शनि ग्रह (Saturn) ने कोई 10 करोड़ साल पहले, जब पृथ्वी पर डायनासोर घूमते थे. तब अपने एक बर्फीले चंद्रमा (Icy Moon) की हत्या कर दी थी. ये हत्या यानी चांद का खात्मा सिर्फ इसलिए किया गया था, ताकि शनि अपने चारों तरफ घने छल्ले बना सके. समझ में ये नहीं आता कि कई ग्रह बिना छल्लों के हैं. ऐसे में शनि ग्रह को इन छल्लों का
इस बात को लेकर दो दिन पहले यानी 15 सितंबर 2022 को जर्नल में एक स्टडी रिपोर्ट प्रकाशित हुई है. जिसमें कहा गया है कि करीब 10 करोड़ साल पहले शनि ग्रह ने अपने गुरुत्वाकर्षण शक्ति से एक बर्फीले चंद्रमा को जोर से अपनी ओर खींचा. शनि से टकराकर चंद्रमा के टुकड़े-टुकड़े हो गए. टकराहट से वापस शनि के चारों तरफ अंतरिक्ष में फैल गए और खूबसूरत छल्लों में बदल गए.

नई स्टडी में यह भी बताया गया है कि इन छल्लों के बनने की वजह है टाइटन (Titan) के बाहर की तरफ जाने की आदत, शनि ग्रह और नेपच्यून की कक्षाओं में मूवमेंट की वजह से पैदा होने वाली तरंगें. दशकों पहले शनि ग्रह के छल्लों को लेकर बहस छिड़ी. कुछ वैज्ञानिकों का मानना था कि ये छल्ले ग्रह के साथ ही बने थे.
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के स्कॉट ट्रेमेन और काल्टेक (Caltech) के पीटर गोल्डरीच ने 1980 के शुरुआत में कहा था कि शनि ग्रह की तुलना में उसके छल्ले 10 करोड़ साल युवा हैं. कई बार इन छल्लों की बर्फ और पत्थर आपस में टकराते हैं. शनि ग्रह से टकराते हैं.

साल 2017 में NASA के कैसिनी (Cassini Mission) ने शनि ग्रह से टकराने से पहले कई जरूरी जानकारियां भेजी हैं. अंतरिक्षयान के कॉस्मिक डस्ट एनालाइज़र (Cosmic Dust Analyzer) ने यह बताया था कि कैसे शनि ग्रह से उड़ने वाली धूल छल्लों में आती है. इससे छल्लों में लगातार घनत्व बढ़ रहा है. लेकिन छल्ले का एक फीसदी हिस्सा ही धूल से बना है. यानी छल्ले 10 करोड़ साल पुराने हैं.
MIT के जैक विस्डम की नई रिसर्च के मुताबिक इसके पीछे फिजिकल मैकेनिज्म शामिल हैं. क्योंकि शनि के अपनी धुरी पर घूमना. उसका हल्का टेढ़ा होना. फिर उसके सबसे बड़े चांद टाइटन का ग्रह की तरफ खिंचना और दूर जाना. शनि ग्रह सौर मंडल के प्लेन पर 26.7 डिग्री कोण पर घूमा हुआ है. इन्हीं वजहों से यह अंदाजा लगता है कि शनि ग्रह ने अपने चांद को खींचकर नष्ट किया होगा. और उससे उड़ने वाली धूल और पत्थर, बर्फ सब मिलकर छल्ले बन गए.
Saturn may have destroyed one of its moons to make its rings
— SPACE.com (@SPACEdotcom)
जैक विस्डम कहते हैं कि शनि ग्रह और नेपच्यून के बीच हो रहे ऑर्बिटल रेसोनेंस (Orbital Resonance) की वजह से काफी ज्यादा असंतुलन है. इसकी वजह से वहां मौजूद कोई चंद्रमा या उपग्रह अपनी स्थिति से छूट गया होगा. अपनी दिशा और कक्षा से निकल कर वह शनि ग्रह से टकराया होगा. या फिर गुरुत्वाकर्षण में हो रहे बदलाव की वजह से नष्ट हो गया होगा. इस चंद्रमा का नाम वैज्ञानिकों ने क्राइसैलिस (Chrysalis) कहते हैं.