होलसेल में बिकती थी कोरोना में इस्तेमाल होने वाली नकली Favipiravir, मुंबई से लेकर मेरठ तक जुड़े थे तार

मुंबई पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इन पर आरोप है कि ये कोरोना के इलाज में उपयोगी फेविपीरावीर की नकली दवा बनाते थे और उसे होलसेल मार्केट में बेच देते थे. खास बात ये है कि मैनुफैक्चरर के तौर पर इन्होंने हिमाचल की एक कंपनी का नाम दर्ज कराया था, जबकि उस नाम की कोई कंपनी है ही नहीं.

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तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं. (फाइल फोटो-PTI) तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं. (फाइल फोटो-PTI)

मुस्तफा शेख

  • मुंबई,
  • 08 जून 2021,
  • अपडेटेड 1:57 PM IST
  • नकली फेविपीरावीर बनाकर बेच देते थे
  • फर्जी कंपनी को दवा का मैनुफैक्चरर बताया
  • मुंबई से हिमाचल और मेरठ तक जुड़े थे तार

कोरोना संक्रमण काल में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो अपनी इंसानियत बेचकर मुनाफा कमाने में लगे रहे. ऐसे ही नकली दवाओं को बेचकर अपनी जेब भरने वाले मेरठ की एक फार्मा लैब में काम करने वाले कर्मचारी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. कर्मचारी पर आरोप है कि वो नकली फेविपीरावीर बनाकर बेचा करता था. फेविपीरावीर कोरोना मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होती है. इस मामले में के तार सिर्फ मेरठ ही नहीं बल्कि मुंबई से लेकर हिमाचल से भी जुड़े हुए थे. अभी तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

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दरअसल, हाल ही में फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA ने टिप के आधार पर मुंबई के कांदिवली ईस्ट और गोरेगांव ईस्ट स्थित तीन होलसेल ड्रग डीलर्स के यहां छापा मारा था. यहां भारी मात्रा में फेविमैक्स 400, फेविमैक्स 200 (फेविपीरावरी) और हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा बरामद हुई थी. इन दवा की कीमत 1.5 करोड़ रुपए आंकी गई थी. इन दवाओं के मैनुफैक्चरर के तौर पर हिमाचल प्रदेश के मैक्स रिलीफ हेल्थकेयर का नाम दर्ज था.

मैनुफैक्चरर की पुष्टि करने के लिए एफडीए ने हिमाचल के ड्रग कंट्रोलर को मेल भेजा, जिसने जवाब में बताया कि ऐसी कोई कंपनी है ही नहीं. आगे की जांच में सामने आया कि नोएडा में भी मैक्स रिलीफ हेल्थकेयर के नाम से दवाएं बेची जा रही हैं. इसके बाद एफडीए ने बाकी राज्यों को भी एडवाइजरी जारी की और इस मैनुफैक्चरर की दवा का इस्तेमाल नहीं करने को कहा.

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30 मई को मैक्स रिलीफ के मालिक सुदीप मुखर्जी को जांच के लिए एफडीए ने बुलाया. उसके पास दवा के प्रोडक्शन और सेलिंग को लेकर कोई दस्तावेज ही नहीं थे. उसने लाइसेंस की एक कॉपी दिखाई जो फर्जी थी. बाद में एफडीए ने मुंबई के समता नगर पुलिस थाने में मुखर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. 

समता नगर पुलिस थाने के सीनियर इंस्पेक्टर आनंदराव हाके ने बताया, "जांच के दौरान पता चला कि मेरठ में संदीप मिश्रा नकली दवाएं बनाता है और उसका एक साथी दवा पैक करने में मदद करता है. जिसके बाद इन दवाओं को सुदीप मुखर्जी होलसेल में बेच देता था."

इसके बाद यूपी के मेरठ में पुलिस की टीम भेजी गई, जहां से एक फार्मा लैब में काम करने वाले कर्मचारी संदीप मिश्रा को गिरफ्तार किया गया. संदीप पर आरोप है कि वो फेविपीरावीर की नकली दवाएं बनाता था. इन दवाओं को पैक कर होलसेल मार्केट में बेच दिया जाता था. आनंदराव हाके ने बताया कि जब इन दवाओं की जांच की गई तो ये नकली पाई गईं.

फिलहाल सुदीप मुखर्जी, संदीप मिश्रा और उसके साथी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है.

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