एंटीलिया केस में NIA की जांच तेज, जानें क्यों पूर्व पुलिस कमिश्नर पर घूम रही शक की सुई?

परमबीर सिंह पर शक की सुई घूमने की एक नहीं कई वजह हैं. पहली वजह तो खुद सचिन वाजे और परमबीर सिंह की केमिस्ट्री है. जैसे कि एंटीलिया के विस्फोटक कांड में गिरफ्तार सचिन वाजे परमबीर सिंह को ही रिपोर्ट करते थे. 16 साल बाद सचिन वाजे को अदालत के आदेश के खिलाफ जाकर बहाल करने का फैसला भी परमबीर सिंह का था

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मर्सिडीज कार की जांच करते एनआईए अधिकारी मर्सिडीज कार की जांच करते एनआईए अधिकारी

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 18 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 1:42 PM IST
  • एंटीलिया केस की जांच में जुटी है एनआईए
  • पुलिस अफसर सचिन वाजे को किया जा चुका है गिरफ्तार

एंटीलिया केस में पहले मुंबई पुलिस के पूर्व अधिकारी सचिन वाजे की गिरफ्तारी होना और फिर गिरफ्तारी के एक ही दिन बाद मुंबई पुलिस कमिश्नर का ट्रांसफर हो जाना. ये कोई संयोग नहीं है. इस ट्रांसफर को एंटीलिया केस से अलग करके नहीं देखा जा सकता. बीजेपी पहले से ही इस केस में परमबीर सिंह के इस्तीफे की मांग कर रही थी. क्योंकि NIA की जांच में ऐसे कई सबूत मिले हैं, जिनकी वजह से शक की सुई परमवीर सिंह की तरफ भी घूम रही है. इसे समझने के लिए आपको एंटीलिया केस की पूरी क्रोनोलॉजी समझनी होगी. 

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परमबीर सिंह पर शक की सुई घूमने की एक नहीं कई वजह हैं. पहली वजह तो खुद सचिन वाजे और परमबीर सिंह की केमिस्ट्री है. जैसे कि एंटीलिया के विस्फोटक कांड में गिरफ्तार सचिन वाजे परमबीर सिंह को ही रिपोर्ट करते थे. 16 साल बाद सचिन वाजे को अदालत के आदेश के खिलाफ जाकर बहाल करने का फैसला भी परमबीर सिंह का था

इस मामले पर पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि मुझे क्या किसी को भी विश्वास नहीं होगा कि अकेले वे इतना बड़ा कांड कर सकते हैं. इस मामले में और लोग भी शामिल हैं, जिनका सच सामने आना चाहिए. फडणवीस ने कहा कि 2019 के अंत में शिवसेना की सरकार बनते ही सचिन वाजे को वापस लाया गया. मुंबई का सबसे महत्वपूर्ण पद क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट का हेड भी उन्हें दिया गया. मुम्बई के सभी हाई प्रोफाइल केस सीआईओ के पास ही आते थे.

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सूत्रों के मुताबिक सचिन वाजे ये बात तो कबूल कर रहा है कि वो इस साजिश का एक हिस्सा है लेकिन उसके साथ इस साजिश में कौन-कौन से वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, उनकी भूमिका के बारे में सचिन ने चुप्पी साधी है और सचिन वाजे की ये चुप्पी परमबीर सिंह की संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठाती है.

एंटीलिया केस में इस्तेमाल की गई इनोवा कार मुंबई पुलिस की है, जो बाद में परमबीर सिंह के ऑफिस के बाहर खड़ी मिली. जैश उल हिंद नामक संगठन के नाम से आया टेलीग्राम संदेश का एक लिंक सचिन वाज़े से जुड़ता नजर आ रहा है.
सूत्रों के मुताबिक मनसुख हिरेन को पूछताछ के लिए सचिन वाजे दक्षिण मुंबई में पुलिस कमिश्नर के ऑफिस लेकर आया था. एंटीलिया केस में परमबीर सिंह पर शक की बात पर NIA की तरफ से कोई बयान नहीं आया है. लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में इसकी चर्चा पहले से ही थी, जो अब परमबीर सिंह के ट्रांसफर के बाद और तेज हो गई है.

अब सवाल ये है कि एंटीलिया के बाहर विस्फोटक भरी कार खड़ी करने के पीछे क्या वाकई परमबीर सिंह की कोई भूमिका थी. सूत्रों के मुताबिक NIA ने सचिन वाजे के कॉल डिटेल खंगाले हैं, जिसमें उसे इस केस से जुड़े कई बड़े नामों का पता चला है, उनमें परमबीर सिंह का नाम है या नहीं ये तो नहीं पता लेकिन और इस घटना के पीछे सचिन वाजे का क्या मकसद था? ये उसने NIA को बताया है. सूत्रों के मुताबिक सचिन वाजे ने कहा कि वो 16 साल सस्पेंड रहने के दौरान अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस पाना चाहता था और ये वारदात उसने नाम कमाने के लिए की थी.

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हालांकि NIA सचिन वाजे के इस जवाब से संतुष्ट नहीं है. NIA इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं है कि अकेले सचिन वाजे इतनी बड़ी साजिश का इकलौता सूत्रधार हो सकता है.

एनआईए के सूत्रों ने दावा किया है कि मुंबई पुलिस कमिश्नर के अंदर बने सीआईयू दफ्तर से जो डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं, उनसे छेड़छाड़ की गई है और मिटाया गया है. अधिकारियों ने फोन, आईपैड और साकेत सोसाइटी की डीवीआर जब्त की है. अब टीम फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद ले रही है ताकि यह मालूम चल सके कि कौन सी चीजें डिलीट की गई हैं और उन्हें वापस लाने की कोशिश की जा रही है. सीआईयू अफसर एपीआई रिजाय काजी ने साकेत सोसाइटी से डीवीआर कलेक्ट की थी, लेकिन वाजे ने उसे रिकॉर्ड में नहीं रखा और वरिष्ठ अधिकारियों से छुपाया.

NIA के सामने सचिन वाजे के खुलासों के बीच परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मंगलवार रात को ही मुलाकात की थी, जिसके बाद आज परमबीर सिंह का ट्रांसफर हो गया. जाहिर है एंटीलिया केस में सचिन वाजे की गिरफ्तारी के बाद अब परमबीर सिंह पर NIA की नजर है.

परमबीर सिंह के ट्रांसफर के बाद एंटीलिया केस के थ्रिलर में एक और सस्पेंस जुड़ गया है. हर रोज इस केस से जुड़े नए खुलासे हो रहे हैं. फिर चाहे वो तीन कारें हों या सीसीटीवी कैमरों का रिकॉर्ड. इस केस के सारे तार अभी तक सीधे सचिन वाजे से जाकर जुड़ रहे हैं.

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मुंबई क्राइम ब्रांच के ऑफिस के पास पार्किंग में खड़ी काली मर्सिडीज कार एंटीलिया केस में बड़ी सुराग के रूप में सामने आई है. एनआईए ने मंगलवार को इस कार को जब्त किया था. बताया जाता है कि इस कार का इस्तेमाल इस केस में गिरफ्तार मुंबई पुलिस के एपीआई सचिन वाजे करते थे. जिस मर्सिडीज कार को एनआईए ने बरामद किया है, उसका मालिक महाराष्ट्र के धुले शहर का है. हालांकि आजतक से बातचीत में उन्होंने कहा कि वो फरवरी में ही कार बेच चुके हैं.

एनआईए के मुताबिक, एंटीलिया के पास खड़ी स्कॉर्पियो कार की नंबर प्लेट इस मर्सिडीज के अंदर मिली है. इस कार में कई और भी नंबर प्लेट मिले हैं. तलाशी के दौरान एनआईए की टीम को काली मर्सिडीज में पौने 6 लाख रुपए, कपड़े और पैसे गिनती करने वाली मशीन मिली है. कार में पेट्रोल-डीजल भी रखा था.

सिर्फ काली मर्सिडीज ही नहीं बल्कि सीसीटीवी तस्वीर भी सचिन वाजे के गले का फंदा बन रही है. जांच से जुड़े सूत्रों की मानें तो सीसीटीवी में कैद ये वीडियो मुंबई पुलिस के बर्खास्त एपीआई सचिन वाजे की हो सकती है. पहले ये कहा जा रहा था कि वाजे ने खुद को पीपीई किट में छिपाने की कोशिश की थी लेकिन अब ये कहा जा रहा है कि ये पीपीई किट नहीं बल्कि ओवरसाइज कुर्ता पायजामा है और शख्स ने रुमाल से अपना चेहरा ढंक रखा है.

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वीडियो में दिख रहा व्यक्ति सचिन वाजे है या नहीं इसकी तस्दीक के लिए एनआईए ने ये वीडियो फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है. अगर ये साबित हो गया कि ये सचिन वाजे ही है तो फिर इस सवाल का जवाब अपने आप मिल जाएगा कि 25 फरवरी की रात सौ नंबर पर कॉल करने के बाद लोकल पुलिस से भी पहले सचिन वाज़े मौके पर कैसे पहुंच गए थे. यानी एनआईए के शक के हिसाब से सचिन वाज़े पहले खुद स्कॉर्पियो लेकर आए, स्कॉर्पियो पार्क की, इनोवा में बैठे, थोड़ी दूर गए, फिर पीपीई सूट उतारा और वापस दोबारा सचिन वाज़े बन कर मौके पर आ गए. इस वीडियो के अलावा एनआईए के हाथ सचिन वाज़े को लेकर एक और बड़ी कामयाबी लगी है और ये कामयाबी है विस्फोटक से लदी स्कॉर्पियो को लेकर.

एनआईए को पुख्ता शक है कि विस्फोटकों से लदी स्कॉर्पियो चोरी नहीं हुई थी. सूत्रों के मुताबिक ये कार वाजे के पास थी. सूत्रों के मुताबिक, कार के मालिक मनसुख ने विक्रोली में कार रखकर चाबी सीआईयू के एक अफसर को सीएसटी में सौंपी थी. बाद में उस अफसर ने कार वाजे के ठाणे वाले घर साकेत सोसाइटी में पार्क कर दी.

यानी, एनआईए सूत्रों के मुताबिक 25 फरवरी को एंटीलिया के  बाहर मिली स्कॉर्पियो इससे पहले सचिन वाज़े के ठाणे वाले घर साकेत कॉम्प्लेक्स में पार्क थी.  लेकिन बताया जाता है इस सबूत को वाजे ने मिटा दिया है. 27 फरवरी को सचिन वाज़े के घर यानी साकेत कॉम्प्लेक्स में खुद उन्हीं की टीम के एक पुलिस अफ़सर रियाज़ क़ाज़ी ने केस की जांच के नाम पर साकेत हाउसिंग सोसायटी परिसर की सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया था और जरूरी सबूत डिलीट कर दिए. एनआईए को शक ही नहीं बल्कि पूरा यकीन है कि इस पूरी साज़िश में सचिन वाज़े के अलावा कई बड़े अफ़सर भी शामिल हैं.

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(ब्यूरो रिपोर्ट आजतक)

 

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