मासूम बच्चों के दिमाग में जेहाद का जहर भर रहा है ISIS

कहते हैं बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं. जिस सांचे में ढालो, ढल जाते हैं. लेकिन इस बगदादी का क्या करें, जो बच्चों को दहशतगर्दी के सांचे में ढालने में लगा है.

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ब्रजेश मिश्र / शम्स ताहिर खान

  • नई दिल्ली,
  • 10 मार्च 2016,
  • अपडेटेड 1:28 AM IST

टेडी बीयर से खेलने वाले बच्चे अगर टेडी बीयर का गला काटने लगें तो? रिमोट से खिलौना कार चलाने वाले बच्चे अगर रिमोट कंट्रोल से कार बम उड़ाने लगें तो? चार साल की बच्ची कसाई की तरह इंसानों के सिर काटने की बातें करने लगे तो? सवाल कचोटने वाला है. मगर (ISIS) के सरगना बगदादी ने सैंकड़ों बच्चों को ऐसा ही बना दिया है. दरअसल वो इन बच्चों का इस्तेमाल कहर के तौर पर करना चाहता है.

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कहते हैं बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं. जिस सांचे में ढालो, ढल जाते हैं. लेकिन इस बग़दादी का क्या करें, जो बच्चों को दहशतगर्दी के सांचे में ढालने में लगा है. तभी तो सीरिया और इराक जैसे मुल्कों में हजारों बच्चे आज फंस कर उस उम्र में मरने-मारने का सबक सीख रहे हैं, जिस उम्र में इंसान को ठीक से जीना भी नहीं आता.

इस्लामिक हुकूमत के नाम पर आतंक की आग
तुर्की में आईएसआईएस का राज तो नहीं है, लेकिन आईएसआईएस इस मुल्क की दहलीज पर जरूर खड़ा है. क्योंकि तुर्की से सटे इराक और सीरिया ही वो जगह हैं, जिसके एक बड़े इलाके पर आईएसआईएस का कब्जा है. लेकिन अब तुर्की की फिजा में भी आईएसआईएस के खौफ और बगदादी की हुकूमत की बेचैनी महसूस की जा सकती है. गरज ये कि तुर्की में आईएसआईएस के चंगुल से भाग निकले हजारों शरणार्थी तो हैं ही, यहां वैसे बहुत से मासूम बच्चे भी हैं, जिन्हें आईएसआईएस ने इस्लामिक हुकूमत के नाम पर आतंक की आग में झोंक दिया था. दरअसल, अब छोटे-छोटे बच्चों को बरगला कर और उन्हें मजबूर कर आतंकवादियों की नई पौध तैयार करने में जुटा है. एक ऐसी पौध, जिन्हें जिंदगी से ज्यादा मौत से मुहब्बत है और एक ऐसी पौध, जिनके मासूम दिमाग में जेहाद का जहर भरा जा रहा है.

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जेहाद के नाम पर मरने-मारने की ट्रेनिंग
इराक और सीरिया जैसे मुल्कों में आईएसआईएस की ओर से चलाए जा रहे अनगिनत ट्रेनिंग कैंपों में अलग-अलग जगहों से पकड़े गए हजारों बच्चों को जेहाद के नाम पर मरने-मारने की ट्रेनिंग दी जा रही है. इन कैंप में शामिल बच्चों को ना सिर्फ बेहद सख्त जिस्मानी ट्रेनिंग से गुजरा जाता है, बल्कि आईएसआईएस और इसके खलीफा बग़दादी के लिए कमिटमेंट की ऐसी तालीम दी जाती है कि वो बाकी की दुनिया से पूरी तरह कट जाएं, फिर चाहे वो उनके मां-बाप ही क्यों ना हो.

बच्चों को फिदायीन बना दिया
बगदादी और उसके आतंकवादी हर महीने तीन से चार सौ बच्चों को अगवा करते हैं और उन्हें आतंक की फैक्ट्री में झोंक देते हैं. क्या आप यकीन करेंगे कि उसकी इस फैक्ट्री में आठ साल तक के बच्चे भी सीने पर गोली खाने से लेकर किसी बेगुनाह का सिर उतारने तक की तालीम ले रहे हैं. लेकिन इससे भी ज्यादा अफसोसजनक ये है कि उसने कई ऐसे बच्चों को फिदायीन बना दिया है, जो दिमागी तौर पर भी दूसरे बच्चों के मुकाबले कमजोर हैं.

फौजी बनाने के नाम पर मनमानी
आईएसआईएस इस बच्चों को कब्स ऑफ द खैलिफेट यानी के शावक के तौर पर बुलाता है और उनका ब्रेनवॉश कर उन्हें मौत के लिए तैयार करता है. हालत ये है कि कई प्रोपेगैंडा वीडियोज में जहां ऐसे बच्चों को लोगों का कत्ल करते हए देखा जा सकता है, वहीं ज्यादातर बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें फौजी बनाने के नाम पर मनमाना काम करवाया जाता है और तो और दिमागी तौर पर लाचार कई बच्चों को फिदायीन यानी मानव बम बना कर आईएसआईएस ने अपनी गंदी जेहनीयत का एक और सबूत दिया है.

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