4 करोड़ रुपये का हेलमेट है कमाल का, जमीन से आसमान तक दिखाता है सब नजारा

F35 फाइटर जेट के पायलट जो हेलमेट पहनते हैं, वह दुनिया का सबसे एडवांस्ड हेलमेट है. इसकी कीमत लगभग 4 करोड़ रुपये प्रति यूनिट है. इसमें 6 कैमरों के जरिए 360 डिग्री का पूरा नजारा पायलट के वाइजर पर आता है. पायलट नीचे देखकर जेट के फर्श के पार भी देख सकता है. इसमें नाइट विजन, टारगेटिंग और फ्लाइट डेटा भी दिखता है.

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ये है अमेरिकी फाइटर जेट F-35 लाइटनिंग 2 का पायलट हेलमेट. (Photo: ITG) ये है अमेरिकी फाइटर जेट F-35 लाइटनिंग 2 का पायलट हेलमेट. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:59 PM IST

F35 फाइटर जेट का लाइटनिंग II वर्जन दुनिया का सबसे आधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट है. इस जेट के पायलट जो हेलमेट पहनते हैं, वह दुनिया का सबसे सोफिस्टिकेटेड वीयरेबल टेक्नोलॉजी है जो बड़े पैमाने पर सैन्य उपयोग के लिए बनाया गया है. एक हेलमेट की कीमत लगभग 4 करोड़ रुपये यानी 4 लाख डॉलर है. यह सिर्फ सिर की सुरक्षा नहीं करता, बल्कि पायलट के लिए पूरा कॉकपिट उसके चेहरे पर ला देता है.

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F35 हेलमेट कैसे काम करता है?

इस हेलमेट को हेलमेट माउंटेड डिस्पले सिस्टम (HMDS) या Gen III Helmet कहलाता है. इसमें छह कैमरे जेट के शरीर के चारों ओर लगे होते हैं. ये कैमरे 360 डिग्री का पूरा नजारा लेते हैं और उसे एक सिंगल, सीमलेस फीड में बदलकर हेलमेट के वाइजर पर प्रोजेक्ट कर देते हैं.  

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इसका मतलब है कि पायलट अगर नीचे देखे तो उसे जेट के फ्लोर के पार से जमीन दिखाई देती है, जैसे जेट का फर्श पारदर्शी हो. पायलट बिना सिर घुमाए चारों तरफ देख सकता है. हेलमेट पर नाइट विजन, टारगेटिंग डेटा, फ्लाइट की स्पीड, ऊंचाई, खतरे की चेतावनी और अन्य जरूरी जानकारी सीधे वाइजर पर दिखाई देती है. 

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F35 फाइटर जेट में पारंपरिक Heads-Up Display (HUD) नहीं है. सारी जानकारी हेलमेट के जरिए आती है. यही वजह है कि इसे वियरेबल कॉकपिट भी कहा जाता है.

हेलमेट की कीमत क्यों इतनी ज्यादा?

एक हेलमेट की कीमत लगभग 4 करोड़ रुपये है. यह कीमत इसलिए है क्योंकि हर हेलमेट पायलट के सिर के साइज के हिसाब से कस्टम बनाया जाता है. इसमें हाई-रेजोल्यूशन लेजर स्कैनिंग, 3D मॉडलिंग और स्पेशल फिटिंग की प्रक्रिया होती है, जिसमें दो दिन लग सकते हैं.

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इसमें इस्तेमाल होने वाले एडवांस्ड कैमरा, सेंसर, कंप्यूटर प्रोसेसिंग और डिस्प्ले टेक्नोलॉजी बहुत महंगी है. दशकों की रिसर्च और डेवलपमेंट का खर्च भी इसमें शामिल है. 

पहले वर्जन (Gen I और Gen II) में काफी समस्याएं थीं. इमेज में देरी, हिलने-डुलने की समस्या और रात में हरे रंग की चमक जैसी दिक्कतें आती थीं. इन समस्याओं को ठीक करने में कई साल लग गए. 

अब Gen III वर्जन में ज्यादातर समस्याएं दूर हो चुकी हैं. नए ऑर्गेनिक लाइट-एमिटिंग डायोड (OLED) डिस्प्ले का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इमेज क्लियर और तेज हो गई है.

पायलट और जेट के बीच नया रिश्ता

यह हेलमेट फाइटर पायलटों के साथ जेट के इंटरैक्शन को पूरी तरह बदल देता है. पहले कॉकपिट पायलट के चारों ओर होता था, अब पूरा कॉकपिट पायलट के चेहरे पर है. 

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पायलट को स्थिति का 360 डिग्री अवेयरनेस मिलता है, जो लड़ाई में बहुत बड़ा फायदा देता है. वह दुश्मन को आसानी से ट्रैक कर सकता है. मिसाइल लॉन्च कर सकता है. जटिल मैन्यूवर कर सकता है, बिना नीचे-ऊपर देखे. 

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F35 फाइटर जेट का यह हेलमेट सैन्य तकनीक में एक क्रांतिकारी बदलाव है. यह दिखाता है कि भविष्य में पायलट कितनी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेंगे. हालांकि इसकी ऊंची कीमत और शुरुआती तकनीकी चुनौतियां चर्चा का विषय बनी रहीं. 

फिर भी, आज यह हेलमेट F35 फाइटर जेट को दुनिया के सबसे खतरनाक और स्मार्ट फाइटर जेट्स में से एक बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है. यह सिर्फ एक हेलमेट नहीं, बल्कि पायलट की आंखें, कान और मस्तिष्क का विस्तार है.

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