12 दिनों से लापता है दो साल का मासूम, अब तक नहीं मिला सुराग, हर एंगल से जांच कर रही है पुलिस

आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में 2 साल की बच्ची पिछले 12 दिनों से लापता है. पुलिस अपहरण, जंगली जानवर के हमले, पारिवारिक विवाद और अजगर के हमले समेत हर एंगल से जांच कर रही है. NDRF और SDRF की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं. पढ़ें इस ऑपरेशन की पूरी कहानी.

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पुलिस इस मामले में हर एंगल से जांच कर रही है (फोटो-ITG) पुलिस इस मामले में हर एंगल से जांच कर रही है (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • काकीनाडा,
  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:02 PM IST

आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले में दो साल की एक बच्ची के रहस्यमय तरीके से लापता होने का मामला लगातार उलझता जा रहा है. बच्ची 6 जून को अचानक गायब हो गई थी और अब 12 दिन बीत जाने के बाद भी उसका कोई पता नहीं चल सका है. पुलिस, NDRF, SDRF और कई अन्य एजेंसियां लगातार उसकी तलाश में जुटी हैं. इस मामले ने पूरे इलाके को चिंता और बेचैनी में डाल दिया है.

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पुलिस के मुताबिक, बच्ची काकीनाडा जिले के चि. अग्रहारम गांव से लापता हुई थी. घटना सामने आते ही स्थानीय पुलिस ने बड़े पैमाने पर खोज अभियान शुरू कर दिया. बाद में NDRF, SDRF, डॉग स्क्वॉड, तकनीकी विशेषज्ञों और वन विभाग के अधिकारियों को भी अभियान में शामिल किया गया. जांच टीम हर संभावित सुराग को खंगाल रही है.

जानकारी के अनुसार बच्ची अपने पालतू कुत्ते के साथ गांव के पास स्थित काजू के बागान की तरफ गई थी. उसे आखिरी बार बागान की बाड़ के पास देखा गया था. इसके बाद वह अचानक नजरों से ओझल हो गई. पुलिस का मानना है कि इसी जगह से मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियां जुड़ी हुई हैं.

एक ग्रामीण ने बच्ची को उस इलाके में देखा था और वह उसके माता-पिता को सूचना देने की कोशिश कर रहा था. लेकिन जब वह बच्ची के करीब पहुंचा तो पालतू कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया. इसके बाद वह तुरंत परिवार को सूचना नहीं दे सका. करीब 35 मिनट बाद जब परिवार और ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो बच्ची गायब थी.

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घटना के तुरंत बाद आसपास के इलाके में खोजबीन शुरू की गई. जब कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस ने अभियान का दायरा बढ़ाकर नजदीकी पहाड़ियों और जंगलों तक फैला दिया. सर्च टीमें लगातार जंगल, पहाड़ी क्षेत्र, तालाबों और अन्य संभावित स्थानों की तलाशी ले रही हैं. बावजूद इसके अभी तक कोई ठोस जानकारी हाथ नहीं लगी है.

पुलिस ने गांव के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज को खंगाला है. इसके अलावा ऑटो-रिक्शा चालकों, वैन संचालकों और अन्य परिवहन से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई. जांचकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की है कि कहीं बच्ची को किसी वाहन में बैठाकर तो नहीं ले जाया गया. हालांकि अब तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है.

तकनीकी जांच के दौरान घटना के समय इलाके में सक्रिय लगभग 170 मोबाइल नंबरों की पहचान की गई. चार अलग-अलग टीमें इन नंबरों की जांच कर रही हैं. पुलिस उन लोगों की गतिविधियों का भी विश्लेषण कर रही है जो घटना से पहले इलाके में मौजूद थे लेकिन बाद में वहां से चले गए थे. इस जांच को मामले की अहम कड़ी माना जा रहा है.

जांच के तहत पुलिस ने गांव के सभी 470 घरों का सर्वे किया है. करीब 150 लोगों से विस्तृत पूछताछ की गई है. अधिकारी घटना से पहले और बाद में इलाके में मौजूद लोगों की गतिविधियों का रिकॉर्ड तैयार कर रहे हैं. पुलिस किसी भी छोटी से छोटी जानकारी को नजरअंदाज नहीं करना चाहती.

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पुलिस उन मौसमी मजदूरों और घुमंतू समूहों की भी जांच कर रही है जो काजू के मौसम में इलाके में आते-जाते रहते हैं. अधिकारियों को जानकारी मिली थी कि घटना से कुछ दिन पहले एक समूह अपने कुत्तों के साथ आसपास डेरा डाले हुए था. अब उस समूह का पता लगाकर उनसे पूछताछ की जा रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं उनका बच्ची से कोई संपर्क तो नहीं हुआ था.

शुरुआत में एक स्थानीय व्यक्ति को लेकर संदेह जताया गया था. पुलिस ने उससे अलग-अलग चार टीमों के जरिए कई बार पूछताछ की. हर बार उसने एक जैसी जानकारी दी और उसके खिलाफ कोई विरोधाभासी तथ्य सामने नहीं आया. पुलिस ने साफ किया है कि न तो उसे और न ही किसी अन्य व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है.

जांचकर्ता अपहरण के साथ-साथ किसी जंगली जानवर के हमले की संभावना भी तलाश रहे हैं. इस एंगल की जांच के लिए पुलिस और वन विभाग ने वैज्ञानिक तरीके से घटना का पुनर्निर्माण किया. बच्ची के आखिरी बार देखे गए स्थान पर मांस से भरी एक गुड़िया रखी गई. इसका मकसद यह पता लगाना था कि क्या कोई जंगली जानवर उस स्थान पर आता है.

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वन विभाग और पुलिस ने मौके पर स्पाई कैमरे, ट्रैप कैमरे लगाए हैं. इन कैमरों की मदद से निगरानी की जा रही है कि कोई जानवर वहां आता है या नहीं. अधिकारियों ने साफ किया कि यह पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक जांच का हिस्सा है. इसका अमावस्या या किसी अंधविश्वास से कोई संबंध नहीं है.

स्थानीय लोगों के मुताबिक गांव के पास करीब 500 एकड़ में फैली पहाड़ियों और जंगलों में सियार, जंगली कुत्ते, जंगली सूअर और अजगर जैसे जीव रहते हैं. कई बार ये जानवर आबादी वाले इलाकों के करीब भी आ जाते हैं. इसी वजह से पुलिस और वन विभाग ने अजगर के हमले की संभावना को भी जांच में शामिल किया है. अधिकारियों का मानना है कि किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता.

बच्ची के साथ उसका पालतू कुत्ता भी उसी दिन गायब हो गया था. चार दिन बाद वह बेहद डरी हुई हालत में वापस लौटा. पुलिस के अनुसार कुत्ता आक्रामक व्यवहार कर रहा था और उसने अपने मालिकों को भी काट लिया था. इलाज के बाद उसके गले में GPS ट्रैकर लगाया गया, जिससे पता चला कि वह करीब 8 किलोमीटर तक घूमकर आया था.

GPS डेटा के आधार पर पुलिस ने उन सभी स्थानों की दोबारा तलाशी ली जहां कुत्ता गया था, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. बाद में कुत्ते की मौत हो गई और उसका पोस्टमॉर्टम भी कराया गया. दूसरी ओर पुलिस आर्थिक विवाद, व्यक्तिगत दुश्मनी और पारिवारिक कारणों की भी जांच कर रही है. घटना के करीब 90 मिनट बाद इलाके में तीन घंटे तक भारी बारिश हुई थी, जिससे शुरुआती सर्च ऑपरेशन और सबूत जुटाने के प्रयासों को बड़ा नुकसान पहुंचा. 

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फिलहाल, NDRF की मदद से खोज का दायरा 6 किलोमीटर से बढ़ाकर लगभग 10 किलोमीटर कर दिया गया है और 11 आपस में जुड़ी पहाड़ियों, तालाबों, कुओं तथा तालाबों की लगातार तलाशी जारी है.

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