गुजरात के राजकोट जिले में पुलिस ने एक ऐसे हनीट्रैप गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो लंबे समय से व्यापारियों और कारोबारियों को प्रेमजाल में फंसाकर उनसे लाखों रुपये की उगाही कर रहा था. इस मामले में मुख्य आरोपी प्रियंका उर्फ पीयू समेत अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह के शिकार कई और लोग भी हो सकते हैं.
जेतपुर नगर पुलिस की जांच में सामने आया कि यह गिरोह खास तौर पर आर्थिक रूप से मजबूत मध्यम वर्गीय व्यापारियों, उद्योगपतियों और व्यवसायियों को निशाना बनाता था. आरोपियों का मकसद ऐसे लोगों को फंसाकर उनसे मोटी रकम वसूलना था. ग्रामीण इलाकों में भी इस गिरोह की गतिविधियां काफी समय से चल रही थीं.
कुछ दिन पहले जेतपुर सिटी पुलिस स्टेशन और जामकंडोरणा पुलिस स्टेशन में हनीट्रैप गिरोह के खिलाफ दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे. पुलिस ने इन मामलों की गहराई से जांच शुरू की. जांच के दौरान पूरी साजिश का खुलासा हुआ और गिरोह की मुख्य महिला आरोपी प्रियंका उर्फ पीयू को गिरफ्तार कर लिया गया.
पुलिस के अनुसार, गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। आरोपी गूगल सर्च, दुकानों के बोर्ड और अन्य सार्वजनिक स्रोतों से व्यापारियों, फैक्ट्री मालिकों और अधेड़ उम्र के लोगों के मोबाइल नंबर हासिल करते थे. इसके बाद ये नंबर गिरोह की मुख्य महिला सदस्य प्रियंका को दिए जाते थे, जो आगे की पूरी योजना को अंजाम देती थी.
जामनगर के कालावड की रहने वाली प्रियंका उर्फ पीयू गिनोया फोन पर व्यापारियों से संपर्क करती थी. वह उनसे दोस्ती बढ़ाती, लगातार बातचीत करती और मीठी-मीठी बातें करके उनका भरोसा जीत लेती थी. धीरे-धीरे वह उन्हें अपने प्रेमजाल में फंसा लेती और फिर मिलने के लिए बुलाती थी.
जब कोई व्यापारी मिलने के लिए तैयार हो जाता, तब प्रियंका खुद वहां नहीं पहुंचती थी. उसकी जगह किसी दूसरी महिला को भेजा जाता था. जैसे ही व्यापारी तय स्थान पर पहुंचता, गिरोह के चार-पांच सदस्य अचानक वहां पहुंच जाते और उसे घेर लेते थे.
गिरोह के सदस्य व्यापारी को बलात्कार जैसे गंभीर मामले में फंसाने की धमकी देते थे. कई मामलों में पीड़ितों के साथ मारपीट भी की जाती थी. आरोपियों द्वारा बदनामी, सामाजिक प्रतिष्ठा खत्म होने और कारोबार चौपट करने का डर दिखाकर उनसे लाखों रुपये वसूले जाते थे.
पुलिस जांच में पता चला है कि यह गिरोह पहले भी मोरबी, राजकोट, जेतपुर, वांकानेर और जूनागढ़ जिले के भेसान क्षेत्र में कई व्यापारियों को अपना शिकार बना चुका है. इन घटनाओं को लेकर गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं. इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है.
पुलिस ने बताया कि गिरोह का पर्दाफाश तकनीकी साक्ष्यों और मानव खुफिया सूचना के आधार पर किया गया. मुख्य आरोपी प्रियंका की गिरफ्तारी के बाद अदालत ने उसका रिमांड भी मंजूर कर लिया है. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं.
पुलिस का मानना है कि कई पीड़ित बदनामी के डर से अब तक सामने नहीं आए हैं. इसलिए पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि वे इस गिरोह का शिकार हुए हैं तो बिना किसी झिझक के नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें. अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि शिकायतकर्ताओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी. इस मामले के सामने आने के बाद सौराष्ट्र के कारोबारी जगत में काफी हलचल मच गई है.
ब्रिजेश दोशी