अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने क्यूबा के छह दशक पुराने कम्युनिस्ट शासन को उखाड़ फेंकने के लिए अपने अब तक के सबसे आक्रामक अभियान का शंखनाद कर दिया है. पिछले 24 घंटों के भीतर अंतरराष्ट्रीय पटल पर दो ऐसे बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने इस बात की तस्दीक कर दी है कि ट्रंप का 'मिशन क्यूबा' पूरी रफ्तार से शुरू हो चुका है.
अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति और 94 वर्षीय कम्युनिस्ट नेता राउल कास्त्रो के खिलाफ आपराधिक चार्जशीट दायर करना और दूसरी तरफ ट्रंप व विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा क्यूबा के सामने 'नए संबंधों का फॉर्मूला' पेश करना- इन दोनों रणनीतिक चालों ने हवाना से लेकर वॉशिंगटन तक खलबली मचा दी है.
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इस समय क्यूबा पहले से ही अमेरिकी तेल प्रतिबंधों के कारण भयंकर ऊर्जा संकट, ब्लैकआउट और आंतरिक विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ने यह दोहरा वार करके क्यूबा के मौजूदा राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कानेल के प्रशासन को पूरी तरह घुटनों पर लाने की तैयारी कर ली है.
ट्रंप प्रशासन का यह कदम ठीक उसी रणनीति या 'प्लेबुक' की याद दिलाता है, जिसके तहत कुछ समय पहले वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो के खिलाफ कानूनी और सैन्य शिकंजा कसा गया था.
राउल कास्त्रो पर चार्जशीट: 30 साल पुराने विमान हादसे का बदला
अमेरिका के एक्टिंग अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने मियामी के ऐतिहासिक 'फ्रीडम टावर' से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो के खिलाफ लगे संगीन आरोपों का खुलासा किया. यह चार्जशीट फ्लोरिडा की एक फेडरल कोर्ट में अनसील की गई है, जिसमें 94 वर्षीय कास्त्रो पर अमेरिकी नागरिकों की हत्या की साजिश रचने, चार लोगों की हत्या करने और दो नागरिक विमानों को नष्ट करने के आरोप लगाए गए हैं.
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यह मामला 24 फरवरी 1996 का है, जब राउल कास्त्रो क्यूबा के रक्षा मंत्री थे. उनके आदेश पर क्यूबा के लड़ाकू विमानों ने 'ब्रदर्स टू द रेस्क्यू' नाम के एक मानवीय सहायता संगठन के दो छोटे नागरिक विमानों को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मार गिराया था. इस हमले में चार अमेरिकी नागरिक मारे गए थे.
अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि न्याय में भले ही 30 साल की देरी हुई हो, लेकिन ट्रंप प्रशासन अपने नागरिकों की सुरक्षा और उनके हत्यारों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है. एक्टिंग अटॉर्नी जनरल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आप अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाते हैं, तो अमेरिकी कानून आपका पीछा कभी नहीं छोड़ेगा—चाहे आप किसी भी पद पर रहे हों.
हालांकि कानूनी जानकारों का मानना है कि राउल कास्त्रो को वास्तव में अमेरिकी अदालत के कटघरे में खड़ा करना बेहद मुश्किल होगा, लेकिन इस चार्जशीट के जरिए वॉशिंगटन ने हवाना को यह संदेश दे दिया है कि उनके शीर्ष नेतृत्व की अंतरराष्ट्रीय वैधता अब समाप्त हो चुकी है.
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'वेनेजुएला फॉर्मूला' और सैन्य दबाव की आहट
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राउल कास्त्रो के खिलाफ कानूनी कार्रवाई केवल एक शुरुआत है. अमेरिका असल में क्यूबा में पूरी तरह से सत्ता परिवर्तन चाहता है. हाल ही में अमेरिकी सैन्य बलों द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने के बाद, ट्रंप ने उसी फॉर्मूले को क्यूबा पर आजमाने के संकेत दिए हैं.
जब पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या क्यूबा में भी मादुरो जैसी गिरफ्तारी की जाएगी, तो उन्होंने सीधा जवाब न देते हुए केवल इतना कहा कि मैं इस बारे में अभी कुछ नहीं कहना चाहता, लेकिन क्यूबा पूरी तरह बिखर रहा है. वहां की सरकार नियंत्रण खो चुकी है.
इस कानूनी घेराबंदी के तुरंत बाद अमेरिकी नौसेना का परमाणु-संचालित विमान वाहक पोत USS निमिट्ज़ (USS Nimitz) अपने युद्धक बेड़े के साथ दक्षिणी कैरिबियन सागर में दाखिल हो चुका है. अमेरिकी साउदर्न कमांड ने सोशल मीडिया पर इस सैन्य गतिविधि को अपनी 'सर्वोच्च मारक क्षमता और तैयारियों' का प्रदर्शन बताया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कोस्ट गार्ड एकेडमी में दिए अपने भाषण में भी साफ तौर पर कहा कि वे 'हवाना के तटों से लेकर पनामा नहर तक' कानून व्यवस्था और अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए विदेशी ताकतों तथा अराजकता को खदेड़ देंगे.
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नए संबंधों का फॉर्मूला: अमेरिकी मदद और मार्को रुबियो की शर्तें
एक तरफ जहां अमेरिका ने कानूनी और सैन्य दबाव बढ़ा दिया है. दूसरी तरफ क्यूबा की जनता और वहां के शासकों के सामने एक 'सुनहरा समझौता' भी पेश किया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बड़ा बयान जारी करते हुए क्यूबा की जनता के लिए वाशिंगटन और हवाना के बीच 'नए संबंधों का फॉर्मूला' सामने रखा है.
इस नए फॉर्मूले के तहत अमेरिका ने क्यूबा को भीषण आर्थिक और खाद्यान्न संकट से उबारने के लिए $100 मिलियन (10 करोड़ डॉलर) की मानवीय सहायता देने की पेशकश की है. हालांकि, इस अमेरिकी मदद और नए डिप्लोमैटिक संबंधों के लिए मार्को रुबियो ने बेहद कड़ी शर्तें रखी हैं.
वाशिंगटन के इस नए फॉर्मूले के मुताबिक क्यूबा को अपने देश में कम्युनिस्ट एकाधिकार को समाप्त करना होगा. राजनीतिक बंदियों को रिहा करना होगा. देश में बहुदलीय और स्वतंत्र चुनाव कराने होंगे. साथ ही बड़े पैमाने पर बुनियादी आर्थिक सुधार लागू करने होंगे.
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यदि क्यूबा का मौजूदा शासन इन शर्तों को स्वीकार करता है, तो अमेरिका प्रतिबंध हटाकर उनके साथ सामान्य द्विपक्षीय संबंध स्थापित करने के लिए तैयार है. अन्यथा उन्हें और अधिक कड़े प्रतिबंधों और संभावित सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा.
क्यूबा का पलटवार और भविष्य की अनिश्चितता
अमेरिका के इस चौतरफा हमले पर क्यूबा के वर्तमान राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कानेल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. डियाज-कानेल ने राउल कास्त्रो के खिलाफ अमेरिकी चार्जशीट को एक 'घटिया राजनीतिक स्टंट' करार दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन क्यूबा के खिलाफ अवैध और क्रूर सैन्य आक्रामकता को सही ठहराने के लिए इतिहास से छेड़छाड़ कर रहा है. झूठ का सहारा ले रहा है.
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उन्होंने कहा कि 1996 में क्यूबा ने अपनी हवाई सीमा की रक्षा के लिए वह कदम उठाया था, जिसकी चेतावनी पहले ही दी जा चुकी थी. फिलहाल, इन दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है. अमेरिका ने मेक्सिको और अन्य लैटिन अमेरिकी देशों पर भी दबाव बनाकर क्यूबा को होने वाली तेल की आपूर्ति को पूरी तरह ठप करवा दिया है.
क्यूबा के मेडिकल मिशनों को भी कई देशों से वापस भेजा जा रहा है, जिससे उनकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ टूट चुकी है. अब देखना यह होगा कि क्या क्यूबा का कम्युनिस्ट शासन ट्रंप के इस कड़े 'नए फॉर्मूले' के आगे घुटने टेक कर समझौता करता है या फिर यह तनाव कैरिबियन क्षेत्र में एक नए बड़े सैन्य टकराव का रूप ले लेता है.
ऋचीक मिश्रा