जेएनयू की छात्रा ने AISF के पूर्व स्टेट कनवीनर पर लगाया यौन शोषण का आरोप

अक्सर विवादों में रहने वाले जेएनयू से एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जेएनयू की एक छात्रा ने फेसबुक के जरिए ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (AISF) मध्य प्रदेश के पूर्व संयोजक आशीष रघुवंशी पर यौन शोषण का आरोप लगाया है.

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जेएनयू छात्रा ने लगाया यौन शोषण का आरोप जेएनयू छात्रा ने लगाया यौन शोषण का आरोप

राहुल सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 12 सितंबर 2016,
  • अपडेटेड 5:52 PM IST

अक्सर विवादों में रहने वाले जेएनयू से एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जेएनयू की एक छात्रा ने फेसबुक के जरिए ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (AISF) मध्य प्रदेश के पूर्व संयोजक आशीष रघुवंशी पर यौन शोषण का आरोप लगाया है. साथ ही पीड़िता ने आरोपी पर पैसे ऐंठने का भी इल्जाम लगाया है.

पीड़ित छात्रा के एक फेसबुक पोस्ट ने जेएनयू की छात्र राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. छात्रा के फेसबुक पोस्ट के मुताबिक, पीड़ित छात्रा स्वयं AISF की सदस्य है. छात्रा के मुताबिक, आरोपी आशीष रघुवंशी AISF का मध्य प्रदेश संयोजक था. छात्रा ने आरोप लगाया कि आरोपी सात महीने तक उसके साथ रिलेशनशिप में था. इस दौरान उसने छात्रा को झांसा देकर कई बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए.

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वहीं आरोपी ने छात्रा से तकरीबन 60 हजार रुपये भी लिए थे. छात्रा ने इस मामले को AISF के वरिष्ठ पदाधिकारियों के सामने रखा था. जिसके बाद आरोपी आशीष रघुवंशी को मध्य प्रदेश के संयोजक पद से हटा दिया गया. साथ ही छात्रा ने 60 हजार रुपये लौटाए जाने की भी मांग की थी. छात्रा की माने तो संगठन के पदाधिकारियों ने बैठक में आरोपी के खिलाफ का भरोसा दिलाया था.

काफी वक्त बीत जाने के बाद भी आरोपी आशीष रघुवंशी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. पीड़ित छात्रा का आरोप है कि उसने जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को भी इस मामले में कई बार फोन किया, मगर कन्हैया ने एक बार भी उसका फोन नहीं उठाया. छात्रा ने आरोप लगाते हुए कहा कि कन्हैया कुमार को मामले की जानकारी होने के बावजूद वह लगातार आरोपी का साथ दे रहा है.

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वहीं AISF के कई पदाधिकारी मामले के सामने आने पर छात्रा पर ही संगीन आरोप लगा रहे हैं. बता दें कि पीड़ित छात्रा के फेसबुक के जरिए इस मामले को उजागर करने के बाद छात्रा को धमकी भरे फोन भी आ रहे हैं. फिलहाल का कहना है कि वह आरोपी के खिलाफ तब तक आवाज उठाती रहेगी, जब तक उसके खिलाफ संगठन कड़ी कार्रवाई नहीं करता है.

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