होर्मुज में खुली लड़ाई... अमेरिकी वॉरशिप की एंट्री से ईरानी मिसाइलों की बारिश तक, क्या-क्या हुआ

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी वॉरशिप पर ईरान ने मिसाइल-ड्रोन हमला किया. अमेरिका ने जवाब में ईरान के बंदर अब्बास, क़ेश्म द्वीप पर बमबारी की. दोनों तरफ हमले-जवाबी हमले हो रहे हैं.

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ईरानी नौसेना अज्ञात जगह से अमेरिकी वॉरशिप पर मिसाइलों से हमला करती हुई. (Photo: Reuters) ईरानी नौसेना अज्ञात जगह से अमेरिकी वॉरशिप पर मिसाइलों से हमला करती हुई. (Photo: Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 08 मई 2026,
  • अपडेटेड 1:56 PM IST

होर्मुज की खाड़ी में पिछले 48 घंटों के अंदर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अचानक बढ़ गया है. अमेरिकी युद्धपोतों पर ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले, ईरानी टैंकर पर अमेरिकी गोलीबारी और फिर ईरान के बंदरगाह व द्वीपों पर अमेरिकी हमले - ये घटनाएं अब एक खतरनाक सिलसिले में बदल गई हैं. नाम का सीजफायर है, असल में दोनों देश एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं.

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48 घंटे पहले ईरान ने UAE के फुजैरा पोर्ट पर एक दर्जन से ज्यादा बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें दागीं. ईरान ने इस हमले की जिम्मेदारी से इनकार किया. इसके बाद सऊदी अरब और कुवैत ने अमेरिका को अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की इजाजत अचानक रोक दी.

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24 घंटे पहले अमेरिका ने ईरानी टैंकर हँसना पर हमला किया. एक अमेरिकी फाइटर जेट ने टैंकर के रडर (पतवार) को तोड़ दिया. इसके जवाब में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन अमेरिकी डेस्ट्रॉयर- USS Truxtun, USS Mason और USS Rafael Peralta- पर मिसाइलें, ड्रोन और तेज गति वाली नावों से हमला किया.

अमेरिकी जहाजों पर ईरानी हमला

ईरान ने तीन अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाया. ईरानी सेना ने मिसाइल, ड्रोन और छोटी हमलावर नावों का इस्तेमाल किया. अमेरिकी जहाजों ने लेयर्ड डिफेंस का इस्तेमाल कर सभी हमलों को रोक लिया. कोई भी अमेरिकी जहाज क्षतिग्रस्त नहीं हुआ.

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इस तस्वीर में सबसे दाहिने हैं USS Truxtun जिसपर ईरान ने मिसाइल-ड्रोन से हमला किया. (Photo: AFP)

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई में ईरान के मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस और कमांड सेंटर पर हमले किए. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरानी मिसाइलें, ड्रोन और नावें पूरी तरह नष्ट कर दी गईं.

अमेरिका ने ईरान पर किए हमले

कुछ घंटे पहले अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदरगाह बंदर अब्बास, क़ेश्म द्वीप और मिनाब पर हमले किए. ये हमले ईरान के फुजैरा हमले और अमेरिकी जहाजों पर हमले का जवाब थे. ईरान ने भी UAE के पास अमेरिकी जहाजों पर जवाबी हमले किए हैं.

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दोनों तरफ से हमले हो रहे हैं, लेकिन दोनों देश सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि सीजफायर अभी भी कायम है. असलियत यह है कि सीजफायर अब सिर्फ कागजी है. दोनों देश नियंत्रित तरीके से एक-दूसरे से लड़ रहे हैं.

तेल व्यापार और शिपिंग पर बड़ा खतरा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा संभालता है. फिलहाल यहां यातायात लगभग बंद है. मिसाइल, ड्रोन, समुद्री माइन्स और बहुत ज्यादा बीमा खर्च के कारण कोई जहाज आसानी से गुजर नहीं पा रहा है.

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ईरान का ड्रोन बोट जिसे अमेरिका ने मार गिराया. (Photo: Reuters)

फ्रेंच कंपनी CMA CGM का जहाज सैन एंटोनियो हाल ही में हमले का शिकार हुआ, जिसमें कई क्रू सदस्य घायल हो गए. हजारों नाविक अब भी फंस गए हैं, जिनमें सैकड़ों भारतीय भी शामिल हैं. खाने की कमी और रोजाना होने वाले हमलों से उनकी हालत बेहद खराब है.

Project Freedom का क्या हुआ?

अमेरिका ने हाल में Project Freedom शुरू किया था, जिसमें फंसे हुए व्यापारिक जहाजों को ओमान के रास्ते सुरक्षित निकालने की योजना थी. लेकिन कुछ ही दिनों में सऊदी और कुवैत के एयरबेस बंद होने के कारण इसे रोकना पड़ा. हालांकि अमेरिका का समुद्री ब्लॉकेड अब भी जारी है.

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यह नया पावर वॉर बहुत खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाकर उसके न्यूक्लियर कार्यक्रम पर डील चाहता है. ईरान अपने क्षेत्रीय प्रभाव और होर्मुज पर नियंत्रण नहीं छोड़ना चाहता.

विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देश अभी पूर्ण युद्ध नहीं चाहते, लेकिन छोटे-छोटे हमले-जवाबी हमले जारी रह सकते हैं. होर्मुज में यह लड़ाई दुनिया के तेल के दाम, वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा असर डाल रही है.

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