दिल्ली में GST की तैयारी पर सवाल, 7 बड़ी चुनौतियां

Gst को लागू होने में अभी 20 दिन से भी कम वक्त बचा है. ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती व्यापारियो को नए सिस्टम से जुड़ने की है. 20 लाख से ऊपर होने वाली सालाना आमदनी वाले व्यपारियो को जी एस टी से जुड़ना अनिवार्य है.

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जी एस टी के साइड इफेक्ट्स जी एस टी के साइड इफेक्ट्स

केशवानंद धर दुबे / राहुल मिश्र / स्मिता ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 14 जून 2017,
  • अपडेटेड 10:54 AM IST

Gst को लागू होने में अभी 20 दिन से भी कम वक्त बचा है. ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती व्यापारियो को नए सिस्टम से जुड़ने की है. 20 लाख से ऊपर होने वाली सालाना आमदनी वाले व्यपारियो को जी एस टी से जुड़ना अनिवार्य है. नए टैक्स सिस्टम की जानकारी और कंप्यूटर लिट्रेसी के अभाव के चलते छोटे-बड़े सभी व्यापारी परेशान है.

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बता दें कि देश मे करीब 6 करोड़ छोटे व्यापारी है. देश के बाकी राज्यों को अगर हम छोड़ भी दे तो दिल्ली में ही कई छोटे बड़े बाजारो में लाखो ऐसे व्यापारी है जिनको जी एस टी की पूरी जानकारी नही है. ऐसे में व्यपारियो का मानना है सरकार को जी एस टी लागू करने से पहले सभी को जागरुक करने की मुहिम चलानी चाहिए थी. जिससे सभी सही तरीके से अपनी स्वेछा से जुड़ सके. व्यापारी संग के अध्यक्ष प्रवीण खंडेलवाल का मानना है की छोटे व्यपारियो को जोड़ने के लिए उनको सही जानकारी देना जरूरी है.


- नए टैक्स सिस्टम से जुड़ी छोटी बड़ी जानकारी का अभाव

- जी एस टी के कारण सभी बही खातों के कंप्यूटरीकरण जिसको ज्यादातर चलाना नही जानते

- महीने में 3 बार रिटर्न्स फ़ाइल करना होगा जो कि पहले 3 महीने में एक बार था

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- लोकल होल सेल व्यपारियो के लिए सभी प्रोडक्ट की जानकारी कंप्यूटर पर मेंटेन करना मुमकिन नही

- लगने वाले टैक्स की सही जानकारी नही

- बाजार अभी से सुने, नही आ रहे खरीदार

- सभी सामानों पर अलग अलग टैक्स भी बड़ा रहा है परेशानिया

व्यापारीयो का सरकार से ये भी अनुरोध है कि अगर किसी व्यापारी से ट्रांसक्शन भरने के दौरान अगर कोई गलती हो जाय या जी एस टी सिस्टम से जुड़ने में कुछ गड़बड़ी हो जाए तो उस पर इस साल कोई कारवाही न कि जाए.

को ध्यान में रखते हुए ये जरूरी है की सभी इससे स्वेछा से जुड़े. जिसके लिए ये जरूरी है कि शुरुआत में सभी छोटे बड़े व्यपारियो को वक्त दिया जाए ताकि वो इस नए टैक्स सिस्टम को समझ कर इसका हिस्सा बन सके.

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