अडानी ग्रुप की आलोचना पर अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड (Special economic zone) लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अडानी ने कहा है कि इस मामले में किसी और पर दोष देने के बजाय हमें खुद अंदर की ओर झांकना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम बाजार और समाज को अपनी कहानी ठीक ढंग से नहीं बता पाए हैं. इस दिशा में हमें और काम करने की जरूरत है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हमारी एक फिलॉसफी यह भी है कि सिर झुकाकर अपना काम करते रहो और आस-पास से उठने वाली आवाजों को नजरअंदाज करो.
करण अडानी दिल्ली के ताज होटल में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में शिरकत कर रहे थे. यहां उन्होंने अडानी ग्रुप के प्रोजेक्ट, पश्चिम एशिया संकट, ग्रुप को लेकर बयानबाजी पर खुलकर बात की.
कार्यक्रम में जब उनसे पूछा गया कि यूं तो अडानी ग्रुप भारत का दिग्गज बिजनेस घराना है, फिर भी इसकी तीखी आलोचना होती है. इसकी वजह क्या है?
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इस प्रश्न का जवाब देते हुए करण अडानी ने कहा, "किसी और को दोष देने के बजाय हम खुद की ओर झांकना चाहेंगे. हमने क्या चीजें ठीक से नहीं की है. हम जब अपनी ओर देखते हैं तो पाते हैं कि हमने अपनी कहानी, अपना नजरिया लोगों को, बाजार को और सार्वजनिक मंचों पर ठीक ढंग से नहीं बताया है, इसलिए दूसरा नैरेटिव हावी हो जाता है. इसलिए अपनी कहानी बताने में हमें और कोशिश करनी होगी. यो तो पहली बात है."
अडानी ग्रुप की होने वाली आलोचनाओं पर खुलकर बात करते हुए अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अडानी ने आगे कहा कि दूसरी बात यह है कि हमारा फलसफा यह है कि सिर नीचे करके चलो और अपना काम करते रहो, आस-पास के शोर की चिंता नहीं करो. आगे उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि लेकिन एक सीमा के बाद इसे आप नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं क्योंकि तब यह भी समस्या बन जाती है. ये रणनीति एक लेवल तक ही काम करती है.
उन्होंने कहा कि बेसिक चीज यह है कि हमें अपनी कहानी को बताते रहना चाहिए. हम क्या कर रहे हैं, कैसे कर रहे हैं, समय पर प्रोजेक्ट डेलीवर कर रहे हैं, देश के लिए नए प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं. और आखिरकार ये सभी चीजें देश की संपत्ति हैं. ये अडानी ग्रुप द्वारा संपत्ति हासिल करने की बात नहीं है. हकीकत में ये देश की संपत्ति हैं.
एनर्जी के विकल्पों पर सोचना चाहिए
पश्चिम एशिया के संकट और भारत में एनर्जी संकट पर उन्होंने कहा कि जो हम आयात करते हैं वो प्रभावित हुई हैं. चाहे वह कच्चा तेल हो, एलपीजी या फिर अन्य गैस. उन्होंने कहा कि हमें एनर्जी में अल्टरनेटिव चीजों के बारे में सोचना चाहिए, जो हम इम्पोर्ट करते हैं, क्या हमारे पास कच्चा तेल का ऑप्शन है, क्या हमारे पास गैस का विकल्प है? इन चीजों के विकल्पों पर सोचना चाहिए और इसका आयात कम करने की कोशिश करनी चाहिए. करण अडानी ने कहा कि भारत के पास कोयला से लेकर खुद के क्रूड तक बहुत रिर्सोसेज मौजूद हैं.
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