शेयर बाजार में भारी गिरावट आने वाली है. एक रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है. द ग्लूम, बूम एंड डूम रिपोर्ट के लेखक और दिग्गज निवेशक मार्क फैबर का कहना है कि घरेलू शेयर बाजार में यहां से 20 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है. उनका मानना है कि भारत में मंदी की शुरुआत हो चुकी है.
बिजनेस स्टैंडर्ड को दिए इंटरव्यू में फैबर ने कहा कि आय अनुमान निराशाजनक हो सकते हैं और भारतीय बाजार में अभी सस्ते में स्टॉक नहीं मिल रहे हैं. अभी भी इन स्टॉक की वैल्यूवेशन काफी महंगी है. यह दावा तब किया जा रहा है, जब भारतीय बाजार का वैल्यूवेशन 2024 की तुलना में सस्ता है और चुनिंदा AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों के ग्लोबल इनकम अनुमान के अनुसार नहीं है.
भारतीय बाजार को लेकर ये चिंताएं ऐसे समय में आई हैं, जब पिछले हफ्ते बार्कलेज ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होने के बावजूद निवेशकों के पोर्टफोलियो में सबसे कम पसंद किए जाने वाला बाजार बताया था. फैबर का कहना है कि आजकल बाजार ग्लोबल लिक्विडिटी से ऑपरेट होते हैं, जो अभी भी बढ़ रही है, लेकिन पहले की तुलना में धीमी गति से.
उन्होंने कहा कि आमतौर पर, निवेश के बुलबुले या उन्माद में, आय का बहुत अधिक अनुमान लगाया जाता है. देर-सवेर, आय निराशाजनक साबित होने लगती है और शेयर बाजार में बहुत तेजी से गिरावट आती है. इस समय वास्तव में सस्ते शेयर मिलना मुश्किल है.
आंकड़ों से पता चलता है कि निफ्टी फॉरवर्ड अर्निंग्स के 19-19.5 गुना पर कारोबार कर रहा है, जो कोविड के बाद से नहीं देखा गया था. मार्च में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में अर्थव्यवस्था 7.7 प्रतिशत बढ़ी, जबकि अंतिम तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो रिजर्व बैंक और बाजार दोनों की उम्मीदों से अधिक थी.
इसके बावजूद, विदेशी निवेशकों ने 2026 के पहले पांच महीनों में भारतीय शेयरों की उतनी बिक्री की है जितनी 2025 में हुई थी. MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारत का वेटेज 2024 के उच्चतम स्तर 20 प्रतिशत से गिरकर 12 प्रतिशत से भी कम हो गया है. अब वैश्विक उभरते बाजारों के पोर्टफोलियो में भारत का भार सबसे कम है. बार्कलेज ने कहा कि बुनियादी तौर पर इस स्तर का अंतर अक्सर देखने को नहीं मिलता है.
फैबर भारत के लिए 20 प्रतिशत संभावित गिरावट की संभावना देखता है, वहीं एम्बिट कैपिटल का भी मानना है कि अर्निंग पर रिस्क दिख रहा है, क्योंकि भारत की EPS ग्रोथ उभरते बाजारों के समकक्षों से पीछे है, जबकि वैल्यूएशन पिछले बारह महीनों के पीई के 20 गुना पर महंगा बना हुआ है.
एम्बिट कैपिटल ने कहा कि दिसंबर 2024 से फाइनेंस इंडेक्स ने 49 अरब डॉलर निकाल लिए हैं, और जब तक विकास में तेजी नहीं आती या वैल्यूएशन में सुधार नहीं होता. नुवामा ने कहा कि भारत का मूल्यांकन अभी भी उच्च स्तर पर है - जीडीपी के मुकाबले बाजार पूंजीकरण 130 प्रतिशत है, जबकि 10 साल का औसत 100 प्रतिशत है, और औसत ट्रेलिंग पीई 30 गुना है.