टाटा ग्रुप की टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल के शेयरों में भारी गिरावट आई है. इंट्राडे के दौरान टाटा मोटर्स के शेयर करीब 10 फीसदी तक टूट गए और 355 रुपये के नीचे कारोबार करने लगे. यह गिरावट कंपनी के एक अपडेट के बाद आया है. इस गिरावट के कारण इसके कमर्शियल यूनिट के शेयरों में भी दबाव दिखाई दिया.
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल के शेयरों में गिरावट के कारण यह निफ्टी50 का सबसे बड़े नुकसान वाला शेयर बनकर उभरा. शेयर दोपहर के कारोबार में लगभग 355 रुपये पर कारोबार कर रहे थे, जो दिन भर में 9.8 प्रतिशत की गिरावट है. हालांकि, कारोबार बंद होने तक इस कंपनी के शेयर 8.30% टूटकर 360 रुपये आ गए. इस गिरावट के कारण कंपनी का मार्केट कैप घटकर 1.45 लाख करोड़ रुपये पर आ गया.
क्यों गिरा टाटा मोटर्स पीवी शेयर?
टाटा मोटर्स की पैसेंजर के शेयरों में गिरावट तब आई, जब जगुआर लैंड रोवर (JLR) ने अपना नया बिजनेस अपडेट प्लान शेयर किया. टाटा मोटर्स की पैसेंजर व्हीकल की प्रमुख सहायक कंपनी जगुआर लैंड रोवर (JLR) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपना आउटलुक जारी किया. जिसके बाद शेयरों में भारी गिरावट आई. जेएलआर ने कहा कि उसे वित्त वर्ष 2027 में राजस्व में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जबकि EBITDA मार्जिन 4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2026 में शून्य से थोड़ा अधिक है. कंपनी को वित्त वर्ष 2027 में ऑपरेशनल कैश फ्लो के बराबर रहने की भी उम्मीद है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह निगेटिव 2.3 बिलियन पाउंड था.
जेएलआर ने कहा कि वह मिड टर्म में डबल डिजिट का रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य रख रही है और अपने सबसे बड़े मार्केट उत्तरी अमेरिका पर अधिक फोकस करते हुए अपने विकास एजेंडे को गति देगी. लग्जरी कार निर्माता ने वित्त वर्ष 29 तक 18 बिलियन पाउंड के निवेश की अपनी मौजूदा पांच साल की प्रतिबद्धता की जानकारी दी है.
डिफेंडर पर ज्यादा फोकस
जेएलआर ने कहा कि वह अमेरिकी बाजार में अपने ग्रोथ के लिए डिफेंडर ब्रांड पर ज्यादा फोकस करेगी. कंपनी ने कहा कि उसकी आकांक्षा अपने अमेरिकी कारोबार को अपने मौजूदा पूरे जेएलआर कारोबार के बराबर बढ़ाने का है.
कंपनी ने यह भी कहा कि जगुआर की नई लग्जरी चार-डोर जीटी-टाइप 01 को इस साल के अंत में लॉन्च किया जाएगा. जेएलआर ने कहा कि वह भारत और पश्चिम एशिया सहित भविष्य के उच्च क्षमता वाले बाजारों में निवेश और विकास करना जारी रखेगी.
टैरिफ का पड़ा असर
कंपनी ने कहा कि ट्रंप द्वारा टैरिफ लागू करने के कारण जेएलआर के फाइनेंशियल कंडीशन पर दबाव पड़ा है. खासकर इसलिए क्योंकि कंपनी के पास डिफेंडर और रेंज रोवर एसयूवी के खास अमेरिकी बाजार में स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग यूनिट नहीं है.
जेएलआर बाहरी चुनौतियों के बीच मार्जिन को बनाए रखने के लिए लागत कम करने और अधिक प्रीमियम कारें लॉन्च करने पर भी काम कर रही है. बता दें कि कंपनी के कमजोर टारगेट के कारण बुधवार को इसके शेयरों में गिरावट देखने को मिली.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)
आजतक बिजनेस डेस्क