DRDO और भारतीय नौसेना ने NASM-SR मिसाइल का पहला सफल 'सैल्वो लॉन्च' किया

DRDO और भारतीय नौसेना ने ओडिशा तट पर नौसेना के हेलिकॉप्टर से NASM-SR मिसाइल का पहला सैल्वो लॉन्च किया. एक ही हेलिकॉप्टर से दो मिसाइलें लगातार दागी गईं. 55 किमी रेंज वाली यह स्वदेशी मिसाइल दुश्मन के जहाजों को नष्ट करने में सक्षम है.

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भारतीय नौसेना के हेलिकॉप्टर से NASM-ER मिसाइल लॉन्च होती हुई. (Screengrab: X/Rajnath Singh) भारतीय नौसेना के हेलिकॉप्टर से NASM-ER मिसाइल लॉन्च होती हुई. (Screengrab: X/Rajnath Singh)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:29 PM IST

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन- DRDO और भारतीय नौसेना ने ओडिशा के तट पर बंगाल की खाड़ी में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. भारतीय नौसेना के हेलिकॉप्टर से पहली बार नेवल एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज (NASM-SR) का 'सैल्वो लॉन्च' सफलतापूर्वक किया गया.

इस टेस्ट में एक ही हेलिकॉप्टर से बहुत कम समय के अंतराल पर दो मिसाइलें लगातार दागी गईं. यह भारत की पहली सैल्वो लॉन्चिंग है, जिसमें हवा से दागी जाने वाली एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल हुआ.

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सैल्वो लॉन्च क्या होता है?

सैल्वो लॉन्च का मतलब है एक ही प्लेटफॉर्म से एक के बाद एक कई हथियारों को बहुत कम समय में दागना. युद्ध के समय यह तकनीक बहुत जरूरी होती है. इससे दुश्मन के जहाज पर एक साथ कई वार किए जा सकते हैं. दुश्मन का एयर डिफेंस सिस्टम एक मिसाइल को तो रोक सकता है, लेकिन जब एक साथ 2-3 मिसाइलें आएंगी तो उसे चकमा देना आसान हो जाता है. इससे टारगेट को नष्ट करने की संभावना बहुत बढ़ जाती है.

NASM-SR मिसाइल की खासियतें

NASM-SR भारत की पहली स्वदेशी हवा से दागी जाने वाली एंटी-शिप मिसाइल है. इसकी कुछ बड़ी खासियतें ये हैं... 

  • रेंज: यह मिसाइल 55 किमी तक की दूरी पर दुश्मन के जहाज को मार सकती है.
  • वजन: इसका वजन करीब 385 किलो है. हेलिकॉप्टर से आसानी से ले जाई जा सकती है.
  • वॉरहेड: इसमें 100 किलो का हाई-एक्सप्लोसिव वॉरहेड लगा है, जो बड़े जहाजों को भी डुबो सकता है.
  • गाइडेंस: मिसाइल में IIR सीकर लगा है, यानी यह गर्मी को पकड़कर टारगेट तक जाती है. साथ ही GPS और इनर्शियल नेविगेशन भी है.
  • उड़ान: यह समुद्र की सतह से सिर्फ 5 मीटर ऊपर उड़ती है. इतनी नीचे उड़ने की वजह से दुश्मन का रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाता.

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क्यों जरूरी है यह टेस्ट?

भारतीय नौसेना अभी तक एंटी-शिप मिसाइलों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर थी. NASM-SR के आने से नौसेना को स्वदेशी विकल्प मिल गया है. इसे सीकिंग और MH-60R जैसे नौसेना के हेलिकॉप्टरों से दागा जा सकेगा. यह मिसाइल छोटे युद्धपोत, गश्ती नौकाओं और दुश्मन के सप्लाई जहाजों के खिलाफ बहुत कारगर है.

सैल्वो लॉन्च की सफलता के बाद अब इस मिसाइल का बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होगा. DRDO इसे और अपग्रेड करके इसकी रेंज 150 किमी तक बढ़ाने पर भी काम कर रहा है. यह मिसाइल आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत नौसेना को मजबूत करेगी और हिंद महासागर में भारत की ताकत बढ़ाएगी.

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