Central excise duty on CNG: खेत में बची पराली, शहर का कूड़ा और उससे बनी बायोगैस अब सिर्फ पर्यावरण की बात नहीं रह गई है. बजट के मंच से सरकार ने तय कर दिया है कि बायोगैस वाली सीएनजी (Bio-CNG Mix) पर टैक्स का बोझ नहीं पड़ेगा. मतलब ये कि, गाड़ी चलाते वक्त जेब भी कम ढिली होगी और हवा भी थोड़ी साफ होगी. इस बार के बजट की यही वो ख़ास बात है जो आम आदमी तक सीधे पहुंचती हुई नज़र आ रही है.
आज संसद में अपना नौंवा बजट पेश कर रही केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि, अब बायोगैस मिक्स सीएनजी पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क यानी सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी का कैल्कुलेशन करते समय बायोगैस के पूरे प्राइस को बाहर रखा जाएगा. इसका सीधा फायदा यह होगा कि बायोगैस वाली सीएनजी सस्ती होगी और उस पर टैक्स का बोझ कम पड़ेगा. इससे पहले बायोगैस के प्राइस को भी शामिल किया जाता था.
बायोगैस खेतों के कचरे, फसल के वेस्टेज और कूड़े इत्यादि से तैयार की जाती है. इसे रेगुलर सीएनजी में मिलाकर एक कम कार्बन वाला फ्यूल बनाया जाता है. यह फ्यूल धीरे-धीरे ऑटोमोबाइल सेक्टर में अपनी जगह बना रहा है. कई ऐसी वाहन निर्माता कंपनियां हैं, जो इस तरह के फ्यूल पर चलने वाले वाहनों को तेजी से बाजार में उतार रही हैं. सरकार का मानना है कि इससे पर्यावरण को नुकसान कम होगा और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा मिलेगा.
साल 2023 में सरकार ने बायोगैस को लेकर आंशिक राहत दी थी. उस समय केवल बायोगैस पर दिए गए जीएसटी को ही एक्साइज ड्यूटी से घटाया जाता था. लेकिन बायोगैस के पूरे मूल्य पर छूट नहीं मिलती थी. इसकी वजह से टैक्स का दोहरा असर बना रहता था. फिलहाल रेगुलर सीएनजी पर करीब 14 प्रतिशत सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी लगती है. इसका मतलब है कि प्रति किलो सीएनजी पर लगभग 14 से 15 रुपये टैक्स के रूप में जुड़ जाते हैं. पुराने नियमों में बायोगैस मिक्स सीएनजी पर भी बायोगैस वाले हिस्से पर करीब 9 प्रतिशत तक टैक्स का बोझ बना रहता था.
आज हुए नए ऐलान के बाद बायोगैस के पूरे मूल्य पर एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह खत्म हो जाएगी. इससे सीएनजी की कीमत में प्रति किलो कुछ रुपये की कमी आ सकती है. ख़ास बात ये है कि, यह राहत सीधे यूजर्स तक पहुंचेगी. इस फैसले से सीएनजी से चलने वाले ट्रक, कार और तीन पहिया वाहन चलाने वालों की लागत घटेगी. खासकर कमर्शियल वाहन ऑपरेटरों को डीजल के मुकाबले सस्ता विकल्प मिलेगा. सरकार का यह कदम न केवल किफायती बायोगैस सीएनजी उपलब्ध कराएगा, बल्कि ऑयल इंपोर्ट पर भी निर्भरता को कम करेगा.
अश्विन सत्यदेव