सुप्रीम कोर्ट का दिवाला कानून पर अहम फैसला, कॉरपोरेट जगत के लिए बड़ा झटका!

सुप्रीम कोर्ट ने दिवाला और इन्सॉल्वेंसी कानून से जुड़े सरकार के एक नोटिफिकेशन को कानूनी तौर पर वैध करार दिया है. शीर्ष अदालत के इस फैसले से कॉरपोरेट जगत को बड़ा झटका लगा है. ये है पूरा मामला

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SC का दिवाला कानून पर बड़ा फैसला (File Photo : Aajtak) SC का दिवाला कानून पर बड़ा फैसला (File Photo : Aajtak)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 21 मई 2021,
  • अपडेटेड 6:19 PM IST
  • ‘चुनौती देने वाली करीब 75 याचिकाएं खारिज’
  • अनिल अंबानी, वधावन एवं अन्य ने दी थी चुनौती
  • बैंक प्रमोटर्स से वसूल सकेंगे फंसा हुआ कर्ज

देश की सर्वोच्च अदालत ने भारी लोन के बोझ से दबी कंपनियों के व्यक्तिगत गारंटर के खिलाफ बैंकों या वित्तीय संस्थानों के कार्रवाई करने को वैध करार दिया है. शीर्ष अदालत का ये फैसला कॉरपोरेट जगत के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि आम तौर पर IBC के तहत कार्रवाई का सामना करने वाली कंपनियों के व्यक्तिगत गारंटर उसके प्रमोटर ही होते हैं.

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सरकार का नोटिफिकेशन संवैधानिक
इस संबंध में सरकार ने ऋणशोधन एवं दिवाला संहिता (IBC) में एक प्रावधान किया था और इसके लिए 15 नवंबर 2019 को एक नोटिफिकेशन जारी किया था. मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सरकार के इस नोटिफिकेशन की संवैधानिकता को बरकरार रखा है.
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सरकार की अधिसूचना वैध और मान्य है. ये नोटिफिकेशन बैंकों को कर्ज के बोझ में दबी कंपनियों के व्यक्तिगत गारंटर और साझा प्रमोटर्स के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू करने की इजाजत देती है.

निजी गारंटरों से वसूला जा सकेगा ऋण
सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश बैंकों को दिवाला प्रक्रिया का सामना कर रही कंपनी के व्यक्तिगत गारंटर से बकाया कर्ज की वूसली का अधिकार देता है. इससे बैंकों को अपना फंसा कर्ज वसूलने में सहूलियत होगी, साथ ही उनका एनपीए का बोझ भी कम होने की उम्मीद है.

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दो जजों की पीठ ने सुनाया फैसला
जस्टिस एल. नागेश्वर राव और जस्टिस रविंद्र भट की पीठ ने ये फैसला सुनाया है. पीठ के इस फैसले के बाद बैंक या वित्तीय संस्थान व्यक्तिगत गारंटर से कर्ज वसूली की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे, भले उस कंपनी के खिलाफ चल रही दिवाला प्रक्रिया खत्म ना भी हुई हो.
सुनवाई के दौरान जस्टिस रविंद्र भट ने कहा, ‘‘किसी कॉरपोरेट कर्जधारक के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया के तहत रिजॉल्युशन प्लान मंजूर होना, उसके व्यक्तिगत गारंटर के उत्तरदायित्व को खत्म नहीं करता है.

चुनौती देने वाली 75 याचिकाओं का निस्तारण
सरकार के इस नोटिफिकेशन की वैधता को चुनौती देने के लिए करीब 75 याचिकाएं दायर की गई थीं. पीठ ने अपने फैसले में कहा कि वह सरकार के नोटिफिकेशन को बरकरार रख रही है और इसी के साथ इस संबंध में दायर सभी याचिकाओं को खारिज किया जाता है.

बड़े उद्योगपतियों ने दी थी चुनौती
सरकार की इस अधिसूचना के खिलाफ अनिल अंबानी, कपिल वधावन, संजय सिंघल और  वेणुगोपाल धूत जैसे कई अन्य उद्योगपतियों ने चुनौती दी थी. इस नोटिफिकेशन में सरकार ने IBC के व्यक्तिगत दिवाला प्रावधानों को प्रमोटरों के लिए भी बढ़ा दिया था.

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