रथयात्रा आज... जानिए कौन हैं पुरी के राजा जो रथों पर लगाते हैं झाड़ू?

ओडिशा की जगन्नाथ रथ यात्रा एक महीने तक चलने वाला प्रमुख धार्मिक उत्सव है जो स्नान पूर्णिमा से शुरू होकर नीलाद्रि बिजै तक चलता है. पुरी के राजा गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव यादव इस उत्सव में सोने की झाड़ू से रथ मार्ग की सफाई करते हैं, जिसे छेरा पहरा कहा जाता है.

Advertisement
पुरी के राजा गजपति महाराज दिब्यसिंह देब रथयात्रा की अहम प्रक्रिया में शामिल होते हैं पुरी के राजा गजपति महाराज दिब्यसिंह देब रथयात्रा की अहम प्रक्रिया में शामिल होते हैं

विकास पोरवाल

  • नई दिल्ली,
  • 16 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:52 AM IST

ओडिशा की विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा आज से शुरू हो रही है. आमतौर पर रथयात्रा को सिर्फ एक दिवसीय उत्सव समझा जाता है. लेकिन असल में यह लगभग एक महीने का बहुत बड़ा उत्सव है जो अपनी शुरुआत के दसवें दिन 'बहुदा यात्रा' यानी भगवान जगन्नाथ की वापसी यात्रा के साथ समाप्त होता है. यानी इसकी शुरुआत स्नान पूर्णिमा (जेठ महीने की पूर्णिमा) से होती है और फिर 'नीलाद्रि बिजै' के साथ समाप्त होती है.  

Advertisement

रथयात्रा वह उत्सव है जब भगवान अपने भक्तों के बीच होते हैं और इस दौरान न कोई राजा रह जाता है और न ही कोई रंक. यहां तक कि पुरी के राजा, जिन्हें गजपति की उपाधि से भी जाना जाता है, वह इस दौरान यहां पहुंचते हैं और सोने की मूठ वाली झाड़ू से रथ और रथ मार्ग बुहारते हैं. सोने की मूठ वाली झाड़ू से मार्ग बुहारने की इस प्रक्रिया को 'छेरा पहरा' नाम से जाना जाता है. 

सोना एक पवित्र धातु है, जिसे लक्ष्मी माना जाता है और झाड़ू को भी देवी लक्ष्मी का ही स्वरूप कहते हैं. झाड़ू सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होती है, जो सिर्फ गंदगी ही नहीं बल्कि नकारात्मकता को भी बुहार देती है. पुरी के वंशज राजा ही यह झाड़ू लगाते आ रहे हैं. 

कौन हैं पुरी के राजा?

Advertisement

पुरी के वर्तमान 'राजा' गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव यादव हैं. वह भगवान जगन्नाथ के प्रथम सेवक हैं और लोग उन्हें भगवान श्री जगन्नाथ जी का ही आदेश प्रतिरूप भी मानते हैं. गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव यादव जी रथ यात्रा से पूर्व सोने की झाडू लगा कर भगवान जगन्नाथ जी की सेवा करते हैं. वर्तमान में वह पुरी के राजा हैं और मंदिर समिति के अध्यक्ष की पारंपरिक भूमिका को भी निभा रहे हैं. 

क्या है पुरी के वर्तमान राजा का इतिहास?

पुरी के राजा, दिव्यसिंह देव, भोई राजवंश के वर्तमान मुखिया हैं और उन्हें गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव चतुर्थ के नाम से भी जाना जाता है. उनका राजवंश, भोई वंश, प्राचीन त्रिकलिंग क्षेत्र (कलिंग, उत्कल, दक्षिण कोशल) के वंशानुगत शासकों से निकला हुआ है. 

17 साल की उम्र पर सिंहासन पर बैठे

गजपति महाराज दिव्यसिंह देव का राजवंश, भोई वंश है, लेकिन गजपति उपाधि का इतिहास पूर्वी गंग वंश से संबंधित है और 12वीं शताब्दी से जगन्नाथ मंदिर से जुड़ा हुआ है. यह राजवंश "उत्कल" क्षेत्र (वर्तमान ओडिशा) में शासन करता था. दिव्यसिंह देब, गजपति महाराजा बीरकिशोर देव के पुत्र हैं और 1970 में अपने पिता की मृत्यु के बाद 17 साल की उम्र में सिंहासन पर बैठे थे. गजपति, ओडिशा में पुरी के राजा द्वारा धारण की गई एक उपाधि है. 
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »