम के खिलाफ सड़कों पर हैं. ट्रंप ने इन प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने की बात की है, लेकिन असल में यह ईरान को कमजोर करने का बहाना लगता है.

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वेनेजुएला का उदाहरण: तेल पर कब्जा कैसे?

ट्रंप ने वेनेजुएला को टेस्ट केस की तरह इस्तेमाल किया. जनवरी 2026 में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करवाया. वजह? मादुरो पर ड्रग ट्रैफिकिंग और भ्रष्टाचार के आरोप थे. लेकिन असली मकसद तेल था. वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वाला देश है, लेकिन प्रतिबंधों से उसका तेल उत्पादन गिर गया था.

ट्रंप ने मादुओ को हटाकर नए नेता (जुआन गुआइदो जैसे) को समर्थन दिया. अब अमेरिकी कंपनियां जैसे शेवरॉन और एक्सॉनमोबिल वहां निवेश कर रही हैं. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पहले - यानी अमेरिकी कंपनियों को सस्ता तेल मिले. चीन-रूस का प्रभाव कम हो. वेनेजुएला का तेल अब अमेरिका की ओर जा रहा है, जिससे ग्लोबल बाजार में अमेरिका मजबूत हुआ.

ईरान के साथ भी वैसा ही लगता है. ईरान दुनिया का चौथा बड़ा तेल उत्पादक है (करीब 4 मिलियन बैरल रोजाना), लेकिन प्रतिबंधों से उसका निर्यात गिरकर 1.5 मिलियन बैरल रह गया है - ज्यादातर चीन को. ट्रंप चीन को कमजोर करना चाहते हैं, इसलिए ईरान के तेल पर नजर है.

ट्रंप की ईरान पर नई चालें: तेल को निशाना बनाना

ट्रंप ने ईरान पर मैक्सिमम प्रेशर 2.0 शुरू किया है...

प्रतिबंध और टैरिफ: ईरान से तेल खरीदने वाले किसी भी देश (खासकर चीन) पर 25% टैरिफ लगाया. इससे चीन को महंगा पड़ रहा है.
शैडो फ्लीट पर हमला: ईरान गुप्त जहाजों (शैडो फ्लीट) से तेल बेचता है. ट्रंप ने इन जहाजों को जब्त करने या हमले की धमकी दी है. अमेरिकी नेवी खाड़ी में गश्त बढ़ा रही है.

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सैन्य धमकी: ईरान के प्रदर्शनों के दौरान ट्रंप ने कहा कि अगर हिंसा नहीं रुकी तो हम हस्तक्षेप करेंगे. लेकिन अब कह रहे हैं कि स्थिति सुधर रही है - शायद युद्ध से बचने के लिए.

अन्य कदम: ईरान के न्यूक्लियर साइट्स, मिसाइल प्रोग्राम और प्रॉक्सी ग्रुप्स (हिजबुल्लाह, हूती) पर नजर. अमेरिका ने साइबर हमलों की अफवाहें फैलाई हैं.

ये सब ईरान के तेल राजस्व को काटने के लिए हैं. ईरान का 70% राजस्व तेल से आता है. अगर यह गिरा, तो रेजीम कमजोर हो जाएगा.

जंगी प्लान के पीछे असली खेल क्या है?

ट्रंप की बातें सुनें तो ईरान आतंकवाद का स्पॉन्सर है, इसलिए हमला जरूरी. लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि असली मकसद आर्थिक और रणनीतिक हैं...

तेल पर कंट्रोल: वेनेजुएला जैसा डायरेक्ट कब्जा ईरान पर मुश्किल है. ईरान की सेना मजबूत है और युद्ध महंगा पड़ेगा. इसलिए अप्रत्यक्ष तरीके से यानी प्रतिबंधों से ईरान को इतना कमजोर करो कि वह डील के लिए मजबूर हो. ट्रंप चाहते हैं कि ईरान का तेल अमेरिकी कंपनियों या सहयोगियों को मिले, न कि चीन को.

अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता: चीन ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है. ट्रंप चीन को कमजोर करने के लिए ईरान को अलग-थलग कर रहे हैं. अगर ईरान का तेल बंद हुआ, तो चीन की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी.

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रेजीम चेंज या डील: ट्रंप ईरान में रेजीम बदलना चाहते हैं या नई डील (न्यूक्लियर + मिसाइल पर रोक). प्रदर्शनों को बहाना बनाकर दबाव बढ़ा रहे हैं. लेकिन पूर्ण युद्ध नहीं चाहते, क्योंकि हॉर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो तेल कीमतें 200 डॉलर/बैरल पहुंच सकती हैं - अमेरिका को भी नुकसान.

राजनीतिक फायदा: ट्रंप को वोटरों से वादा था - अमेरिका को मजबूत बनाओ. ईरान पर सख्ती से वह स्ट्रॉन्ग लीडर दिखते हैं.

रिपोर्ट्स (जैसे रॉयटर्स और आईएसडब्ल्यू) कहती हैं कि ट्रंप की टीम में बहस है कि कुछ युद्ध चाहते हैं, कुछ सिर्फ दबाव. अभी मिलिट्री ऑप्शन कम प्राथमिकता पर हैं, लेकिन अगर ईरान ने हमला किया (जैसे US बेस पर), तो युद्ध हो सकता है.

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जोखिम और आगे क्या?

अगर युद्ध हुआ, तो...

  • मिडिल ईस्ट में अशांति: हूती, हिजबुल्लाह सक्रिय हो सकते हैं.
  • ग्लोबल अर्थव्यवस्था प्रभावित: तेल कीमतें बढ़ेंगी, भारत जैसे देशों को महंगाई.
  • ईरान की प्रतिक्रिया: IRGC जवाबी हमले कर सकती है लेकिन लंबे युद्ध में कमजोर पड़ेगी.

ट्रंप कहते हैं कि वह शांति चाहते हैं, लेकिन ईरान को सबक सिखाना जरूरी. ईरान ने चेतावनी दी है कि हमला हुआ तो पूरा क्षेत्र जल उठेगा. दुनिया की नजरें अब ट्रंप के अगले कदम पर हैं.

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