वेस्ट एशिया में जंग और होर्मुज के बंद होने के कारण भारत समेत पूरी दुनिया में एनर्जी की स्थिति बिगड़ी है. कई देशों ने इस स्थिति में ईंधन की कीमतें अंधाधुंध तरीके से बढ़ाई हैं, लेकिन भारत में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है. मई से लेकर अभी तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें करीब 5 रुपये तक ही बढ़ाई गई हैं.
हालांकि, अब वो राज खुल गया है, जिससे ये पता चलता है कि ईंधन की कीमतें इतनी तेजी से क्यों नहीं बढ़ी? सरकारी सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने सरकारी तेल कंपनियों को एक बड़ा मुआवजा दिया है. यह मुआवज़ा पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज़ ड्यूटी में हुई बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर डालने के बजाय खुद उठाने के लिए दिया.
सरकारी सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज़ ड्यूटी में हुई बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर डालने के बजाय खुद उठाने के लिए OMCs को 78 दिनों में ₹1.23 लाख करोड़ का मुआवज़ा देने का सपोर्ट किया है.
अगर ये बढ़ोतरी नहीं की जाती, तो पेट्रोल और डीजल के दाम में तेज बढ़ोतरी हो सकती थी, जिससे महंगाई तेजी से बढ़ने का खतरा था. हालांकि, इस खबर के साथ ही एक खबर और आई है. ईंधन की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे भारतीय उपभोक्ताओं को आने वाले महीनों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि तेल की कीमतें कम हो सकती हैं. उनका कहना है कि कीमतें मौजूदा उच्च स्तर पर 'बहुत लंबे समय तक' रहने की संभावना नहीं है और आने वाले महीनों में इनमें कमी आने की उम्मीद है.
उनका ये बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान से जुड़े चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार दबाव में हैं, जिसने तेल और गैस की आपूर्ति को बाधित किया है और कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचा दिया है.