क्या ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बारूदी सुरंगें यानी समुद्री खदानें बिछा दी हैं? यह सवाल इन दिनों पूरी दुनिया को चिंता में डाले हुए है. क्योंकि मंगलवार को अमेरिका ने ईरान के 16 माइनलेयर जहाजों को पूरी तरह नष्ट कर दिया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी कि अगर ईरान ने कोई खदान बिछाई है तो उसे तुरंत हटा ले, वरना भारी सैन्य कार्रवाई होगी.
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास अभी कोई पक्की खबर नहीं है कि ईरान ने खदानें बिछाई हैं, लेकिन फिर भी वे तुरंत हटानी चाहिए. इस इलाके से दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल और LPG गुजरता है. पहले से ही ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध की वजह से यहां शिपिंग लगभग बंद हो चुकी है. अब खदानों का खतरा और बढ़ गया है.
यह भी पढ़ें: ईरान ले आया बैटरी वाला ड्रोन, इजरायल के खिलाफ करेगा इस्तेमाल... जानिए नए वैरिएंट की खासियत
आइए जानते हैं समुद्री खदानें क्या होती हैं, माइनलेयर जहाज कैसे काम करते हैं, क्या-क्या हुआ और स्ट्रेट में मौजूद जहाजों को कितना बड़ा खतरा है.
समुद्री खदानें क्या होती हैं और ये कैसे काम करती हैं?
समुद्री खदानें पानी के अंदर छिपे बम होते हैं जो जहाजों को नुकसान पहुंचाने के लिए बनाए जाते हैं. ये मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं.
पहले... मोर्ड माइन्स यानी लंगर वाली खदानें जो समुद्र के तल से रस्सी से बंधी रहती हैं. पानी की सतह के पास 5-10 मीटर ऊपर तैरती रहती हैं.
दूसरे... बॉटम माइन्स यानी तल वाली खदानें जो सीधे समुद्र के नीचे रखी जाती हैं. ये खदानें 100 से 500 किलोग्राम तक विस्फोटक रख सकती हैं.
काम करने का तरीका भी अलग-अलग है – कुछ संपर्क वाली होती हैं जो जहाज के सीधे टकराने पर फट जाती हैं, कुछ चुंबकीय होती हैं जो बड़े जहाज के लोहे को महसूस करके फट जाती हैं, कुछ ध्वनि वाली होती हैं जो जहाज के इंजन की आवाज सुनकर सक्रिय हो जाती हैं.
यह भी पढ़ें: क्लस्टर बम, व्हाइट फॉस्फोरस बम, स्टेल्थ बॉम्बर और AI सिस्टम... वो नए हथियार जिनका ईरान वॉर में हो रहा इस्तेमाल
कुछ दबाव वाली होती हैं जो पानी में जहाज के गुजरने से पैदा हुए दबाव को पहचान लेती हैं. ईरान के पास रूस और चीन से ली गई पुरानी खदानें भी हैं जो 200 मीटर तक गहरे पानी में काम करती हैं. ये खदानें छोटी नावों से आसानी से बिछाई जा सकती हैं. एक बार बिछ जाने के बाद कई महीनों तक खतरा बनी रहती हैं.
माइनलेयर जहाज क्या होते हैं और ईरान के पास कैसे हैं?
माइनलेयर जहाज खास तरह के छोटे-मोटे जहाज या तेज गति वाली नावें होती हैं जिन्हें समुद्री खदानें बिछाने के लिए डिजाइन किया गया है. इनमें खास क्रेन और रेल जैसा सिस्टम होता है जिससे 50 से 200 तक खदानें एक साथ पानी में गिराई जा सकती हैं. ये जहाज रात के अंधेरे में चुपके से काम करते हैं. तेजी से भाग सकते हैं.
ईरान के पास ऐसे दर्जनों छोटे जहाज हैं जो स्पीडबोट से लेकर मध्यम आकार के माइनलेयर तक हैं. ये नावें बहुत सस्ती और आसानी से छिपाई जा सकती हैं. अमेरिकी सेना ने मंगलवार को जिन 16 माइनलेयर जहाजों को नष्ट किया, वे ठीक इसी तरह के थे. इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने 10 निष्क्रिय माइनलेयर जहाजों को भी पूरी तरह तबाह कर दिया है.
पेंटागन ने बताया कि ये जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ही थे. इनमें खदानें भरी हुई थीं या खदानें बिछाने की तैयारी में थे. अमेरिका अब ड्रग तस्करों के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली उसी तकनीक का उपयोग कर रहा है जिससे कोई भी नाव या जहाज खदान बिछाने की कोशिश करे तो उसे तुरंत नष्ट किया जा सके.
यह भी पढ़ें: ड्रोन-मिसाइलें और धुआं-धुआं आसमान...देखिए अंतरिक्ष से कैसी दिख रही ईरान की जंग
ट्रंप की चेतावनी और अमेरिका का हमला क्या बताता है?
राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि अगर ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कोई खदान बिछाई है तो उसे तुरंत हटा ले, वरना सैन्य परिणाम भुगतने होंगे. उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका के पास अभी कोई रिपोर्ट नहीं है कि ईरान ने खदानें बिछाई हैं, लेकिन फिर भी खतरा है. पेंटागन ने मंगलवार को ही ईरान के माइनलेयर जहाजों और खदान भंडारण सुविधाओं पर हमले किए.
इस बीच ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस की शिपिंग लगभग बंद हो चुकी है. टॉप अमेरिकी जनरल डैन केन ने बताया कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिकी सेना जहाजों को एस्कॉर्ट करके सुरक्षित गुजारेगी. लेकिन अभी तक अमेरिकी नौसेना ने शिपिंग कंपनियों के अनुरोधों को ठुकरा दिया है.
एस्कॉर्ट पोस्ट डिलीट होने का मामला और ईरान की प्रतिक्रिया
ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने एक्स पर पोस्ट किया कि अमेरिकी नौसेना ने एक तेल टैंकर को स्ट्रेट से सुरक्षित निकाल लिया है, लेकिन बाद में यह पोस्ट डिलीट कर दिया गया. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कारोलिन लीविट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका ने अभी तक कोई तेल टैंकर या जहाज एस्कॉर्ट नहीं किया है.
यह भी पढ़ें: ... वो 13 देश जिन्होंने वॉर में जानमाल का नुकसान झेला, जानिए कहां गिरीं ड्रोन-मिसाइलें
ऊर्जा विभाग ने बताया कि पोस्ट गलत कैप्शन के कारण डिलीट किया गया. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी ने कहा कि अमेरिकी बेड़े या उसके सहयोगियों की कोई भी हरकत हमारे मिसाइलों और ड्रोन्स से रोकी जाएंगी. उन्होंने साफ कहा कि कोई तेल जहाज एस्कॉर्ट नहीं किया गया. इस घटना से साफ है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मौजूद जहाजों को कितना खतरा है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बहुत संकरा है – सबसे जगह पर सिर्फ 33 किमी चौड़ा है. तेल टैंकरों का रास्ता और भीड़ है. अगर यहां एक भी समुद्री खदान फट गई तो बड़ा तेल टैंकर डूब सकता है, उसका पूरा तेल रिस सकता है. समुद्र प्रदूषित हो जाएगा. एक खदान से ही 300 मीटर लंबा सुपरटैंकर डूब सकता है. इससे अरबों डॉलर का नुकसान होता है.
बीमा कंपनियां ऐसे इलाके में कवरेज देने से मना कर देती हैं. शिपिंग कंपनियां रास्ता बदल लेती हैं या पूरी तरह बंद कर देती हैं. इससे दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं. अभी युद्ध की वजह से शिपिंग लगभग रुक चुकी है, लेकिन अगर ईरान ने सच में खदानें बिछा दीं तो आने-जाने वाले सैकड़ों जहाजों के लिए खतरा बन जाएगा.
बिना फटे हुए खदानें सालों तक पानी में पड़ी रह सकती हैं. छोटी नावों या मछली पकड़ने वाले जहाजों के लिए भी घातक हैं. अमेरिका अब एस्कॉर्ट की योजना बना रहा है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे खतरा और बढ़ गया है.
यह पूरा मामला दिखाता है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज न सिर्फ तेल का गला है बल्कि युद्ध का सबसे संवेदनशील इलाका भी बन गया है. ईरान का दावा है कि वह सिर्फ अपनी रक्षा कर रहा है, जबकि अमेरिका कह रहा है कि खदानें बिछाना पूरी दुनिया के लिए खतरा है. साधारण लोग समझ लें कि अगर यहां खदानें नहीं हटाई गईं तो तेल महंगा होने के साथ-साथ पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है.
ऋचीक मिश्रा