अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग में हवाई हमले, मिसाइलें, ड्रोन और समुद्री हथियारों का भारी इस्तेमाल हुआ. जंग सिर्फ कुछ हफ्तों की रही, लेकिन इसमें दोनों तरफ से हजारों मिसाइलें और ड्रोन दागे गए. अब सवाल यह है कि इस जंग में सबसे ज्यादा कौन-कौन से हथियार इस्तेमाल हुए और उनकी संख्या कितनी थी.
सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुए बैलिस्टिक मिसाइलें
ईरान की तरफ से सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुए हथियार बैलिस्टिक मिसाइलें थीं. ईरान ने इजरायल, अमेरिकी बेस और खाड़ी देशों पर कुल 480 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. इनमें फतेह-310, खैबर शेकन और सज्जील-2 जैसी मिसाइलें शामिल थीं. ये मिसाइलें 1000-2000 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं.
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अमेरिका और इजरायल ने मिलकर इनमें से करीब 70 प्रतिशत मिसाइलों को मिड-वे में ही रोक लिया, लेकिन फिर भी बाकी मिसाइलों ने काफी नुकसान पहुंचाया. बैलिस्टिक मिसाइलें इस जंग की सबसे प्रभावी और सबसे ज्यादा इस्तेमाल की गई हथियार श्रेणी रहीं.
ड्रोन हमले का भारी इस्तेमाल
दूसरा सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुआ हथियार ड्रोन था. ईरान ने 1200 से ज्यादा हमलावर ड्रोन (शाहेद-136 और शाहेद-238) इस्तेमाल किए. ये ड्रोन सस्ते, आसानी से बनाए जा सकते हैं. लंबे समय तक उड़कर लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं.
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अमेरिका और इजरायल ने इन ड्रोनों को रोकने के लिए अपने एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम (पैट्रियट, आयरन डोम और थाद) का भारी इस्तेमाल किया. इस जंग में ड्रोन हमले ने साबित कर दिया कि आधुनिक युद्ध में सस्ते ड्रोन भी बहुत खतरनाक साबित हो सकते हैं.
हवाई हमले और फाइटर जेट
अमेरिका और इजरायल ने हवाई हमलों में सबसे ज्यादा F-35, F-15 और F-16 फाइटर जेट इस्तेमाल किए. कुल मिलाकर 900 से ज्यादा सॉर्टी किए गए. इनमें 1800 से ज्यादा प्रिसिजन गाइडेड बम और मिसाइलें गिराई गईं.
ईरान की तरफ से हवाई हमले बहुत कम थे क्योंकि उसकी एयरफोर्स पहले ही कमजोर हो चुकी थी. इसलिए हवाई हमले पूरी तरह अमेरिका-इजरायल के एकतरफा रहे.
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समुद्री हथियार और क्रूज मिसाइल
समुद्र में भी भारी संघर्ष हुआ. ईरान ने 350 से ज्यादा एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें दागीं. अमेरिकी नौसेना ने इनमें से कई को रोक लिया. अमेरिका ने 70 से ज्यादा टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें ईरानी ठिकानों पर दागीं. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फ्लोटिंग माइन्स भी लगाए, जिनकी संख्या 500 से ज्यादा बताई जा रही है. ये माइन्स तेल टैंकरों के लिए सबसे बड़ा खतरा बने.
कुर्द और ग्राउंड फोर्स
जमीन पर कुर्द लड़ाकों ने अमेरिका की मदद से सीमित ग्राउंड ऑपरेशन किए. इनमें छोटे हथियार, एंटी-टैंक मिसाइलें और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ. कुर्दों ने ईरान की सीमा पर 100 से ज्यादा छोटे हमले किए. हालांकि ग्राउंड जंग बहुत सीमित रही.
यह जंग साबित करती है कि आधुनिक युद्ध में मिसाइलें, ड्रोन और हवाई हमले ही सबसे ज्यादा प्रभावी होते हैं. दोनों तरफ से कुल मिलाकर हजारों हथियार इस्तेमाल हुए, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान ईरान की तरफ हुआ.
ऋचीक मिश्रा