सरकार का बिग प्लान, विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए हो सकते हैं ये बड़े ऐलान... जानिए कब?

Rupee vs Dollar: रुपये पर बढ़ते दबाव और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार और RBI मिलकर बड़े कदम उठाने की तैयारी में हैं. रिपोर्ट की मानें तो केंद्रीय कैबिनेट इसी हफ्ते एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर सकती है.

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रुपया को संभालने के लिए सरकार का बड़ा दांव. (Photo: AI Generated) रुपया को संभालने के लिए सरकार का बड़ा दांव. (Photo: AI Generated)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:11 PM IST

भारत सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) मिलकर एक बड़ा फैसला ले सकता है. दरअसल, सरकार के इस कदम से रुपया संभल सकता है और भारतीय अर्थव्यवस्था को इससे ताकत मिल सकती है. 

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था और डेट मार्केट के लिहाज से एक बहुत बड़ा नीतिगत बदलाव देखने को मिल सकता है. रुपये पर बढ़ते दबाव और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार और RBI मिलकर बड़े कदम उठाने की तैयारी में हैं. रिपोर्ट की मानें तो केंद्रीय कैबिनेट इसी हफ्ते एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर सकती है, जो विदेशी फंड्स के लिए भारतीय बॉन्ड में निवेश को बेहद सस्ता बना देगा. 

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बॉन्ड टैक्स में भारी कटौती की तैयारी
प्रस्ताव के मुताबिक विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बॉन्ड से कमाए गए ब्याज पर लगने वाले 20% टैक्स को या तो पूरी तरह खत्म किया जा सकता है या उसमें बड़ी कटौती की जा सकती है. इसका उद्देश्य है कि ग्लोबल मार्केट के अनुरूप टैक्स स्ट्रक्चर को बनाना है, ताकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) भारतीय डेट मार्केट में खुलकर पैसा लगा सकें.

 

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्रालय और आरबीआई ने टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया. रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्रीय बैंक ने पहले विदेशी बॉन्ड निवेशकों पर टैक्स कम करने की सिफारिश की थी.

इसके अलावा आरबीआई विदेशी निवेशकों के लिए बिना किसी निवेश सीमा के कुछ लंबी अवधि के सॉवरेन बॉन्ड खरीदने के रास्ते दोबारा खोल सकता है. साल 2024 में आरबीआई ने 14 साल और 30 साल वाले सरकारी प्रतिभूतियों को Fully Accessible Route (FAR) लिस्ट से बाहर कर दिया था, लेकिन अब इस लिस्ट को फिर से बड़ा किया जा सकता है. 

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यह कदम क्यों उठाया जा रहा है? 
इस साल भारतीय रुपया काफी उतार-चढ़ाव से गुजरा है और 20 मई को डॉलर के मुकाबले 96.9650 के रिकॉर्ड निचले स्तर को छू गया था. उसके बाद से ही रुपये को संभालने के लिए सरकार और केंद्रीय बैंक के द्वारा लगातार कदम उठाए जा रहे हैं. 

हालांकि रुपये में गिरावट के दूसरे भी कारण हैं. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी टैरिफ से ट्रेड टेंशन और ईरान संघर्ष के कारण बनी भू-राजनीतिक अनिश्चितता की वजह से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से पैसे निकाल रहे हैं. जानकारों की मानें को इस आउटफ्लो को रोकने के लिए यह 'टैक्स इंसेंटिव' जरूरी हो गया है. 

यही नहीं, सरकार Persons Resident Outside India (PROIs) के लिए पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम के तहत लिस्टेड भारतीय कंपनियों के शेयरों में निवेश करने के नियमों को नोटिफाई कर सकती है. इससे NRI और विदेशी व्यक्तियों के लिए भारतीय इक्विटी मार्केट में सीधा निवेश करना काफी आसान हो जाएगा. 

अगर टैक्स घटता है, तो भारत के सरकारी बॉन्ड्स की मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ेगी, जिससे बॉन्ड की कीमतें बढ़ेंगी और यील्ड्स में कमी आएगी. इसका सीधा फायदा उन बैंकों को होगा जिनके पास सरकारी सिक्योरिटीज का बड़ा पोर्टफोलियो है. रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल इस हफ्ते में ही उन प्रस्तावों पर विचार कर सकता है, जिनसे भारतीय बांडों में निवेश करने वाले विदेशी फंडों पर कर का बोझ काफी कम हो सकता है. 
 

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