अब्दुल रहमान ही निकला 'NANNI'... ऑनलाइन धर्मांतरण केस में सामने आई मौलवी की वॉट्सएप चैट

बीते दिनों गाजियाबाद में ऑनलाइन गेम के जरिये धर्मांतरण के रैकेट का भंडाफोड़ हुआ था. पुलिस ने इस मामले में मौलवी को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने जब मौलवी के वॉट्सएप चैट की जांच की तो कई खुलासे हुए. पुलिस का कहना है कि जांच में पता चला है कि नाबालिग लड़कों ने मौलवी का नाम 'NANNI' नाम से सेव कर रखा था.

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पुलिस की गिरफ्त में मौलवी. पुलिस की गिरफ्त में मौलवी.

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 10 जून 2023,
  • अपडेटेड 11:01 AM IST

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में बीते दिनों ऑनलाइन गेमिंग के जरिए धर्मांतरण का केस सामने आया था. ये सुनने में शायद अजीब लगे, लेकिन ऐसा हुआ है. गाजियाबाद में ऑनलाइन गेमिंग के जरिए एक नाबालिग बच्चे के धर्मांतरण कराया गया. इस मामले में गाजियाबाद पुलिस ने मस्जिद के मौलवी को गिरफ्तार किया है. उसकी वॉट्सएप चैट सामने आई है, जिसमें कई खुलासे हुए हैं.

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ऑनलाइन धर्मांतरण का खुलासा तब हुआ, जब गाजियाबाद के एक शख्स ने मौलवी और एक अन्य व्यक्ति पर अपने बेटे का जबरन धर्मांतरण करवाने का आरोप लगाया. शख्स ने आरोप लगाया कि उसका बेटा ऑनलाइन गेम के जरिए मुंबई के रहने वाले बद्दो के संपर्क में आया था. इसके बाद उसके बेटे का इस्लाम की तरफ झुकाव होने लगा. बेटे ने उन्हें बताया कि बद्दो के कहने पर उसने इस्लाम कबूल कर लिया है.

पिता ने शिकायत में उस मस्जिद के मौलवी का नाम लिया था, जिस मस्जिद में उसका बेटा नमाज पढ़ने जाने लगा था. ये खेल तब खुला, जब हिंदू परिवार ने अपने बच्चे के धर्मांतरण की शिकायत पुलिस से की. परिवार को बच्चा नमाज पढ़ते मिला था. बच्चे ने कहा कि घर से निकालोगे तो मस्जिद में रह लूंगा. उसकी बातें सुनकर परिवार पुलिस के पास पहुंचा था.

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यह भी पढ़ेंः ऑनलाइन गेम में दोस्ती, फिर चैटिंग कर इस्लाम की तारीफ... ऐसे चल रहा था नाबालिग बच्चों के धर्मांतरण का खेल

गाजियाबाद में पुलिस धर्मांतरण मामले में अब तक मौलवी अब्दुल रहमान को गिरफ्तार किया है. उसके वॉट्सएप चैट की जांच में पुलिस को पता लगा कि नन्नी दरअसल अब्दुल रहमान ही है. घर पर किसी को शक न हो, इसलिए नाबालिग बच्चों ने मौलाना अब्दुल का नाम NANNI के नाम से सेव किया था.

चैट में Nanni उर्फ अब्दुल रहमान नाबालिग लड़कों को नमाज के लिए समय बता रहा है. उसमें नाबालिगों से कहता है कि घर वालों को जिम का बहाना बनाकर बाहर आएं. मस्जिद में भीड़ के कारण किसी को शक न हो, इसलिए मस्जिद में मिलने से मना कर रहा है.

कैसे होता था ये सारा खेल?

बहला-फुसलाकर बच्चों का धर्मांतरण करने का ये सारा खेल दो स्टेप में होता था. पहली स्टेप थी- बच्चों के साथ ऑनलाइन गेम खेलना. दूसरी स्टेप में बच्चों से ऐप के जरिए चैटिंग करना और इस्लाम के फायदे बताना. पहली स्टेप में होता ये था कि शॉर्ट हैंडलर हिंदू नामों से आईडी बनाते थे. फिर हिंदू बच्चों को 'Fortnite' गेम खेलने के लिए उकसाते थे. असली खेल तब शुरू होता था, जब बच्चा गेम हार जाता था.

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गेम हारने के बाद बच्चे से कहा जाता था कि वो कुरान की आयत पढ़े तो जीत जाएगा. इसके बाद जब बच्चा आयत पढ़कर गेम खेलता तो साजिश के तहत उसे जितवा दिया जाता था. इस तरह बच्चे का मुस्लिम धर्म की तरफ झुकाव बढ़ जाता. इसके बाद दूसरी स्टेप शुरू होती. बच्चे से 'Discord' ऐप के जरिए चैटिंग की जाती. बच्चे का भरोसा जीतकर उसको इस्लाम की जानकारी दी जाती. धीरे-धीरे बच्चे को जाकिर नाईक और तारिक जमील के वीडियो दिखाए जाते. उन्हें इस्लाम कबूलने के लिए बहकाया जाता.

आखिरी स्टेप- एफिडेविट बनवाना

जब बच्चे का इस्लाम की तरफ झुकाव बढ़ जाता और वो मुस्लिम बनने को तैयार हो जाता तो आखिर में उससे एक एफिडेविट बनवाया जाता. इस एफिडेविट में बच्चे से लिखवाया जाता कि वो अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल कर रहा है. इसी मामले में पुलिस ने गाजियाबाद में संजय नगर की एक मस्जिद के मौलवी को गिरफ्तार किया है. मौलवी का नाम अब्दुल रहमान है.

पूरा प्लान क्या था?

आशंका जताई जा रही है कि ऑनलाइन गेमिंग के जरिए देशभर में 300 से 400 बच्चों को निशाना बनाया गया है. गाजियाबाद के मामले में जिस बद्दो का नाम सामने आया है, उसका असली नाम शाहनवाज बताया जा रहा है. शाहनवाज की तलाश में छापेमारी की जा रही है. उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है.

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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी शाहनवाज धर्मांतरण के बाद बच्चों को दुबई ले जाने की फिराक में था. पुलिस को मिली ग्रुप चैट से खुलासा हुआ है कि वो उन्हें हवाई सफर से दुबई ले जाने वाला था. पुलिस अब इस बात की जांच भी कर रही है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि दुबई ले जाने का लालच देकर शाहनवाज नाबालिग बच्चों के कुछ और दोस्तों के धर्म परिवर्तन की साजिश तो नहीं रच रहा था?

धर्मांतरण रोधी कानून को लेकर क्या हैं प्रावधान?

संविधान के तहत देश के सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है और वो अपनी मर्जी से किसी भी धर्म को अपना सकते हैं, लेकिन किसी की इच्छा के खिलाफ या जबरन धर्मांतरण करवाना अपराध है. जबरन या बहला-फुसलाकर धर्मांतरण के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर तो कोई कानून नहीं है, लेकिन कई राज्यों में इसे लेकर कानून है.

यूपी सरकार साल 2020 में लेकर आई थी कानून

उत्तर प्रदेश में भी योगी सरकार 2020 में जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए कानून लेकर आई थी. यूपी के धर्मांतरण रोधी कानून के तहत बहला-फुसलाकर, जबरन, झूठ बोलकर या डरा-धमकाकर किसी का धर्मांतरण करवाने का दोषी पाए जाने पर एक से पांच साल तक की कैद और 15 हजार रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है. एससी-एसटी के मामले में दो से 10 साल की जेल और 25 हजार रुपये की जुर्माने की सजा का प्रावधान है.

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