बिहार के वो 7 विधायक कौन हैं जो राज्यसभा की 5वीं सीट पर तय करेंगे जीत?

बिहार विधानसभा चुनाव से सिर्फ सत्ता का समीकरण ही नहीं बदला बल्कि राज्यसभा के चुनाव का गेम भी बदल दिया है. पांच राज्यसभा सीट के लिए चुनाव का ऐलान हो गया है, जिसमें चार सीटें एनडीए आसानी से जीत लेगी, लेकिन असल पेच पांचवी सीट का है. इस सीट की जीत और हार का फैसला सात विधायक तय करेंगे, जानिए ये कौन विधायक हैं?

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बिहार राज्यसभा चुनाव के किंगमेकर असदुद्दीन ओवैसी(Photo-ITG) बिहार राज्यसभा चुनाव के किंगमेकर असदुद्दीन ओवैसी(Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:20 PM IST

बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का ऐलान हो गया है. इसके साथ ही सियासी दांव पेच भी सेट किए जाने लगे हैं. विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक सीन बदल गया है. विधायकों की संख्या के आधार पर चार राज्यसभा सीटें आसानी से सत्तापक्ष यानी एनडीए जीत सकती है, लेकिन असल मुकाबला पांचवी सीट के लिए होना है. 

AIMIM प्रमख असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने बिहार की पांच विधानसभा सीटें जीतकर भले ही सत्ता की दशा और दिशा तय करने में अपना रोल अदा न कर सके हों, लेकिन राज्यसभा चुनाव के असल किंगमेकर बनकर उभरे हैं. इसके अलावा एक बसपा विधायक और एक विधायक आईपी गुप्ता हैं. इस तरह इन सातों विधायकों के समर्थन लिए बिना न ही एनडीए और न इंडिया ब्लॉक पांचवी राज्यसभा जीत सकती है? 

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बिहार की 5 राज्यसभा सीट पर चुनाव
बिहार की पांच राज्यसभा सीटें 9 अप्रैल 2026 को सीटें खाली हो रही हैं, जिसके लिए चुनाव आयोग ने 16 मार्च को चुनाव कराने का ऐलान कर दिया है. राज्यसभा की जिन सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उसमें आरजेडी के प्रेम चंद गुप्ता और एनडी सिंह हैं. जेडीयू कोटे से हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर जबकि बीजेपी के समर्थन से राज्यसभा सांसद बने आरएलएम के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल पूरा हो रहा है. इसके चलते ही पांच सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. 

2025 के विधानसभा चुनाव के बाद बिहार का सियासी गेम बदल गया है. इसके चलते पांचों राज्यसभा सीटों पर हो रहे राज्यसभा चुनाव के लिए नए सिरे से सियासी गणित तय होगा. राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए इस बार कम से कम 41 विधायकों का समर्थन जरूरी होगा. बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों को (5+1) से भाग देने पर यह संख्या निकलती है.

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समझें, राज्यसभा चुनाव में कौन पड़ेगा भारी

बिहार विधानसभा में 243 विधायक है, जिसमें से मौजूदा समय मे एनडीए के पास 202 विधायकों का आंकड़ा है जबकि इंडिया गठबन्धन के पास मात्र 35 विधायक हैं. इस लिहाज से एनडीए चार राज्यसभा सीटें आसानी से जीत लेगी, जिसके में दो सीटें बीजेपी और दो सीटें जेडीयू के खाते में जाती दिख रही हैं. 

एनडीए को 41 वोट के लिहाज से चार राज्यसभा सीटें जीत के लिए 164 विधायक ही लगेंगे. इसके बाद एनडीए के पास 38 सीटें बचेंगी और पांचवी सीट जीतने के लिए उसे तीन विधायकों का अतरिक्त समर्थन चाहिए होगा. वहीं, आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट दलों को मिलाकर इंडिया ब्लॉक के पास 35 विधायक हैं. ऐसे में महागठबंधन को एक सीट जीतने के लिए 6 अतरिक्त वोटों की जरूरत है. एनडीए कैसे तीन विधायकों का समर्थन जुटाएगी तो महागठबंधन कहां से 6 विधायकों को अपने साथ जोड़ेगी? 

राज्यसभा चुनाव में सात विधायकों पर नजर
बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से एनडीए के 202 और महागठबंधन के 35 विधायकों के बाद सात विधायक बचते हैं. इन सात विधायकों में पांच तो ओवैसी की पार्टी के हैं. इसके अलावा एक आईआईपी के विधायक आईपी गुप्ता हैं तो एक बसपा के विधायक हैं. पांचवी राज्यसभा सीट पर होने वाले सियासी संग्राम में ये सात विधायक अहम रोल अदा करेंगे. 

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एक सीट बसपा के पास, पांच सीटें AIMIM और एक सीट आईआईपी के पास है. ऐसे में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी किंगमेकर के रोल में है, जिसे भी समर्थन करेगी, उसकी जीत तय है. एनडीए अगर ओवैसी की पार्टी का समर्थन हासिल कर लेती है तो आसानी से पांचवीं राज्यसभा सीट भी जीत लेगी. 

वहीं, अगर विपक्ष गठबंधन इंडिया ब्लॉक समर्थन हासिल करने में सफल रहती है तो जीत आसान हो सकती है.इंडिया ब्लॉक के 35 विधायक, ओवैसी के पांच विधायक और एक बसपा विधायक का समर्थन हासिल कर पांचवीं सीट पर जीत दर्ज कर सकती है, लेकिन उसके लिए ओवैसी की पार्टी और बसपा विधायक का समर्थन जुटाना होगा. 

बिहारइन सात विधायकों के समर्थन के बिना न ही एनडीए और न ही इंडिया ब्लॉक पांचवीं राज्यसभा सीट जीत सकती है. एनडीए को पांचवीं सीट जीतने के लिए इन सात विधायकों में से सिर्फ तीन का समर्थन जुटना है जबकि महागठबंधन को छह विधायकों को समर्थन बनाए रखना है. ऐसे में सियासी दांव पेच खेले जा रहे हैं. 

आईपी गुप्ता-ओवैसी के बीच पकती खिचड़ी
AIMIM के स्थापना दिवस पर आईआईपी वाले आईपी गुप्ता ने हैदराबाद पहुंचे थे और असदुद्दीन ओवैसी के साथ मंच पर नजर आए.  माना जाता है कि तेजस्वी यादव ने आईपी गुप्ता के जरिए ओवैसी को मैसेज भेजवाया है, रिप्लाई अभी वेटिंग में है. वहीं, मायावती की ओर से भी अब तक हरी झंडी नहीं मिली है. 

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आईपी गुप्ता से इंडिया टुडे से बातचीत में खुद स्वीकार किया है कि वो दो मकसद से हैदराबाद गए थे. पहला यह कि ओवैसी साहब तांती, ततवा और पान समाज के सवाल को सदन में उठाएं. दूसरा यह कि मैं  AIMIM को महागठबंधन के करीब लाना चाहता हूं, ताकि राज्यसभा चुनाव में इसका लाभ महागठबंधन को मिल सके. 

हालांकि, AIMIM को महागठबंधन के साथ लाना इतना आसान नहीं है, क्योंकि चुनाव के दौरान ओवैसी की महागठबंधन में आने की तमाम कोशिशें नाकाम रही हैं. ऐसे में राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के साथ उनके जाने पर सस्पेंस है. माना जा रहा है कि ओवैसी बिहार राज्यसभा चुनाव में अपना दांव खुद चल सकते हैं. इसके लिए AIMIM अपना कैंडिडेट उतारने की बात कर रहा है. ऐसे में आईपी गुप्ता पाला बदलकर AIMIM के साथ गठजोड़ कर सकते हैं?

जेडीयू के दांव से तेजस्वी की 'अग्निपरीक्षा'
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के लिए राज्यसभा किसी 'अग्निपरीक्षा' से कम नहीं हैं. बिहार विधानसभा चुनाव में करारी मात खाने के बाद तेजस्वी यादव एक राज्यसभा सीट जीतकर अपनी सियासी लाज बचा सकते हैं, लेकिन उसके लिए पूरे विपक्ष का समर्थन जुटाना होगा. महागठबंधन को एकजुट रखने और ओवैसी की चुनौती से निपटने की दोहरी जिम्मेदारी का सामना करना तेजस्वी को पड़ रहा है.

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 वहीं, AIMIM के विधायकों की नजदीकियां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी बढ़ रही है. पिछले दिनों ओवैसी के विधायकों ने मुख्यमंत्री नीतीश से मुलाकात की थी . इसके अलावा AIMIM के ज्यादातर विधायकों का सियासी बैकग्राउठ जेडीयू का रहा है. जेडीयू नेता अशोक चौधरी ने सभी पांच सीट जीतने का दावा कर रही हैं. AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक अख़्तरूल ईमान बिहार में खुद राज्यसभा में अपना उम्मीदवार उतारने की बात कर रहे हैं. ऐसे में सियासी शह-मात का खेल शुरू हो चुका है और अब देखना है कि सूबे में पांचवीं राज्यसभा सीट पर किसका कब्जा होता है. 

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