Inside Story: ऐसे संभव हो पाई विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई

Inside Story भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन को एक साथ अपने पाले में किया. सूत्रों के मुताबिक भारत ने दुनिया भर के देशों को बताया कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का जिम्मा पाकिस्तान का है.

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विंग कमांडर अभिनंदन करीब 55 घंटे तक पाकिस्तानी सेना की हिरासत में थे. (फाइल फोटो) विंग कमांडर अभिनंदन करीब 55 घंटे तक पाकिस्तानी सेना की हिरासत में थे. (फाइल फोटो)

परवेज़ सागर

  • नई दिल्ली,
  • 04 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 2:22 PM IST

मिग 21 के पायलट विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान करीब 55 घंटे तक पाकिस्तानी सेना की हिरासत में रहने के बाद वाघा बॉर्डर के रास्ते हिंदुस्तान वापस लौट आए हैं. मगर यकीन मानिए उनकी रिहाई इतनी आसान नहीं थी. बुधवार दोपहर शुरू होने से पहले जैसे ही अभिनंदन के पाकिस्तान में होने की खबर आई. नई दिल्ली फौरन हरकत में आ चुकी थी. इसके बाद अगले 30 घंटे तक प्रधाननमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्रालय, भारतीय वायु सेना और एनएसए सिर्फ एक काम में लगे थे. अभिनंदन की रिहाई. और इसके लिए सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों समेत दुनिया भर के देशों के ज़रिए पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था. आपको बताते हैं कि आखिर अभिनंदन की रिहाई कैसे मुमकिन हो पाई.

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करीब 55 घंटे तक पाकिस्तानी सेना की हिरासत में रहने के बाद विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान बा-हिफाज़त हिंदुस्तान लौट आए. तनाव भरे इस माहौल में पूरे देश को सुकून मिला. विंग कमांडर की वापसी के साथ ही अब उम्मीद की जा रही है कि भारत-पाक के बीच तनाव में अब कुछ कमी आएगी.

मगर अभिनंदन की ये रिहाई इतनी आसान नहीं थी, जितनी दिख रही है. एक तरफ देश दुआएं मांग रहा था तो दूसरी तरफ भारत सरकार 30 घंटे से भी ज्यादा वक्त तक लगातार वो रास्ता तलाश रही थी जिसके ज़रिए जल्द से जल्द पायलट की रिहाई हो सके. बुधवार की सुबह जैसे ही विंग कमांडर के पाकिस्तानी हिरासत में होने की खबर आई उसी के फौरन बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक जंग छेड़ दी थी.

भारत ने सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्य देशों समेत कई देशों को अपने पाले में खड़ा कर लिया. हर देश को ये साफ-साफ बोल दिया था कि पाकिस्तान को भारतीय पायलट हर हाल में रिहा करना होगा. इसमें किसी तरह की ना-नुकुर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई के लिए 27 और फरवरी को प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय में दिन भर गहमागहमी रही.

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भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन को एक साथ अपने पाले में किया. सूत्रों के मुताबिक भारत ने दुनिया भर के देशों को बताया कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का जिम्मा पाकिस्तान का है. अगर ऐसा नहीं हुआ तो पाकिस्तान पर हमला किया जाएगा. भारत के सख्त रुख को देखते हुए ज्यादातर देशों ने पाकिस्तानी सरकार को हालात से रूबरू कराया. सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के वार्ताकारों ने पाकिस्तान से कहा कि भारत उस पर तीन तरह से कार्रवाई करने की प्लानिंग कर रहा है.

इंडियन नेवी कराची की ओर बढ़ेगी. पाकिस्तान पर बैलिस्टिक मिसाइल भी दागने की तैयारी है. इसके अलावा इंडियन आर्मी पाकिस्तानी बॉर्डर पर भी हमला बोलने को तैयार है. हालांकि भारत ने ऐसी किसी भी हलचल से लगातार इंकार किया. मगर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने गुरूवार को पाक संसद में बाकायदा भारत की तरफ से मिसाइल हमले की बात कही थी.

इसी गहमागहमी के बीच 28 फरवरी को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो और अमेरिकी सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से बातचीत की. अमेरिका ने भारत को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया. अमेरिका ने ये भी कहा कि भारत को सीमा पार से जारी आतंकवाद से आत्मरक्षा का पूरा हक है.

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सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार ने दुनिया भर की सरकारों को भरोसा दिया कि उसका आतंकी कैंपों के खिलाफ ये मिशन फिलहाल पूरा हो चुका है. अब सारी कवायद पायलट को लेकर है. पाकिस्तान को उसे हर हाल में लौटाना होगा. पाकिस्तान की जिम्मेदारी है कि वो युद्ध बंदियों पर जेनेवा कन्वेंशन-1949 का पालन करें. पाकिस्तान को इंसानियत के आधार पर पायलट की वापसी सुनिश्चित करनी होगी. इन हालात में पाकिस्तान के साथ किसी तरह की कोई बातचीत नहीं हो सकती है. और अगर पायलट की रिहाई में कोई गफलत हुई तो हालात बिगड़ने में वक्त नहीं लगेगा.

भारत के कूटनीतिक दांव से पाकिस्तान खुद को अलग-थलग महसूस करने लगा. सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्यों में पाकिस्तान को चीन से काफी उम्मीद थी. मगर उलटे सभी देशों ने पाकिस्तान से आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा. यहां तक की संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने भी पाकिस्तान को आईना दिखा दिया. पाकिस्तान उस पर दबाव डाल रहा था कि वो भारत को अंतर्राष्ट्रीय इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन की बैठक में न बुलाए.

मुस्लिम देशों की ये बैठक इस वक्त यूएई में चल रही है. इसमें भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को चीफ गेस्ट बनाया गया. मगर संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान की इस मांग को ठुकरा दिया. यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों से भी समर्थन न मिलने से पाकिस्तान के पास बेहद कम विकल्प बचे थे.

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आखिर में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने अभिनंदन की गिरफ्तारी के ठीक 31 घंटे बाद बीते गुरूवार की शाम पांच बजे पाक संसद में बयान देने का फैसला लिया. इसमें उन्होंने विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान शांति की दिशा में एक कदम बढ़ाते हुए भारतीय पायलट अभिनंदन को रिहा कर रहा है. और ऐसे 55 घंटे बाद अभिनंदन अपने वतन लौट आए.

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