Gold Monetization 2.0: अब निकलेगा घर में पड़ा सोना? इकोनॉमी भी दौड़ पड़ेगी... सरकार की बड़ी तैयारी!

Gold New Rule: नई पीढ़ी को पारंपरिक भारी डिजाइनों की जगह लेटेस्ट ट्रेंडी ज्वेलरी ज्यादा पसंद आती है. इस स्कीम के जरिए लोग अपने घरों में बेकार पड़ी पुरानी ज्वेलरी की सही कीमत पा सकेंगे और आसानी से नए डिजाइन ले सकेंगे.

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गोल्ड इंपोर्ट कम करने के लिए सरकार की बड़ी तैयारी. (Photo: Getty) गोल्ड इंपोर्ट कम करने के लिए सरकार की बड़ी तैयारी. (Photo: Getty)

आदित्य के. राणा

  • नई दिल्ली,
  • 14 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:42 AM IST

भारतीय घरों की तिजोरियों और लॉकरों में बंद सोने की चमक अब देश की अर्थव्यवस्था (Economy) को एक नई रफ्तार देने की तैयारी में है. घरों में बेकार पड़े इसी सोने को मार्केट में वापस लाने के लिए केंद्र सरकार एक बेहद महत्वाकांक्षी प्रस्ताव पर विचार कर रही है. सराफा कारोबारियों (Bullion Traders) द्वारा तैयार की गई इस योजना को 'गोल्ड मोनेटाइजेशन 2.0' (Gold Monetisation Scheme 2.0) का नाम दिया जा रहा है. अगर ये योजना लागू होती है, तो इससे देश के गोल्ड मार्केट की पूरी तस्वीर बदल सकती है जिससे आम ग्राहकों को भी बड़ा फायदा पहुंच सकता है.

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क्या है इस 'योजना' का टारगेट?

सराफा संगठनों ने सरकार को जो ब्लूप्रिंट सौंपा है, उसके मुताबिक योजना के शुरुआती फेज में देश के घरों से करीब 200 टन सोना वापस मार्केट में लाने का प्रस्तावित लक्ष्य रखा गया है. इस घरेलू सोने के सिस्टम में आने से भारत को विदेशों से सोना आयात (Gold Import) करने की निर्भरता कम हो सकती है, जिससे देश का भारी-भरकम विदेशी मुद्रा खर्च बचाने में मदद मिल सकती है.

पुरानी स्कीम से कितनी अलग है नई योजना?

इससे पहले भी सरकार गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम लेकर आई थी. लेकिन लोग सीधे बैंक जाने में हिचकिचाते थे. इस बार इस कमी को दूर करते हुए पूरी प्रक्रिया को बेहद आसान और व्यावहारिक बनाए जाने की संभावना है. प्रस्ताव के मुताबिक, ग्राहक अपने पुराने डिजाइन के गहने लेकर सीधे बैंक जाने की जगह अपने नजदीकी रजिस्टर्ड सराफा कारोबारियों (Jewellers) के पास जा सकेंगे. ज्वेलर इन पुराने गहनों को गलाकर उसकी शुद्धता (Purity) तय करेगा और उसे बैंक में जमा कराएगा.

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प्रस्ताव के अनुसार, जमा किए गए सोने के बदले ग्राहक के बैंक अकाउंट में उतनी ही वैल्यू की गोल्ड यूनिट्स (Gold Units) क्रेडिट की जा सकती हैं. आज की नई पीढ़ी को पारंपरिक भारी डिजाइनों की जगह लेटेस्ट ट्रेंडी ज्वेलरी ज्यादा पसंद आती है. इस स्कीम के जरिए लोग अपने घरों में बेकार पड़ी पुरानी ज्वेलरी की सही कीमत पा सकेंगे और आसानी से नए डिजाइन ले सकेंगे. दूसरी तरफ, कारोबारियों को भी अपेक्षाकृत कम लागत पर कच्चे माल के रूप में सोना उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है.

आसान किए जाएंगे टैक्स नियम!

अक्सर लोग टैक्स और इनकम टैक्स (Income Tax) के नोटिस के डर से अपने सोने को सामने लाने से कतराते हैं. लेकिन इस योजना में मौजूदा नियमों के तहत पूरी पारदर्शिता रखने की बात कही जा रही है. टैक्स नियमों के अनुसार, तय सीमा के भीतर सोना रखने वालों को राहत मिलती है. नियमों के मुताबिक विवाहित महिलाएं अपने पास 500 ग्राम तक सोना रख सकती हैं. जबकि अविवाहित महिलाओं के लिए ये लिमिट 250 ग्राम तय है. वहीं पुरुष अपने पास 100 ग्राम तक सोना रख सकते हैं. हालांकि, किसी भी मामले में अंतिम स्थिति संबंधित नियमों और परिस्थितियों पर निर्भर करती है.

बाजार को है बड़ा भरोसा

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हालांकि, सरकार की तरफ से अभी तक इस स्कीम को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है. लेकिन घरेलू सराफा बाजार इस कदम को लेकर बेहद उत्साहित और पॉजिटिव है. हाल ही में इंपोर्ट ड्यूटी में बदलावों के बाद से ही देश के भीतर मौजूद सोने को फॉर्मल बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने की कवायद तेज हुई है. सराफा बाजार की इस नई पहल से संकेत मिलते हैं कि आने वाले दिनों में घरों में रखा सोना केवल लॉकर की शोभा नहीं बढ़ाएगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और देश की आर्थिक तरक्की का एक बड़ा जरिया भी बन सकता है.

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