वेस्‍ट एशिया संकट से देश पर पड़ेगा ये असर, RBI गवर्नर ने दी बड़ी चेतावनी

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने एक चेतावनी दी है. उन्‍होंने कहा कि स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज की बाधा और अल-निनो की वजह से महंगाई का खतरा बढ़ गया है. साथ ही आरबीआई ने जीडीपी को लेकर भी अनुमान कम कर दिया है.

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आरबीआई गवर्नर की बड़ी चेतावनी. (Photo: RBI) आरबीआई गवर्नर की बड़ी चेतावनी. (Photo: RBI)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 08 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:49 PM IST

वेस्‍ट एशिया संकट को लेकर आरबीआई गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने बड़ी चेतावनी दी है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मॉनेटरी पॉलिसी बैठक में कहा गया है कि आने वाले समय में महंगाई बढ़ने वाली है. साथ ही जीडीपी को लेकर भी चेतावनी दी है. हालांकि, आरबीआई ने राहत देते हुए रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है.

मिडिल ईस्‍ट में आए संकट का असर भारतीय नागरिकों पर कम करने के लिए रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर अनचेंज रखा है. बढ़ती ग्रोथ के साथ महंगाई को कंट्रोल में रखने के लिए आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया. इस बैठक में आरबीआई ने अपना रुख न्‍यूट्रल रखा है. 

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महंगाई को लेकर चेतावनी
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई अनुमान 4.6 फीसदी रखा है. वहीं वित्त वर्ष 2027 के लिए कोर महंगाई अनुमान 4.4 फीसदी किया है. वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए खुदरा महंगाई अनुमान बिना बदलाव के 4 फीसदी पर रखा है. वहीं,वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान 4.2 फीसदी से बढ़ाकर 4.4 फीसदी कर दिया है. इसी तरह वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान 4.7 फीसदी से बढ़ाकर 5.2 फीसदी किया गया है. 

जीडीपी ग्रोथ कम होने का अनुमान 
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.9 लगाया है, जो वित्त वर्ष 2026 के अनुमान 7.4 फीसदी से कम है.  वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में रीयल जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.8 फीसदी रखा है, जो पहले 6.9 फीसदी था. वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में रीयल GDP अनुमान 6.9 रखा है. 

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आरबीआई गवर्नर ने क्‍या दी चेतावनी? 
केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने अल नीनो की संभावित परिस्थितियों के उभरने की आशंका जताई है, जो भारत के महंगाई दर के लक्ष्‍यों के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं. साथ ही उन्‍होंने कहा कि तनाव के कारण एनर्जी कीमतों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी एक रिस्‍क के तौर पर उभरा है. हालांकि,  पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अब तक अपरिवर्तित रही हैं. खुदरा महंगाई फरवरी में बढ़कर 3.21 प्रतिशत हो गई, जो 11 महीनों में सबसे अधिक है. थोक कीमतें एक साल से अधिक समय में अपने उच्चतम स्तर 2.13 प्रतिशत पर पहुंच गईं. 

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