मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है और महंगाई का खौफ दुनिया को डरा रहा है. दरअसल, ट्रंप कभी ईरान के साथ शांति समझौता पूरा होने का दावा करते नजर आते हैं, तो कभी धमकियां देते. इस बीच अमेरिकी सेना ने सोमवार को दक्षिणी ईरान में मिसाइल साइट्स और ईरानी जहाजों पर बड़ा हमला किया.
हालांकि, इसे ट्रंप की सेना ने आत्मरक्षा कार्रवाई बताया, लेकिन इस हमले ने दुनिया की कुल जरूरत के 20 फीसदी तेल-गैस की सप्लाई के लिए जरूरी होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को लेकर संकट और गहरा दिया है. इस अटैक का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा है और बीते कारोबारी दिन तेज गिरावट के बाद अचानक Crude Oil Price Surge देखने को मिला है.
US-Iran में अभी सब कुछ ठीक नहीं
अमेरिका और ईरान की बीच शांति समझौते पर सहमति बन नहीं पाई है और उस पर लंबे समय से बंद होर्मुज स्ट्रेट पर अटैक ने ग्लोबल टेंशन को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है. ईरान पर ताजा हमले को लेकर सेंटकॉम के प्रवक्ता ने बयान में कहा है कि ईरानी सेना की ओर से मिल रहे खतरे के सिग्नल से अपने सैनिकों की रक्षा के लिए साउथ ईरान में आत्मरक्षा हमले किए गए हैं, उन्होंने ईरानी सेना पर रणनीतिक जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने का आरोप लगाया है. अमेरिका के इस हमले से पूरे होर्मुज क्षेत्र में दहशत बढ़ गई है और इस जरूरी समुद्री रूट के आसपास कई विस्फोटों की खबरें भी आई हैं.
कच्चा तेल फिर से उछलने लगा
अमेरिका के हमले की खबर का सबसे पहला असर अंतरराष्ट्री बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला है. बीते कारोबारी दिन सोमवार को ये भरभराकर टूटती हुई नजर आई थीं, लेकिन मंगलवार को अचानक इनमें उथल-पुथल मची. खबर लिखे जाने तक Brent Crude Price करीब 3 फीसदी की तेजी के साथ 99 डॉलर के करीब ट्रेड करता नजर आया. राहत भरी बात ये है कि क्रूड अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे है. इस बीच WTI Crude में गिरावट जारी दिखी. US-Iran में तनाव बढ़ने के साथ ही कच्चे तेल में आए इस उछाल से महंगाई का खौफ फिर से गहराने लगा है.
दुनिया को डरा रहा क्रूड
अमेरिका-ईरान में युद्ध के बाद से ही क्रूड ऑयल दुनिया को डराने का काम कर रहा है. इसमें तेजी के बीच तमाम देशों में महंगाई की तगड़ी मार पड़ी है और खुद अमेरिका भी इससे अछूता नहीं रहा है. वहीं पाकिस्तान से लेकर ब्रिटेन, श्रीलंका, बांग्लादेश तक में पेट्रोल-डीजल पर महंगाई का बड़ा बम फूटा है. बात भारत की करें, तो होर्मुज बंद होने से पैदा हुए ग्लोबल एनर्जी संकट के बीच यहां बीते 15 मई को चार साल बाद पहली बार Petrol Diesel Price Hike किया गया था और इसके बाद से लगातार झटका लग रहा है. 12 दिन में चार बार ईंधन महंगा हुआ है.
बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों 1 डॉलर प्रति बैरल के इजाफे से भारत में पेट्रोल-डीजल 50-60 पैसे महंगा होने का खतरा रहता है. ऐसे में अगर इसकी कीमतों में और इजाफा होता है, तो फिर पेट्रोल-डीजल प्राइस हाइक का सिलसिला जारी रह सकता है.
आजतक बिजनेस डेस्क