Maruti Wagon R Flex Fuel: देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने आज घरेलू बाजार में अपनी पहली फ्लेक्स फ्यूल कार (Wagon R Flex Fuel) को पेश किया है. केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज दिल्ली में आयोजित एक इवेंट में इस नई कार को लॉन्च किया. इस मौके पर मारुति सुजकी के अधिकारियों के साथ केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद रहे. ख़ास बात ये है कि, मारुति की ये नई कार हायर इथेनॉल ब्लेंडिंग पर भी आसानी से दौड़ सकती है.
इस मौके पर नितिन गडकरी ने कहा कि, देश में बढ़ते पॉल्यूशन के पीछे ऑटोमोटिव इंडस्ट्री का बड़ा हाथ है. तकरीबन 40% प्रदूषण वाहनों से होता है. ऐसे में क्लीन फ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ाना बेहद जरूरी है. मारुति सुजुकी की ये नई कार इस दिशा में एक बड़ा कदम है. उन्होंने कहा कि, आने वाले समय में वैकल्पिक फ्यूल का इस्तेमाल बढ़ेगा.
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि E85 ईंधन "जल्द ही" पेश किया जाएगा, और इसकी कीमत E20 पेट्रोल से काफी कम होगी, जो कि अभी मौजूदा मानक है. यानी आने वाले समय में जब पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा को बढ़ाया जाएगा. तो पेट्रोल की कीमत कम होने की उम्मीद है.
मारुति सुजुकी ने पिछले ऑटो एक्सपो में अपनी वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल कॉन्सेप्ट को शोकेस किया था. कॉन्सेप्ट मॉडल का लुक और डिज़ाइन बिल्कुल रेगुलर मॉडल जैसा ही था. लेकिन कंपनी ने इस कार के इंजन मैकेनिज़्म में कुछ बदलाव किए जाने की बात कही थी. ताकि ये कार E20 से लेकर E85 इथेनॉल ब्लेंड पेट्रोल पर भी आसानी से दौड़ सकती है.
मारुति सुजुकी लंबे समय से फ्लेक्स-फ्यूल तकनीकी पर काम कर रही थी. कंपनी ने पिछले साल जापान मोबिलिटी एक्सपो (Japan Motor Show 2025) के दौरान अपनी Fornx E-100 को शोकेस किया था. ये कार 100 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग पर भी चल सकती है.
बीते दिन हीरो मोटोकॉर्प ने अपनी पहली फ्लेक्स फ्यूल बाइक रेंज Splendor Plus और HF Deluxe को लॉन्च किया था. इन दोनों बाइक्स के इंजन और मैकेनिज़्म में तकरीबन 39 बदलाव किए गए हैं. कंपनी का दावा है कि, ये दोनों बाइक्स E85 इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर आसानी से चल सकती है. दिलचस्प बात ये है कि, इथेनॉल कंप्लायंट इंजन होने के बावजूद इन दोनों बाइक्स का पावर आउटपुट बढ़ा है.
फ्लेक्स फ्यूल एक ऐसी तकनीक है जिसमें वाहन का इंजन पेट्रोल और इथेनॉल (Ethanol) के अलग-अलग मिश्रण वाले फ्यूल पर चल सकता है. आमतौर पर फ्लेक्स फ्यूल वाहन E20 (20% एथेनॉल), E85 (85% एथेनॉल) या इनके बीच के किसी भी ब्लेंडिंग पर आसानी से दौड़ सकते हैं. वाहन में लगे सेंसर ईंधन में एथेनॉल की मात्रा को पहचानकर इंजन की सेटिंग अपने आप एडजेस्ट कर देते हैं, जिससे परफॉर्मेंस प्रभावित नहीं होता.
फ्लेक्स फ्यूल का सबसे बड़ा फायदा ये है कि, हायर ब्लेंडेड फ्यूल के इस्तेमाल के चलत वाहनों के इंजन और अन्य कंपोनेंट पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है. जैसा कि, सरकार आने वाले समय में देश में पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर विचार कर रही है. इन वाहनों में यदि E85 ग्रेड का पेट्रोल भी इस्तेमाल किया जाएगा तो इससे परफॉर्मेंस या मेंटनेंस पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और गन्ने, मक्का जैसी फसलों से बनने वाले इथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा देना है. इससे फ्यूल इंपोर्ट पर खर्च कम करने और पर्यावरण को बेहतर बनाने में भी मदद मिलती है.
अश्विन सत्यदेव