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थिंक टैंक का दावा- भारत में तेजी से बढ़ेगी लोकेशन आधारित सेवाओं की इंडस्ट्री

टेक्नोलॉजी लगातार बदल रही है. जिस चीज के लिए पहले आपको कई किलोमीटर दूर जाना होता था, आज वो एक बटन के क्लिक पर आपके घर आ रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह है जियोस्पेशियल तकनीक (Geospatial Technology). आप घर बैठे कैब बुला लेते हैं. खाना ऑर्डर कर देते हैं. कपड़े खरीद लेते हैं. कभी सोचा है कि वो आपके घर तक कैसे आता है...ये सब संभव है जियोस्पेशियल तकनीक की बदौलत.

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जियोस्मार्ट इंडिया कार्यक्रम में 'जियोस्पेशियल अर्थ रिपोर्ट' को लॉन्च करते पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. किरण कुमार. (फोटोः जियोस्मार्ट इंडिया)
जियोस्मार्ट इंडिया कार्यक्रम में 'जियोस्पेशियल अर्थ रिपोर्ट' को लॉन्च करते पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. किरण कुमार. (फोटोः जियोस्मार्ट इंडिया)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • साल 2025 तक 12.8% की विकास दर से 63 हजार करोड़ की हो जाएगी जियोस्पेशियल इंडस्ट्री.
  • अभी 4.70 लाख लोग काम करते हैं इसमें, तब 9.50 लाख लोग करने लगेंगे काम.
  • भारत सरकार की नीतियों से मिला उद्योग को फायदा, आगे और ग्रोथ की उम्मीद.

टेक्नोलॉजी लगातार बदल रही है. जिस चीज के लिए पहले आपको कई किलोमीटर दूर जाना होता था, आज वो एक बटन के क्लिक पर आपके घर आ रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह है जियोस्पेशियल तकनीक (Geospatial Technology). आप घर बैठे कैब बुला लेते हैं. खाना ऑर्डर कर देते हैं. कपड़े खरीद लेते हैं. कभी सोचा है कि वो आपके घर तक कैसे आता है...ये सब संभव है जियोस्पेशियल तकनीक की बदौलत. भारत में कुछ साल पहले तक इस इंडस्ट्री पर चर्चा भी नहीं होती थी. इसका बाजार भी कम था. लेकिन पिछले चार-पांच सालों में यह काफी तेजी से बढ़ा है. साल 2025 तक इस बाजार में 12.8 फीसदी की बढ़ोतरी होगी. यानी करीब 63 हजार करोड़ रुपयों की. 

देश-दुनिया का नक्शा बदल देगी जियोस्पेशियल इंडस्ट्रीः डॉ. किरण कुमार

हैदराबाद में हो चल रहे जियोस्मार्ट इंडिया 2021 (GeoSmart India-2021) पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. किरण कुमार ने कहा कि जियोस्पेशियल इंडस्ट्री अगले कुछ सालों में दुनिया ही नहीं देश में भी बहुत बड़े बदलाव लेकर आएगी. भारत में इस तकनीक को लेकर जिस तरह से काम चल रहा है, उससे कई तरह का आधुनिक बदलाव होंगे. साथ ही पर्यावरण को बचाने पर भी ध्यान दिया जा सकेगा. हम इन तकनीकों का उपयोग करके अपनी प्राकृतिक संसाधनों, इंसानों, पर्यावरण और जीवों को बचा सकते हैं. जियोस्पेशियल इंडस्ट्री की मदद से सेवाएं, कृषि, मौसम, रक्षा, ढांचागत विकास की गुणवत्ता बढ़ेगी. समय की बचत होगी. सटीक स्तर का सर्वे होगा तो काम आसान होगा. 

भारत अगले साल तीन जियोस्पेशियल नीतियां लागू करेगाः अमित खरे

इस मौके पर मौजूद प्रधानमंत्री के सलाहकार अमित खरे ने कहा कि जियोस्पेशियल इंडस्ट्री ने भारत में इतने सकारात्मक बदलाव किए हैं जो सराहनीय है. सबसे बड़ा उदाहरण है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की स्वामित्व योजना. जिसमें जियोस्पेशियल तकनीकों की मदद से गांव-गांव की जमीनों का नक्शा बनाकर उसके असली मालिक को उसका टाइटल दिया जा रहा है. इसमें मदद कौन कर रहा है...हमारी जियोस्पेशियल इंडस्ट्री. कोरोना काल में जियोस्पेशियल तकनीक की वजह से ही कोरोना वैक्सीनेशन का मिशन पूरा हो पाया है. सही समय पर लोगों के पास तक कोरोना की वैक्सीन पहुंच पाई है. भारत सरकार साल 2022 तक तीन जियोस्पेशियल पॉलिसी लागू करेगी. अभी इनका ड्राफ्ट तैयार हो रहा है. अमित खरे ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि एक साल के अंदर यह इंडस्ट्री दोगुना विकास करेगी. 

इंडस्ट्री सरकार और साथियों के साथ मिलकर बढ़ेगी, रोजगार भी बढ़ेगाः संजय कुमार

जियोस्पेशियल अर्थ रिपोर्टः इंडियन जियोस्पेशियल मार्केट, इकोनॉमी एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट स्ट्रैटेजी (Geospatial Artha report: Indian Geospatial Market, Economy, and Industrial Development Strategy) रिपोर्ट को लॉन्च करने के बाद जियोस्पेशियल वर्ल्ड के सीईओ संजय कुमार ने कहा कि जियोस्पेशियल इंडस्ट्री देश को आत्मनिर्भर बनाने का काम तेजी से कर रही है. सरकार द्वारा इस साल लाई गई जियोस्पेशियल नीति की वजह से इंडस्ट्री को काफी ज्यादा बढ़ावा मिल रहा है. अर्थ रिपोर्ट को नेशनल थिंक टैंक ने मिलकर बनाया है. अभी भारत में जियोस्पेशियल इकोनॉमी 38,792 करोड़ रुपयों का है. इस इंडस्ट्री में 4.70 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं. ऐसी उम्मीद है कि सरकार की नीतियों और व्यवासायिक गतिविधियों की वजह से जियोस्पेशियल इंडस्ट्री साल 2025 तक 63 हजार करोड़ रुपयों की हो जाएगी. साथ ही इसमें रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तो इस सेक्टर में काम करने वालों की संख्या 9.50 लाख से ज्यादा हो सकती है. 

क्या है जियोस्पेशियल इंडस्ट्री (What is GeoSpatial Industry?)

जियोस्पेशियल इंडस्ट्री कई इंटरेक्टिव उद्योगों का समावेश है. इसमें तीन श्रेणियां हैं- जियोग्राफिक इनफॉर्मेशन सिस्टम (GIS), अर्थ ऑब्जरवेशन (Satellite, Aerial और Street Imagery) और स्कैनिंग टूल्स एंड टेक्नोलॉजी (LiDAR, RADAR, Ground Penetrating Radar). इन तीनों के लिए काम करने वाली कंपनियां, संस्थाएं, एजेंसियां मिलकर जियोस्पेशियल इंडस्ट्री को बनाती हैं. यानी आपके शहर का नक्शा, विकास के लिए इमारत की नींव कितनी खुदनी है, सड़क कितना घूमाएं तो जंगल कटने से बच जाए, रेलवे का नक्शा, यहां तक कि आपके खाने के ऑर्डर से लेकर कैब सर्विस तक इसी इंडस्ट्री का हिस्सा हैं. वो इस इंडस्ट्री की मदद लेते हैं. चीन के साथ सीमा विवाद पर जब सैटेलाइट इमेज आती थी, तब पता चलता था कि चीन कहां बदमाशी कर रहा है. 

कहां उपयोग होता है जियोस्पेशियल तकनीक?

जियोस्पेशियल का साधारण मतलब होता है नक्शा बनाना. अब चाहे वह टू- डायमेंशनल हो, थ्री-डायमेंशनल हो, अंतरिक्ष से सैटेलाइट के जरिए हो, या फिर हवा में ड्रोन उड़ाकर हो या फिर जमीन के अंदर किसी राडार की मदद से स्कैनिंग करके हो. इन नक्शों की बदौलत ही कई तरह के विकास कार्य किए जाते हैं. इसके बदले कृषि, रक्षा, ढांचागत विकास, मौसम, आपदा संबंधी जानकारियां आदि भी मिलती हैं. 

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