भारत से पड़ी मार से सबक? क्रूज मिसाइलों का जखीरा जुटाने में लगा PAK

पाकिस्तान ने स्वदेशी और हल्के वजन वाली रसूब-250 क्रूज मिसाइल पेश की है. आसिम मुनीर की सेना आजकल क्रूज मिसाइलों पर फोकस कर रही है. क्योंकि ये रडार को चकमा दे सकती है.

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पाकिस्तान का फोकस इस समय पूरी तरह क्रूज मिसाइलों का जखीरा खड़ा करने पर है. (Photo: ITG) पाकिस्तान का फोकस इस समय पूरी तरह क्रूज मिसाइलों का जखीरा खड़ा करने पर है. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:40 PM IST

दक्षिण एशिया में हथियारों की होड़ और रणनीतिक संतुलन के बीच पाकिस्तान ने रक्षा क्षेत्र में नया कदम उठाया है. पाकिस्तानी डिफेंस इंजीनियरों ने देश की पहली स्वदेशी और हल्के वजन वाली स्टील्थ क्रूज मिसाइल रसूब-250 (Rasoob-250) पेश किया है. यह एक ऐसी आधुनिक मिसाइल प्रणाली है जो दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर उनके ठिकानों को तबाह करने की क्षमता रखती है. 

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इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसका हल्का वजन और मल्टी-परपज इस्तेमाल है, जिसे किसी एक फाइटर जेट तक सीमित न रखकर कई तरह के हवाई प्लेटफार्मों से दागा जा सकता है. यह मिसाइल तकनीकी रूप से एडवांस दुश्मनों के खिलाफ पाकिस्तान की रणनीति में एक बड़े अंतर को पाटने का काम करेगी.

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रसूब-250 की विशेषताएं और मारक क्षमता

पाकिस्तानी डिफेंस इंडस्ट्री के अनुसार, रसूब-250 एक एयर-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल (ALCM) है. इसका कुल वजन महज 285 किलोग्राम है, जो इसे पारंपरिक क्रूज मिसाइलों की तुलना में बेहद हल्का और फुर्तीला बनाता है. हल्के वजन के कारण ही इसे लड़ाकू विमानों के साथ-साथ मिलिट्री हेलीकॉप्टरों और ड्रोनों (UAVs) से भी आसानी से लॉन्च किया जा सकता है. 

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यह मिसाइल 350 किलोमीटर की दूरी तक सटीक मार करने में सक्षम है, जो इसे एक बेहतरीन स्टैंड-ऑफ हथियार बनाती है; यानी पाकिस्तानी विमानों को दुश्मन की हवाई सीमा में घुसे बिना, सुरक्षित दूरी से ही हमला करने की आजादी मिलती है.

यह मिसाइल 864 km/hr की सबसोनिक गति से उड़ान भरती है, जिसका मतलब है कि यह ध्वनि की गति से थोड़ी धीमी लेकिन सतह के बेहद करीब (सी-स्किमिंग) उड़कर रडार की नजरों से बच सकती है. रसूब-250 में 75 किलोग्राम का सेमी-आर्मर-पियर्सिंग (Semi-Armor-Piercing) वॉरहेड लगाया गया है. 

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यह वॉरहेड विशेष रूप से हल्के बख्तरबंद वाहनों, सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों, क्रूजर तथा डिस्ट्रॉयर्स के बख्तरबंद कवच को भेदकर उन्हें भारी नुकसान पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी तुलना नॉर्वे की जॉइंट स्ट्राइक मिसाइल (JSM), तुर्की की SOM क्रूज मिसाइल और चीन की CM-400AKG मिसाइल से हो रही है.

क्रूज मिसाइलों पर क्यों दांव लगा रहा है पाकिस्तान?

पाकिस्तान वायु सेना के रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन सुल्तान हाली के अनुसार, पाकिस्तान की नई सैन्य डॉक्ट्रिन (सैन्य सिद्धांत) में मिसाइलें तीन मुख्य कारणों से केंद्रीय भूमिका निभा रही हैं...

डिटेरेंस (प्रतिरोध): ये मिसाइलें दुश्मन के इलाके में अपने पायलटों और महंगे लड़ाकू विमानों को जोखिम में डाले बिना दूर से ही हमला करने का विकल्प देती हैं.

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फोर्स मल्टीप्लिकेशन (सैन्य ताकत में इजाफा): क्रूज मिसाइलें वायुसेना और नौसेना दोनों की पहुंच को कई गुना बढ़ा देती हैं, जिससे हवा से जमीन और समुद्र से जमीन पर अचूक हमले किए जा सकते हैं.

रणनीतिक संतुलन (Strategic Balance): जिस तरह ईरान अपने से अधिक शक्तिशाली दुश्मनों का मुकाबला करने के लिए मिसाइल तकनीक का इस्तेमाल करता है, ठीक उसी तरह पाकिस्तान भी इसे तकनीकी रूप से बेटर विरोधियों (जैसे भारत) के खिलाफ एक कम लागत वाले 'इक्वलाइजर' के रूप में देखता है.

स्वदेशी रक्षा उद्योग का विकास और सैन्य रणनीति में बदलाव

बहुरिया यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर आदम सऊद का कहना है कि रसूब-250 का विकास पाकिस्तान की स्थानीय इंजीनियरिंग विशेषज्ञता के लगातार विकास को दर्शाता है. पाकिस्तान ने हाल ही में अपनी फतेह-3 और फतेह-4 मिसाइलों का भी सफल परीक्षण किया है, जो उसके बढ़ते घरेलू हथियार उद्योग की गवाही देते हैं. पाकिस्तान के इस रक्षा विकास के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारक काम कर रहे हैं.

  • पहला, नेसकॉम (NESCOM), जीआईडीएस (GIDS) और एयर वेपन्स कॉम्प्लेक्स जैसे स्वदेशी अनुसंधान केंद्रों में सॉफ्टवेयर, कंपोजिट मैटेरियल और गाइडेंस सिस्टम (सटीक नेविगेशन) पर किया गया भारी निवेश.
  • दूसरा, क्षेत्रीय खतरों को देखते हुए आधुनिक स्टैंड-ऑफ हथियारों की आवश्यकता.
  • तीसरा, पाकिस्तानी सशस्त्र बलों की रणनीति में आया नया बदलाव, जहां वे अब मिसाइल टारगेटिंग को साइबर वॉरफेयर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के साथ जोड़कर अपनी मारक क्षमता को और अधिक घातक बना रहे हैं.
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