दिल्ली का जिमखाना क्लब चर्चा में है. केंद्र सरकार की ओर से आए एक आदेश के अनुसार 113 साल की ऐतिहासिक विरासत को खुद में समेटे इस क्लब को ये जगह और जमीन खाली करनी है. आदेश पर पांच जून तक अमल करना है.
इस आदेश के बाद जिमखाना क्लब के इतिहास और इससे जुड़े किस्सों को लोग याद कर रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे 'जिमखाना क्लब' क्यों कहा जाता है और इसका ये नाम कैसे पड़ा है? इसके साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि 'जिमखाना' का असली अर्थ क्या है?
असल में जिमखाना क्लब से जुड़ी चर्चाएं हो रही हैं तो इसे 'Gymkhana' लिखा जा रहा है. बल्कि दिल्ली में भी कई जगहों पर लगे बोर्ड में इसे ऐसे ही लिखा गया है. जबकि इसका Gym एक्टिविटी से कोई लेना-देना नहीं है.
कैसे बना जिमखाना?
इस मामले में भाषाविदों और इतिहासकारों का मानना है कि यह शब्द मूल रूप से फारसी और हिंदी शब्द ‘गेंदखाना’ या जमातखाना से निकलकर आया है. गेंदखाना का मतलब है वह जगह जहां गेंद के खेल खेले जाते हों और ‘जमातखाना’ का मतलब जहां लोग जुटते हों, सभाएं करते हों, साथ खाते-पीते हों. अंग्रेज कई भारतीय और फारसी शब्दों की तरह इसे भी अपनी जुबान से ठीक से उच्चारण नहीं कर पाए फिर उसे 'जिमखाना' कहने लगे.
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जीमना शब्द से निकला है जीमखाना
'जिमखाना' के अर्थ को समझने के लिए इसके मूल शब्दों की ओर सफर करें तो यहां भारतीय इलाकों में ही देशज शब्द मिलता है 'जीमना'. जीमना शब्द के भारतीय भाषाई और सांस्कृतिक परंपरा में बहुत दिलचस्प मायने हैं. हिंदी, राजस्थानी, ब्रज और कई उत्तर भारतीय बोलियों में 'जीमना' का अर्थ होता है- भोजन करना या सामूहिक रूप से भोजन ग्रहण करना. इसे 'पंगत' बैठने के अर्थ से भी समझ सकते हैं. गांवों और पारंपरिक समाज में आज भी 'पंगत जीमना', 'भोज जीमना' या 'मेहमानों को जीमाना' जैसे प्रयोग सुनने को मिलते हैं.
अवधी में 'ज्योनार और जेवनार' शब्द भी मिलते हैं. मालवा में भी 'जेवन' शब्द इसी अर्थ के रूप में मौजूद है. यही आगे चलकर 'जेमन', 'जीमन' और फिर 'जीमना' जैसे रूप विकसित हुए. इसी ‘जीम’ शब्द से आगे चलकर अंग्रेजी शासनकाल में एक नया शब्द बना- 'जीमखाना'. अंग्रेजी में इसका संबंध खेल क्लबों से माना जाता है, लेकिन भारत में इसकी जड़ें औपनिवेशिक दौर से जुड़ी हैं.
माना जाता है कि अंग्रेज अधिकारियों ने भारतीय शब्द 'जीमखाना' को अपनाया, जहां 'जिम' का अर्थ खेल-कूद और 'खाना' का अर्थ सभा या स्थान से जोड़ा गया. ब्रिटिश काल में जीमखाना ऐसे क्लब होते थे जहां अंग्रेज अधिकारी घुड़सवारी, पोलो, क्रिकेट, टेनिस और सामाजिक मेल-मिलाप करते थे. दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और कानपुर के पुराने जीमखाना क्लब आज भी औपनिवेशिक इतिहास और भारतीय सामाजिक संस्कृति की मिलीजुली विरासत को सामने रखते हैं.
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2 जुलाई 1913 को हुई थी दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना
2 जुलाई 1913 को राजधानी दिल्ली में 'इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब' स्थापित किया गया था. इसके पहले चीफ स्पेंसर हरकोर्ट बटलर थे. क्लब की स्थापना में सात प्रमुख रियासतों के शासकों ने अहम भूमिका निभाई, इनमें ग्वालियर, जयपुर, जोधपुर, कश्मीर, उदयपुर, किशनगढ़ और भोपाल के नवाब शामिल थे, इन सभी को क्लब का आजीवन सदस्य बनाया गया. शुरुआती दिनों में यह क्लब मुख्य रूप से नई राजधानी की सैन्य छावनी के अधिकारियों के लिए बनाया गया था. किंग्सवे कैंप के पास स्थित पोलो ग्राउंड उन दिनों क्लब के लॉन का ही विस्तार था, जो 1930 के दशक में जाकर एक अलग इकाई बना.
विकास पोरवाल