एक फ्लैट, बंद दरवाजा और दोस्त बनकर आया था कातिल... दिल्ली में महिला प्रोफेसर के मर्डर में क्या खुलासे हुए?

दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव में मौजूद सत्यं अपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर देवोस्मिता पॉल की लाश फ्लैट के अंदर मिली. दरवाजा बाहर से बंद था, मौका-ए-वारदात पर लूटपाट के कोई निशान नहीं मिले. पुलिस फ्रेंडली एंट्री और ऑनलाइन डिलीवरी एंगल की जांच कर रही है. पढ़ें पूरी कहानी.

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असिस्टेंट प्रोफेसर का कत्ल पुलिस के लिए पहेली बन गया है (फोटो-ITG) असिस्टेंट प्रोफेसर का कत्ल पुलिस के लिए पहेली बन गया है (फोटो-ITG)

अरविंद ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 05 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:51 PM IST

दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव की एक शांत दोपहर अचानक उस वक्त सनसनी में बदल गई, जब सत्यं अपार्टमेंट के एक फ्लैट में रहने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर देवोस्मिता पॉल की लाश उनके घर में मिली. बाहर से तो सब कुछ सामान्य दिख रहा था, लेकिन फ्लैट के अंदर एक ऐसा राज छिपा था, जिसने पुलिस और स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया. शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों ने इस हत्याकांड को और भी रहस्यमयी बना दिया है.

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देवोस्मिता पॉल शिवाजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं और सत्यं अपार्टमेंट के फ्लैट में अकेली रहती थीं. बताया गया कि वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली थीं. पड़ोसियों के अनुसार वह कम लोगों से बातचीत करती थीं और अपनी निजी जिंदगी को काफी सीमित रखती थीं. उनके पति बेंगलुरु में रहते हैं और दोनों के बीच संबंधों में अनबन की बात भी सामने आई है.

रोज की तरह उनकी दिनचर्या बेहद नियमित थी. वह हर सुबह कॉलेज जाती थीं, लेकिन पिछले दो दिनों से कॉलेज नहीं पहुंची थीं. दो दिन पहले उन्हें आखिरी बार शॉपिंग के लिए घर से बाहर जाते देखा गया था. इसके बाद किसी ने उन्हें बाहर नहीं देखा. इसी बीच उनके ड्राइवर ने रोज की तरह उन्हें कॉलेज ले जाने के लिए फोन किया, लेकिन कॉल का कोई जवाब नहीं मिला.

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जब कई बार फोन करने के बावजूद संपर्क नहीं हो पाया तो ड्राइवर को चिंता हुई. कुछ समय बाद मोबाइल फोन भी बंद या पहुंच से बाहर मिलने लगा. तब ड्राइवर ने इस बारे में प्रोफेसर की बहन देवारति पॉल को जानकारी दी. बहन ने भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. यहीं से एक अनहोनी की आशंका ने जन्म लिया.

4 जून 2026 की दोपहर करीब 2:35 बजे थे. प्रोफेसर की बहन देवारति पॉल सत्यं अपार्टमेंट पहुंचीं. वहां उन्होंने देखा कि फ्लैट का दरवाजा बाहर से बंद था. सोसायटी की मेंटेनेंस टीम की मदद से ताला तुड़वाया गया. उसी दौरान पुलिस को भी सूचना दे दी गई. दरवाजा खुलते ही सामने जो मंजर था, उसने सभी को सन्न कर दिया.

फ्लैट के ड्राइंग रूम में देवोस्मिता पॉल की लाश पड़ी थी. शुरुआती जांच में पता चला कि उनके सिर पर किसी भारी चीज से वार किया गया था. माना जा रहा है कि इसी हमले के कारण उनकी मौत हुई. घर में दो कमरे थे, लेकिन लाश ड्राइंग रूम में मिली. फ्लैट के बाहर पिछले दिन का अखबार भी पड़ा हुआ था, जिससे पता चला कि हत्या को काफी पहले अंजाम दिया जा चुका था.

सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि फ्लैट में किसी तरह की लूटपाट के निशान नहीं मिले. कीमती सामान अपनी जगह मौजूद था. प्रोफेसर का मोबाइल फोन भी घर के अंदर से बरामद हुआ और उसकी लोकेशन भी फ्लैट के भीतर ही मिली. इससे जांचकर्ताओं का शक और गहरा गया कि हत्या का मकसद सिर्फ चोरी या लूट नहीं था.

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जांच के दौरान एक और अहम बात सामने आई. पुलिस को लग रहा है कि कातिल जबरन घर में नहीं घुसा था. शुरुआती संकेत बताते हैं कि उसे प्रोफेसर ने खुद घर में प्रवेश करने दिया था. यानी यह एक 'फ्रेंडली एंट्री' का मामला हो सकता है. हत्या के बाद आरोपी ने बड़ी चालाकी से फ्लैट का दरवाजा बाहर से बंद किया और आराम से सोसायटी से निकल गया.

मामले को और उलझाने वाली बात यह है कि फ्लैट के आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था. ऐसे में आरोपी की गतिविधियों का पता लगाना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि हाल के दिनों में घर पर कौन-कौन लोग आए थे. चूंकि प्रोफेसर अक्सर ऑनलाइन खाना और अन्य सामान मंगवाती थीं, इसलिए डिलीवरी रिकॉर्ड और डिलीवरी बॉयज से भी पूछताछ की जा रही है.

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और क्राइम टीम मौके पर पहुंची. फॉरेंसिक नमूने जुटाए गए, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई. इसके बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए एलबीएस अस्पताल भेज दिया गया. भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस का दावा है कि उसे इस हत्याकांड से जुड़ी कुछ अहम लीड्स मिली हैं. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर वह कौन था, जिसे देवोस्मिता पॉल ने अपने घर का दरवाजा खोला और जिसने उसी भरोसे को उनकी मौत में बदल दिया.
 

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