मनसुख हिरेन हत्याकांड: NIA के निशाने पर क्यों है विनायक शिंदे और नरेश गोर, जानिए पूरी कहानी

एनआईए को जांच में पता चला कि नरेश ही वो शख्स है, जिसने गुजरात के सिम कार्ड हासिल किए थे. उसी में से एक सिमकार्म का इस्तेमाल विनायक शिंदे ने मनसुख हिरेन को कॉल करने के लिए किया था. शिंदे ने उसी गुजराती सिम कार्ड से कॉल करके मनसुख हिरेन को 4 मार्च के दिन ठाणे में किसी जगह पर बुलाया था.

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मनसुख हिरेन की लाश मुंब्रा क्रीक से बरामद हुई थी मनसुख हिरेन की लाश मुंब्रा क्रीक से बरामद हुई थी

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 30 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 8:29 PM IST
  • सजायाफ्ता है विनायक शिंदे, नरेश गोर है बुकी
  • मनसुख की हत्या में शामिल थे दोनों आरोपी!
  • ATS के बाद अब NIA को भी शक

एंटीलिया केस की कड़ी के तौर पर सामने आए मनसुख हत्याकांड मामले में एनआईए ने बर्खास्त कांस्टेबल विनायक शिंदे (51) और बुकी नरेश गोर (31) को अदालत में पेश किया. एजेंसी को शक है कि मनसुख हिरेन की हत्या में सचिन वाजे के साथ-साथ विनायक शिंदे और नरेश भी शामिल थे. 

एनआईए को जांच में पता चला कि नरेश ही वो शख्स है, जिसने गुजरात के सिम कार्ड हासिल किए थे. उसी में से एक सिमकार्ड का इस्तेमाल विनायक शिंदे ने मनसुख हिरेन को कॉल करने के लिए किया था. शिंदे ने उसी गुजराती सिम कार्ड से कॉल करके मनसुख हिरेन को 4 मार्च के दिन ठाणे में किसी जगह पर बुलाया था. माना जा रहा है कि इसी के बाद रात 9 बजे से 11 बजे के बीच सचिन वाजे के सामने ही मनसुख हिरेन की हत्या कर दी गई थी. 

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NIA से पहले मनसुख हिरेन हत्याकांड को सुलझा लेने का दावा करने वाली महाराष्ट्र ATS ने भी इस केस में कुल तीन आरोपी बनाए. एक सचिन वाजे, दूसरा नरेश (क्रिकेट बुकी) और तीसरा बर्खास्त पुलिसकर्मी विनायक शिंदे. मनसुख हिरेन हत्याकांड की जांच में जुटी एटीएस को 3 मोबाइल फोन मिले थे. उसी दौरान एटीएस ने गुजरात में रजिस्टर वोडाफोन के 8 सिम कार्ड भी बरामद किए थे. 

यही नहीं, जब महाराष्ट्र ATS ने विनायक शिंदे के घर की तलाश ली तो वहां से भी ATS ने प्रिंटर और कुछ कागजात जब्त किये थे. एटीएस ने करीब डेढ़ घंटे तक वहां छानबीन की थी. एटीएस को मनसुख की लाश तो मिली लेकिन उसके शरीर पर जितनी भी सोने की ज्वैलरी थी, जैसे कि सोने की चैन, पुखराज का पत्थर, घड़ी, पर्स, डेबिट और क्रेडिट कार्ड आदि कुछ भी नहीं मिला था. 

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इधर, अब एनआईए को 3 और लक्जरी कारों की तलाश है. जिनमें एक आउटलैंडर, एक स्कोडा कार और एक ऑडी कार शामिल है. NIA सूत्रों के मुताबिक सचिन वाजे ने पिछले एक साल में 9 अलग-अलग लग्जरी कारों का इस्तेमाल किया था. इनमें से 6 कारों को एजेंसी ने अभी तक अपने कब्जे में ले लिया है. NIA की फोरेंसिक टीम जितनी भी बाकी कार मिली हैं, सभी की फोरेंसिक जांच करवा रही है. 

अब सबसे बड़ी जांच एजेंसी की उलझन ये है कि अभी तक वो कार नहीं मिल पाई है, जिसमें मनसुख हिरेन को अगवा किया गया था और बाद में उसकी हत्या कर दी गई थी. हालांकि मंगलवार को एनआईए ने सचिन वाज़े की एक कार सेक्टर 7 कमोठे शीतलाधारा हाउसिंग सोसायटी के पास से बरामद की. 

सोसायटी के सुरक्षा गार्ड ने कहा कि इस गाड़ी का मालिक सोसायटी में रहता है. गार्ड ने यह भी कहा कि पहले गाड़ी को कुछ दिनों के लिए सोसायटी में पार्क किया गया था और लेकिन पिछले डेढ़ महीने से गाड़ी सोसाइटी के बाहर खड़ी थी. एनआईए की फोरेंसिक टीम ने एंटीलिया के बाहर मिली स्कोर्पियो कार से सचिन वाजे और मनसुख हिरेन के डीएनए सैंपल लिए हैं.

मनसुख हत्याकांड का खुलासा करते हुए एटीएस चीफ जयजीत सिंह ने बताया था कि शिंदे ने ही मनसुख हिरेन से संपर्क किया था और उसे 4 मार्च को बाहर बुलाया था. उन्होंने दावा किया था कि एटीएस के पास सबूत हैं कि आरोपी शिंदे मनसुख हिरेन की हत्या के वक्त मौका-ए-वारदात पर मौजूद था. 

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जयजीत सिंह ने बताया था कि बुकी नरेश गोर ने गुजरात से 14 सिम कार्ड हासिल किए थे, जिसमें से कुछ सिम एक्टिव थे. वही सिम शिंदे को दे दिए गए थे. शिंदे ने वो सिम इस साजिश में शामिल अन्य आरोपियों को दिए थे. पता चला है कि इस क्राइम में इस्तेमाल किए गए कुछ सिम और मोबाइल फोन नष्ट कर दिए गए थे.

 

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