मिडिल ईस्ट में हाल ही में हुए भीषण युद्ध और उसके बाद हुए सीजफायर के बाद ऐसा माना जा रहा था कि ईरान सैन्य रूप से कमजोर हो चुका है, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है. अमेरिकी समाचार चैनल CNN की एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के ताजा आकलनों से पता चला है कि ईरान अपने सैन्य-औद्योगिक बेस को उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से दोबारा खड़ा कर रहा है.
यूएस-इजरायल के संयुक्त हमलों में तबाही झेलने के बावजूद ईरान की इस अभूतपूर्व रिकवरी ने वॉशिंगटन के रक्षा गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने खुफिया इनपुट्स के हवाले से सीएनएन को बताया कि ईरान ने सैन्य पुनर्निर्माण के मामले में अमेरिकी खुफिया समुदाय द्वारा तय की गई सभी टाइमलाइन को पीछे छोड़ दिया है.
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यह नई खुफिया रिपोर्ट अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर जनरल ब्रैड कूपर के उन दावों को सीधे तौर पर खारिज करती है, जो उन्होंने हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस के सामने किए थे. जनरल कूपर ने दावा किया था कि अमेरिकी और इजरायली हमलों में ईरान के रक्षा औद्योगिक आधार का लगभग 90% हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो चुका है. तेहरान को इस तबाही से उबरने में कई साल लग जाएंगे.
अब अमेरिकी खुफिया सूत्रों का स्पष्ट रूप से मानना है कि ईरान के सैन्य उद्योग के कई हिस्से सालों में नहीं, बल्कि महज कुछ महीनों के भीतर पूरी तरह रिकवर हो जाएंगे. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) युद्धविराम के महज छह सप्ताह के भीतर ही दोबारा डिफेंस इंडस्ट्री खड़ी करने में जुट गया है, जिससे वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए फिर से एक बड़ा क्षेत्रीय खतरा बन गया है.
ईरान की वो 7 बड़ी तैयारियां, जो बढ़ा रही हैं अमेरिका की चिंता
खुफिया रिपोर्टों और विशेषज्ञों के विश्लेषण के आधार पर ईरान इस समय जिन प्रमुख तैयारियों और पुनर्निर्माण के रणनीतिक कदमों में जुटा है, वे इस प्रकार हैं...
1. अटैक ड्रोन्स का उत्पादन फिर से शुरू करना
युद्ध के शुरुआती हफ्तों में अमेरिकी और इजरायली वायुसेना ने ईरान के ड्रोन निर्माण संयंत्रों को प्राथमिक निशाना बनाया था, जिससे बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा था. लेकिन खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, संघर्षविराम के महज डेढ़ महीने के भीतर ही ईरान ने अपने घातक अटैक ड्रोन्स के प्रोडक्शन साइकिल को फिर से एक्टिव कर दिया है. यह तेहरान की ओर से अमेरिका को सबसे पहला और सीधा झटका है.
2. मिसाइल लॉन्चर्स की तेजी से बहाली
युद्ध के दौरान नष्ट या क्षतिग्रस्त किए गए मिसाइल लॉन्च पैड्स और मोबाइल लॉन्चर्स को IRGC के इंजीनियरों द्वारा युद्धस्तर पर बदला और सुधारा जा रहा है. रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मिसाइल साइटों पर नए लॉन्चर्स की यह त्वरित तैनाती दर्शाती है कि ईरान की जवाबी हमला करने की क्षमता बहुत तेजी से पुरानी स्थिति में लौट रही है.
3. प्रोडक्शन लाइन्स और मैन्युफैक्चरिंग हब
ईरान केवल टूटे हुए ढांचों की मरम्मत नहीं कर रहा, बल्कि अपनी असेंबली और प्रोडक्शन लाइन्स को आधुनिक तकनीकों से अपग्रेड भी कर रहा है. क्षतिग्रस्त कारखानों को फिर से चालू करके ईरान ने यह साबित कर दिया है कि उसके पास हथियारों के निर्माण के लिए जरूरी कच्चे माल और तकनीकी पुर्जों का बैकअप पहले से मौजूद था.
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4. महत्वपूर्ण सैन्य बुनियादी ढांचे को फिर से बनाना
अंडरग्राउंड टनल नेटवर्क (भूमिगत सुरंगों), कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स और रडार प्रणालियों जैसे रणनीतिक रक्षा ढांचों को फिर से खड़ा किया जा रहा है. ईरान अपने इन नए ठिकानों को इस तरह से डिजाइन कर रहा है ताकि भविष्य में होने वाले हवाई हमलों का इन पर कम से कम असर पड़े.
5. अमेरिकी खुफिया अनुमानों और टाइमलाइन्स को ध्वस्त करना
अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान था कि प्रतिबंधों और भारी बमबारी के कारण ईरान के हथियार उद्योग को दोबारा खड़े होने में लंबा वक्त लगेगा. लेकिन ईरान ने अपनी स्वदेशी इंजीनियरिंग और कुशल लेबर फोर्स के दम पर पश्चिमी देशों के सभी कूटनीतिक और सैन्य आकलनों को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है.
6. प्रॉक्सी संगठनों को हथियारों की निरंतर सप्लाई चेन बनाए रखना
अपनी घरेलू क्षमताओं को बहाल करने के साथ ईरान ने लेबनान, यमन और इराक में सक्रिय प्रॉक्सी नेटवर्क के लिए हथियारों की रसद को टूटने नहीं दिया है. ड्रोन उत्पादन शुरू होने का सीधा मतलब है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों के इर्द-गिर्द खतरा फिर से मंडराने लगा है.
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7. क्षेत्रीय खतरे के रूप में खुद को बनाए रखना
सैन्य आकलनों के अनुसार, ईरान का यह आक्रामक रुख इस बात की तैयारी है कि वह अमेरिका के सामने किसी भी कीमत पर आत्मसमर्पण नहीं करेगा. अपनी सैन्य शक्ति को इतनी तेजी से पुनर्जीवित करके वह वॉशिंगटन और तेल अवीव को यह कड़ा संदेश दे रहा है कि वह क्षेत्र में अपनी धाक और दादागिरी को कम नहीं होने देगा.
क्या टल जाएगा मिडिल ईस्ट का संकट?
वॉशिंगटन पोस्ट की पिछली रिपोर्टों से यह साफ हो चुका है कि इजरायल की रक्षा करने के चक्कर में अमेरिका खुद अपनी मिसाइल डिफेंस इन्वेंट्री (THAAD और SM-3 इंटरसेप्टर) का लगभग आधा हिस्सा खाली कर चुका है. ऐसे नाजुक मोड़ पर जब अमेरिका सैन्य और आर्थिक रूप से दबाव में है.
ईरान की इस अप्रत्याशित और तीव्र रिकवरी ने अमेरिकी रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है. हालांकि दोनों पक्षों के बीच पर्दे के पीछे कूटनीतिक और अप्रत्यक्ष बातचीत के जरिए अंतिम समझौते का मसौदा तैयार करने की कोशिशें भी चल रही हैं, लेकिन जमीन पर ईरान की ये 7 तैयारियां साफ संकेत देती हैं कि तेहरान बातचीत की मेज पर भी खुद को एक कमजोर देश के रूप में नहीं, बल्कि एक बराबर के सैन्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में पेश करना चाहता है.
यदि यह गतिरोध जल्द ही किसी ठोस कूटनीतिक समाधान पर नहीं पहुंचता, तो ईरान की ये तेज तैयारियां आने वाले समय में अमेरिका और इजरायल के लिए एक नए और अधिक घातक सैन्य संकट का सबब बन सकती हैं.
ऋचीक मिश्रा