न मेंटेनेंस, न बिल की टेंशन, इस बिल्डिंग में रहने के लिए लोगों को मिलते हैं पैसे

दक्षिण मुंबई के कफ परेड में स्थित 'जॉली मेकर' में रहने वाले लोग सिर्फ निवासी ही नहीं हैं. वे एक ऐसी कमर्शियल प्रॉपर्टी से भी जुड़े हैं, जिससे होने वाली कमाई से न केवल बिल्डिंग के सारे खर्चे पूरे होते हैं, बल्कि रिपोर्ट्स के मुताबिक हर फ्लैट मालिक को साल में करीब 3 लाख रुपये भी मिलते हैं.

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मुंबई की इस प्रॉपर्टी की खूब हो रही है चर्चा (Photo-ITG) मुंबई की इस प्रॉपर्टी की खूब हो रही है चर्चा (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:34 AM IST

मुंबई भारत के सबसे महंगे रियल एस्टेट बाजारों में से एक है, जहां घर खरीदने के लिए आम आदमी सोच भी नहीं सकता है. लेकिन मुंबई की एक सोसायटी वहां रहने के लिए आपको पैसे देती है. सुनने में थोड़ा अजीब लगता है, यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे फेरारी कंपनी आपको अपनी सुपरकार चलाने के लिए पैसे दे. लेकिन ये हकीकत है.

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दक्षिण मुंबई के सबसे प्रीमियम इलाकों में से एक, कफ परेड (Cuffe Parade) स्थित रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स 'जॉली मेकर' (Jolly Maker) के बारे में यही दावा किया जा रहा है. कहा जाता है कि यह सोसायटी अपने घर मालिकों से हर महीने मेंटेनेंस चार्ज लेने के बजाय, उन्हें हर साल लगभग 2.5 लाख से 3 लाख रुपये बांटती है.

यह दावा रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर वीडियो बनाने वाले विशाल भार्गव ने इंस्टाग्राम पर किया है. वीडियो में उन्होंने जॉली मेकर को "मुंबई के सबसे प्रतिष्ठित टावरों में से एक" बताया और एक चौंकाने वाली बात कही. भार्गव ने कहा, "मुंबई की इस बिल्डिंग में रहने के लिए 2.5 लाख रुपये पाएं. जी हां, इस बिल्डिंग की सोसायटी असल में घर के मालिक को यहां रहने के लिए पैसे देती है." उन्होंने आगे बताया, "यह सोसायटी इतनी अमीर है कि मालिकों को सोसायटी को कोई मेंटेनेंस फीस नहीं देनी पड़ती. इसके बजाय, सोसायटी हर घर मालिक को डिविडेंड देती है.

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सोसायटी यह सब कैसे कर पाती है?
 
दक्षिण मुंबई की ज्यादातर इमारतों में, निवासियों को हर महीने भारी-भरकम मेंटेनेंस चार्ज देना पड़ता है. इस पैसे से सुरक्षा, कर्मचारियों की सैलरी, मरम्मत, बिजली और अन्य खर्चे पूरे किए जाते हैं. कफ परेड और नरीमन पॉइंट जैसे पॉश इलाकों में यह खर्च काफी ज्यादा होता है. भार्गव के अनुसार, जॉली मेकर का यह आर्थिक ढांचा कई दशक पुराना है.

उन्होंने बताया, “1970 के दशक में, जब बिल्डर यहां अपार्टमेंट बेच रहा था, तब उसने एक ऑफर दिया था. उसने कहा कि 40% अतिरिक्त भुगतान करके नरीमन पॉइंट पर स्थित उसकी दूसरी बिल्डिंग भी खरीद लें. नरीमन पॉइंट की वही कमर्शियल  प्रॉपर्टी इस पूरे मॉडल की असली चाबी बताई जा रही है. आज उस बिल्डिंग से हर महीने 50 लाख रुपये का किराया आता है, जिसका इस्तेमाल मेंटेनेंस के लिए और सोसायटी को वापस भुगतान करने के लिए किया जाता है.

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अगर यह बात सही है, तो इसका मतलब है कि सोसायटी के सारे खर्चे उस कमर्शियल प्रॉपर्टी से होने वाली कमाई से पूरे हो जाते हैं. इसके बाद जो पैसा बचता है, उसे हर साल घर मालिकों में बांट दिया जाता है. Paytm के फाउंडर विजय शेखर शर्मा द्वारा 'X'  पर साझा किए जाने के बाद यह वीडियो और भी चर्चा में आ गया. इस दावे पर कमेंट करते हुए शर्मा ने लिखा, “आप इस गणित पर विश्वास नहीं करेंगे! और यह सच है.” उनकी इस पोस्ट ने इंटरनेट पर हलचल मचा दी और लोगों में यह जानने की उत्सुकता पैदा कर दी कि क्या भारत के सबसे महंगे प्रॉपर्टी बाजार में वाकई ऐसा कोई सिस्टम हो सकता है.

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हालाकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि aajtak.in इन दावों की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है. इसके बावजूद, दक्षिण मुंबई में अपने ही फ्लैट में रहने के बदले साल के करीब 3 लाख रुपये पाने के विचार ने लोगों का ध्यान खींच लिया है. एक ऐसे शहर में जहां घर के मालिक अक्सर बढ़ते हुए मेंटेनेंस बिलों को लेकर चिंतित रहते हैं, वहां एक ऐसी सोसायटी का विचार जो अपने निवासियों को उल्टा पैसे देती हो, वाकई अविश्वसनीय लगता है.

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