बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने दावा किया है कि राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई पहले की तुलना में तेज हुई है. ब्यूरो के मुताबिक, पिछले 25 वर्षों की तुलना में वर्ष 2025 में आरोपियों को सजा दिलाने की रफ्तार करीब पांच गुना बढ़ी है.
बिहार सतर्कता जागरूकता सप्ताह के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता में निगरानी ब्यूरो के महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि वर्ष 2000 से 2024 के बीच औसतन हर साल 5.6 आरोपियों को सजा दिलाई गई थी. वहीं, विभाग के अनुसार 2025 में 30 आरोपियों को सजा दिलाई गई. उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक 10 मामलों में सजा हो चुकी है.
महानिदेशक ने यह भी दावा किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में एफआईआर दर्ज होने की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है. उनके अनुसार, पिछले 25 वर्षों में औसतन 72 एफआईआर हर साल दर्ज होती थीं, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 122 हो गई. इस वर्ष मामलों के दर्ज होने की रफ्तार पिछले साल से भी अधिक रहने का दावा किया गया.
निगरानी ब्यूरो के मुताबिक, ट्रैप मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. विभाग का कहना है कि जहां पहले औसतन 49 ट्रैप केस हर साल होते थे, वहीं 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 101 हो गई.
डीजी ने बताया कि भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति के मामलों में भी कार्रवाई जारी है. उनके अनुसार, अब तक 102 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जबकि 32 करोड़ रुपये की संपत्ति अंतिम रूप से जब्त की जा चुकी है.
ब्यूरो के अनुसार हर जिले में निगरानी थाना या ओपी और प्रत्येक प्रमंडल में क्षेत्रीय कार्यालय खोलने का प्रस्ताव भी तैयार किया है. इसके अलावा, राज्य में निगरानी अदालतों की संख्या बढ़ाने की जरूरत भी बताई गई.
गौरतलब है कि विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक कार्रवाई राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों के खिलाफ की गई. इसके बाद पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग का स्थान रहा.
कार्यक्रम के दौरान महानिदेशक ने शिक्षक नियोजन से जुड़ी जांच का भी जिक्र किया. उनके अनुसार, वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त करीब 3.5 लाख शिक्षकों के 6.7 लाख प्रमाणपत्रों की जांच की जा चुकी है, जिसके आधार पर अब तक 1830 एफआईआर दर्ज की गई हैं.
रोहित कुमार सिंह