ईरान के इस छोटे द्वीप पर हमला किया तो शुरू हो जाएगा वर्ल्ड वॉर-3... अमेरिका-इजरायल ने क्यों नहीं छुआ इसे अभी तक

खार्ग आइलैंड ईरान की तेल सप्लाई की लाइफलाइन है. यह द्वीप रोजाना 70 लाख बैरल तेल निर्यात करता है, जो ईरान के 90% विदेशी तेल का आधार है. अमेरिका-इजरायल युद्ध में इसे अभी तक नहीं छुआ गया क्योंकि हमला करने से ईरान की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी. तेल की कीमतें आसमान छू लेंगी. विश्व युद्ध शुरू हो सकता है. इसलिए अमेरिका इसे अपनी ‘रेड लाइन’ मान रहा है.

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पारस की खाड़ी में मौजूद ईरान का खार्ग आइलैंड जहां पर सबसे ज्यादा तेल रिफाइन होता है. (Photo: Getty) पारस की खाड़ी में मौजूद ईरान का खार्ग आइलैंड जहां पर सबसे ज्यादा तेल रिफाइन होता है. (Photo: Getty)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 09 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:40 PM IST

ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल पूरे जोर से युद्ध लड़ रहे हैं. उन्होंने ईरान के परमाणु प्लांट, तेल फैक्टरियां और कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं. लेकिन एक छोटा सा द्वीप अभी तक पूरी तरह सुरक्षित है. यह द्वीप खार्ग आइलैंड है. यह ईरान का सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र है.

अगर अमेरिका या इजरायल ने इस द्वीप पर हमला किया तो ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था ठप हो जाएगी. दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू लेंगी. कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला इतना बड़ा झटका होगा कि इससे विश्व युद्ध 3 शुरू हो सकता है.

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खार्ग आइलैंड कहां है और क्यों इतना खास

खार्ग आइलैंड ईरान के तट से सिर्फ 25 किलोमीटर दूर उत्तरी फारस की खाड़ी में स्थित एक छोटा सा कोरल द्वीप है. इसकी लंबाई सिर्फ कुछ किलोमीटर है. 1960 के दशक में अमेरिकी तेल कंपनी अमोको ने इसे बनाया था. आज यह द्वीप ईरान का मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल है. यहां रोजाना 70 लाख बैरल तेल लोड किया जा सकता है. 

बिना इस द्वीप के ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह नीचे गिर जाएगी. पूर्व अमेरिकी विशेष दूत रिचर्ड नेप्यू ने कहा कि इस द्वीप के बिना ईरान की अर्थव्यवस्था तलहटी में चली जाएगी.

अमेरिका-इजरायल ने क्यों नहीं छुआ यह द्वीप

अमेरिका ने ईरान के कई तेल ठिकानों पर हमले किए लेकिन खार्ग आइलैंड को अभी तक नहीं छुआ. इसका कारण बहुत साफ है. इस द्वीप पर हमला करने से ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी लेकिन साथ ही दुनिया भर के तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच जाएगी. तेल की कीमतें बहुत ऊंची हो जाएंगी. चीन सबसे ज्यादा प्रभावित होगा क्योंकि चीन ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है. 

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हडसन इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ माइकल डोरन ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन युद्ध के बाद ईरान की अर्थव्यवस्था का आधार नष्ट नहीं करना चाहता. यह अमेरिका की पुरानी लाल रेखा है. यानी अगर यह द्वीप नष्ट हुआ तो ईरान इतना गुस्सा हो सकता है कि वह पूरे क्षेत्र में बहुत बड़े हमले कर दे और युद्ध विश्व स्तर पर फैल जाए.

द्वीप की संरचना और कमजोरियां

खार्ग आइलैंड पर तेल के बड़े-बड़े स्टोरेज टैंक दक्षिणी हिस्से में एक साथ लगे हुए हैं. लंबी जेटी समुद्र में निकली हुई हैं जहां सुपर टैंकर तेल भरते हैं. समुद्र के नीचे पाइपलाइन मुख्य भूमि के सबसे बड़े तेल क्षेत्रों से जुड़ी हुई हैं. पूरा द्वीप बहुत छोटा और खुला है इसलिए हवाई हमले में इसे नष्ट करना आसान है लेकिन अमेरिका जानबूझकर ऐसा नहीं कर रहा. अगर हमला हुआ तो ईरान जवाब में होर्मुज स्ट्रेट बंद कर सकता है जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है. इससे पूरी दुनिया में तेल संकट आ जाएगा.

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विश्व युद्ध का खतरा क्यों

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अगर अमेरिका या इजरायल ने खार्ग आइलैंड पर हमला किया तो ईरान इसे अपना अस्तित्व का सवाल मान लेगा. ईरान की अर्थव्यवस्था का 90 प्रतिशत हिस्सा इसी तेल निर्यात पर टिका है. हमले के बाद ईरान न सिर्फ होर्मुज स्ट्रेट बंद कर सकता है बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमले कर सकता है. चीन और दूसरे देश भी प्रभावित होंगे.

कई विश्लेषक कहते हैं कि यह कदम इतना बड़ा होगा कि ईरान के सहयोगी देश भी युद्ध में कूद पड़ेंगे. इससे वर्ल्ड वॉर 3 शुरू हो सकता है. इसलिए अमेरिका इस द्वीप को अभी छोड़ रहा है ताकि युद्ध सीमित रहे और बाद में बातचीत का रास्ता खुला रहे.

वर्तमान स्थिति और भविष्य

अभी तक खार्ग आइलैंड पूरी तरह सामान्य रूप से काम कर रहा है. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक हमलों के बावजूद यहां तेल लोडिंग जारी है. लेकिन युद्ध अगर और बढ़ा तो अमेरिका-इजरायल को इस द्वीप पर भी हमला करना पड़ सकता है. फिलहाल दोनों देश इसे रेड लाइन मान रहे हैं.

पूरी दुनिया इस छोटे से द्वीप पर नजर रखे हुए है क्योंकि इसका फैसला न सिर्फ ईरान की किस्मत बल्कि पूरी दुनिया के तेल बाजार और शांति पर असर डालेगा. खार्ग आइलैंड वाकई ईरान की जीवनरेखा है और इसे छूना मतलब आग से खेलना साबित होगा. 

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