कैंसर से पीड़ित सुशील मोदी से मुलाकात करने पहुंचे तेजप्रताप, कहा- ये समाचार सुनकर मुझसे रहा नहीं गया

आरजेडी विधायक और लालू यादव के बेटे तेज प्रताप यादव शुक्रवार को पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी का हालचाल जानने के लिए उनके आवास पर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने सुशील मोदी की कुशलक्षेप पूछी.

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 तेज प्रताप यादव ने सुशील मोदी से मिलकर उनका हालचाल पूछा तेज प्रताप यादव ने सुशील मोदी से मिलकर उनका हालचाल पूछा

शशि भूषण कुमार

  • पटना,
  • 05 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 11:56 PM IST

आरजेडी विधायक और लालू यादव के बेटे तेज प्रताप यादव शुक्रवार को पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी का हालचाल जानने के लिए उनके आवास पर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने सुशील मोदी की कुशलक्षेप पूछी. तेज प्रताप यादव ने कहा कि हमें सोशल मीडिया के जरिए सुशील मोदी के स्वास्थ्य की जानकारी मिली थी, सुशील मोदी मेरे पिता लालू यादव के पुराने साथी रहे हैं. ऐसे में यह समाचार सुनकर मुझसे रहा नहीं गया, तो मैं मिलने आ गया. हम भगवान से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कीमना करते हैं.

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बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और पूर्व राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी कैंसर से जूझ रहे हैं. हाल ही में उन्होंने इसकी जानकारी एक्स पर पोस्ट कर दी थी. सुशील मोदी ने कहा था कि पीएम मोदी को बता दिया है कि मैं लोकसभा चुनाव में कुछ नहीं कर पाऊंगा.

सुशील मोदी बिहार की राजनीति में बड़ा नाम है. राज्य में उन्हें बीजेपी का बड़ा नेता माना जाता है. बीजेपी नेता सुशील मोदी लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं. हालांकि इस साल उन्हें राज्यसभा नहीं भेजा गया. उन्होंने 2004 के लोकसभा चुनाव में भागलपुर से जीत हासिल की थी, लेकिन बिहार में नीतीश के साथ सरकार बनाने के बाद उन्होंने संसद से इस्तीफा दे दिया था और फिर 2005 से 2013 तक बिहार सरकार में लगातार उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री बने रहे. उसके बाद नीतीश आरजेडी के साथ चले गए तो वह विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष भी बने. उसके बाद जब नीतीश कुमार ने एनडीए में वापसी की तो एक बार फिर वह डिप्टी सीएम बने.

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सुशील मोदी ने अपना राजनैतिक करियर पटना यूनिवर्सिटी से छात्र नेता के रूप में शुरू किया था. उसके बाद 1973 में वह पीयू छात्रसंघ महासचिव बने. उन्होंने 1974 में बिहार छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया था. जेपी आंदोलन और आपातकाल के दौरान उन्हें पांच बार गिरफ्तार किया गया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में MISA की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी, जिसके बाद MISA की धारा 9 को असंवैधानिक करार दिया गया था.

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