IIT जम्मू का स्टार्टअप बना रहा है हाई-स्पीड कॉम्बैट ड्रोन 'स्काई रीपर'

IIT जम्मू के स्टार्टअप ने 'स्काई रीपर' नामक हाई-स्पीड कॉम्बैट ड्रोन विकसित किया है. यह 550 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है. 30 किलोग्राम पेलोड ले जा सकता है.

Advertisement
रूस-यूक्रेन की जंग और ऑपरेशन सिंदूर में हम लोग ड्रोन का इस्तेमाल देख चुके हैं. (Photo: Representative/ITG) रूस-यूक्रेन की जंग और ऑपरेशन सिंदूर में हम लोग ड्रोन का इस्तेमाल देख चुके हैं. (Photo: Representative/ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:33 PM IST

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जम्मू में एक स्टार्टअप ने हाई-स्पीड कॉम्बैट ड्रोन बना रहा है. इस ड्रोन का नाम स्काई रीपर रखा गया है. यह ड्रोन युद्ध क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाला एक आधुनिक हथियार साबित हो सकता है. इंजीनियरों का कहना है कि यह ड्रोन 30 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकता है. 550 km/hr की रफ्तार से उड़ सकता है.  

Advertisement

स्काई रीपर ड्रोन क्या है?

स्काई रीपर एक हाई-स्पीड कॉम्बैट ड्रोन दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने, निगरानी करने और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए बनाया जा रहा है. इसकी सबसे खास बात यह है कि यह बहुत तेज उड़ता है, जिससे दुश्मन के रडार या हवाई सुरक्षा को चकमा देना आसान हो जाता है. इंजीनियरों के अनुसार इसमें हल्के हथियार, विस्फोटक सामग्री, कैमरा या अन्य उपकरण लगाए जा सकते हैं. 

यह भी पढ़ें: Exclusive: भारत को इस हफ्ते मिलेगा चौथा S-400 एयर डिफेंस सिस्टम

स्वदेशी टर्बोजेट इंजन पर काम

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी उपलब्धि स्वदेशी टर्बोजेट इंजन का विकास है. आईआईटी जम्मू के प्रोपल्शन एंड एनर्जी रिसर्च लैब में इस इंजन को बनाया जा रहा है. टर्बोजेट वह इंजन है जो हाई-स्पीड उड़ान के लिए जरूरी होता है. पहले भारत को ऐसे इंजन विदेश से आयात करने पड़ते थे. यह इंजन ड्रोन को इतनी तेज स्पीड देने में मदद करेगा. इंजन का परीक्षण चल रहा है. जल्द ही ड्रोन उड़ान भरने के लिए तैयार होगा. 

Advertisement

क्यों जरूरी है यह ड्रोन?

आज के युद्ध में ड्रोन बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. यूक्रेन-रूस युद्ध और हाल के भारत-पाकिस्तान तनाव में ड्रोन का इस्तेमाल साफ दिखा. सामान्य ड्रोन धीरे उड़ते हैं. आसानी से पकड़े जा सकते हैं. लेकिन स्काई रीपर जैसा हाई-स्पीड ड्रोन दुश्मन के इलाके में तेजी से घुसकर काम कर सकता है. 

यह ड्रोन निगरानी, हमला और खुफिया जानकारी इकट्ठा करने में मदद करेगा. 30 किलोग्राम पेलोड ले जाने की क्षमता इसे छोटे-मोटे मिसाइल जैसा बना देती है. यह सस्ता है और कई बार इस्तेमाल कर सकते हैं.  

यह भी पढ़ें: Exclusive: पाकिस्तान की खुली पोल, ऑपरेशन सिंदूर का सच खुद आतंकियों ने बताया, देखिए Video

आईआईटी जम्मू की भूमिका

आईआईटी जम्मू इस प्रोजेक्ट को इनक्यूबेट कर रहा है, यानी सपोर्ट और मार्गदर्शन दे रहा है. यहां के प्रोफेसर और छात्र मिलकर काम कर रहे हैं. यह प्रोजेक्ट रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप्स की बढ़ती भूमिका को दिखाता है. सरकार की नीतियों के कारण अब युवा इंजीनियर रक्षा तकनीक पर काम कर रहे हैं. इस ड्रोन के विकास से भारतीय सेना को स्वदेशी हथियार मिलेंगे, जिससे विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement