मंगलवार से मॉनेट्री पॉलिसी की समीक्षा शुरू करने वाला है. दो दिन तक चलने वाली इस बैठक में रेपो रेट कम करने पर अहम फैसला हो सकता है. हालांकि मॉनेट्री पॉलिसी कमिटी की तरफ इसमें कमी करने की गुंजाइश कम ही दिखती है. इसकी वजह है पिछले दिनों में इकोनॉमी के सामने उभरी चुनौतियां. कमिटी के सामने मौजूदा समय में 3 अहम चुनौतियां हैं, जिनसे निपटकर उसके लिए रेपो रेट में कमी करने का फैसला लेना मुश्किल हो सकता है.
महंगाई
के सामने सबसे पहली चुनौती है महंगाई की. पिछले कुछ महीनों से खाद्य पदार्थों की कीमत में बढ़ोत्तरी हुई है. प्याज और टमाटर की कीमतों में बढ़ेात्तरी देखने को मिली है. ऐसे में आरबीआई के सामने महंगाई बढ़ने की चुनौती है.
विदेशी निवेशकों का रुख
लगातार निकल रहे हैं. वह अपना पैसा शेयर बाजार से निकाल रहे हैं. ऐसे में अगर आरबीआई रेट कट करता है, तो विदेशी निवेशकों का रुख शेयर बाजार के लिए और भी बुरा साबित हो सकता है. विदेशी निवेशक अपने पैसे निकालने का दौर जारी रख सकते हैं, जो मार्केट के लिए बेहतर साबित नहीं होगा.
कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा
भारतीय रिजर्व बैंक को कच्चे तेल की कीमतों को ध्यान में रखकर रेपो रेट में कमी करने का फैसला लेना होगा. पिछले कुछ दिनों से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं. कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर महंगाई पर पड़ता है. ऐसे में मॉनेट्री पॉलिसी कमिटी कोई भी फैसला लेने से पहले, इस पर जरूर गौर करेगी.
रेपो रेट कट की संभावना कम
महंगाई बढ़ने और इकोनॉमी के लिए माकूल माहौल न होने की वजह से रेपो रेट में कमी करने की संभावना ना के बराबर है. ऐसे में देखना होगा कि दो दिन चलने वाली इस बैठक में क्या फैसला सामने आता है.
विकास जोशी