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Amarnath Flash Flood: क्यों हुआ था अमरनाथ हादसा? हिमालय के एक्सपर्ट वैज्ञानिकों ने बताई असली वजह

8 जुलाई 2022 को पवित्र अमरनाथ गुफा में आई अचानक बाढ़ में 40 लोग लापता हो गए थे. 16 की मृत्यु हो गई थी. 15 हजार लोगों को बचाया गया था. कहा गया कि बादल फटने से अमरनाथ पर ये हादसा हुआ. पर क्या असल में ऐसा हुआ था. हिमालयन एक्सपर्ट्स ने इसकी असली वजह बताई है. आइए जानते कि क्यों अमरनाथ गुफा के ऊपर आफत के बादल फटे या बारिश आई.

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Amarnath flash flood: 8 जुलाई 2022 को हुआ था अमरनाथ गुफा के पास अचानक बाढ़ आने का हादसा. (फोटोः रौफ ए. रोशनगर/इंडिया टुडे)
Amarnath flash flood: 8 जुलाई 2022 को हुआ था अमरनाथ गुफा के पास अचानक बाढ़ आने का हादसा. (फोटोः रौफ ए. रोशनगर/इंडिया टुडे)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गुफा के ऊपर मौजूद अमरावती नाला में छिपा है हादसे का रहस्य
  • वैज्ञानिकों ने की पुष्टि, अमरनाथ के ऊपर नहीं फटा था बादल

पवित्र अमरनाथ गुफा (Amarnath Holy Cave) में करीब एक महीने पहले अचानक बाढ़ (Flash Flood) आ गई थी. जिसमें करीब डेढ़ दर्जन लोगों की मौत हो गई. करीब 40 लोग लापता हो गए. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सीआरपीएफ और भारतीय सेना के जवानों ने मिलकर करीब 15 हजार लोगों को इस फ्लैश फ्लड के खतरनाक इलाके से बाहर निकाला गया था. हादसे की वजह से जानने से पहले ये जानना जरूरी है कि आखिरकार सिर्फ एक वजह है या कई परिस्थितियां हैं जिनसे ये हादसा हुआ.

15 हजार लोगों को भारतीय सेना और अन्य सैन्य बलों के जवानों ने सुरक्षित निकाला था. (फोटोः PTI)
15 हजार लोगों को भारतीय सेना और अन्य सैन्य बलों के जवानों ने सुरक्षित निकाला था. (फोटोः PTI)

पिछले कुछ दशकों में पूरी दुनिया में तापमान बढ़ा है. इस बात की पुष्टि इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) की रिपोर्ट भी करती है. साल 1950 के बाद लगातार बढ़ रही गर्मी और भारी बारिश की वजह जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग है. भारत में साल दर साल अचानक और अत्यधिक बारिश बढ़ रही है. पांच दशकों में बारिश संबंधी आपदाओं की मात्रा 50 फीसदी बढ़ गई है. पिछले कुछ सालों से हिमालयी और पहाड़ी इलाकों में फ्लैश फ्लड की मात्रा बढ़ गई है. फिलहाल जो स्टडी की गई है, उसका नेतृत्व किया वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (WIHG) के प्रमुख डॉ. कालाचंद सैन, डॉ. मनीष मेहता और विनीत कुमार ने. 

गुफा के ऊपर बाईं तरफ मौजूद है अमरावती नाला.
गुफा के ऊपर बाईं तरफ मौजूद है अमरावती नाला. 

12,795 फीट पर मौजूद है अमरनाथ गुफा

अब बात करते हैं 8 जुलाई 2022 को अमरनाथ गुफा में हुआ हादसे की. शाम 5.30 बजे तेज बारिश की वजह से फ्लैश फ्लड आया. जिसकी वजह से अमरनाथ के कैंप एरिया में भारी तबाही देखने को मिली. अमरनाथ गुफा समुद्र तल से 12,795 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है. गुफा के पास ही अमरावती नाला (Amaravati Nala) है. अमरनाथ पर ऐसा हादसा होना मुश्किल माना जाता है. क्योंकि ये अर्ध-शुष्क ट्रांस हिमालयन (Semi-Arid Trans Himalayan) इलाके में है. 

अमरनाथ गुफा के नीचे की ओर मौजूद है यात्रियों का कैंप और ऊपर बाईं तरफ है अमरावती नाले का मार्ग.
अमरनाथ गुफा के नीचे की ओर मौजूद है यात्रियों का कैंप और ऊपर बाईं तरफ है अमरावती नाले का मार्ग.

चारों तरफ हिमालय के सबसे बड़े रेंज

अमरनाथ गुफा और उसके आसपास मई से अक्टूबर तक 300 मिलिमीटर से कम बारिश होती है. अमरनाथ का इलाका उत्तरी गोलार्ध में आ जाता है. इसके उत्तर में काराकोरम रेंज (Karakoram Range), दक्षिण और पश्चिम में पीर पंजाल (Pir Panjal Range) और पूर्व में जंस्कार रेंज (Zanskar Range) है. दिसंबर से फरवरी के इलाके में यहां पर मध्यम से लेकर भारी बर्फबारी होती है. पूरे पीर पंजाल रेंज में दक्षिण एशियाई मॉनसून की वजह से बारिश की कोई वजह नहीं बनती, क्योंकि उसका असर कम होता है. 

अमरनाथ गुफा के ठीक बगल से आई थी अचानक बाढ़ की आफत.
अमरनाथ गुफा के ठीक बगल से आई थी अचानक बाढ़ की आफत.

जानिए... कितने घंटे में हुई कितनी बारिश

पीर पंजाल रेंज के पहाड़ अरब सागर (Arabian Sea) के नजदीक हैं. इसलिए यहां पर दक्षिण-पश्चिम दिशा की तरफ से बादलों का जमावड़ा होता है. इसकी वजह से गर्मियों में भी यहां अच्छी बारिश हो जाती है. अमरनाथ गुफा के नीचे मौजूद ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) ने 8 जुलाई 2022 को बारिश का जो डेटा रिकॉर्ड किया, वो ये है- शाम को 4.30 से 5.30 के बीच 31mm बारिश हुई. 5.30 से 6.30 के बीच 25mm बारिश हुई. 6.30 से 7.30 के बीच 19 mm बारिश हुई. यानी कुल मिलाकर 75 मिलिमीटर बारिश तीन घंटे में हुई. यह बादल फटने की तय श्रेणी से बहुत कम है. 

अमरनाथ गुफा के चारों तरफ लाइमस्टोन यानी चूना पत्थर के पहाड़ हैं. जो बारिश में आसानी से टूटते हैं.
अमरनाथ गुफा के चारों तरफ लाइमस्टोन यानी चूना पत्थर के पहाड़ हैं. जो बारिश में आसानी से टूटते हैं. 

बादल फटने की ये है परिभाषा और मानक

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार एक घंटे में 100 मिलिमीटर या उससे ज्यादा की बारिश होने पर उसे बादल फटना कहा जाता है. लेकिन अमरनाथ गुफा में तो तीन घंटे में 75 मिलिमीटर बारिश हुई. मौसम विभाग ने बताया कि अमरनाथ गुफा के आसपास हुई बारिश बेहद स्थानीय स्तर की थी. ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि 8 जुलाई को अमरनाथ के ऊपर इंटेंस कनवेक्टिव क्लाउड क्लस्टर बन गया था. यानी सरल भाषा में कहें तो भारी मात्रा बादल जमा थे. मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी. और वो हुई भी. 

अमरनाथ गुफा में इस बार बाबा बर्फानी समय से पहले ही पिघल गए. वजह है बढ़ता तापमान.
अमरनाथ गुफा में इस बार बाबा बर्फानी समय से पहले ही पिघल गए. वजह है बढ़ता तापमान. 

बर्फ का पिघलना, बारिश और मिट्टी का बहना

अमरनाथ गुफा और उसके आसपास की जियोमॉर्फोलॉजी (Geomorphology) यानी भू-आकृति विज्ञान को देखें तो पता लगता है कि इसे यहां पर ग्लेशियर की गतिविधियां काफी होती रही हैं. पिछले कुछ वर्षों में आसपास हिमस्खलन यानी एवलांच (Avlanches) ने भी बदलाव किए हैं. बढ़ते तापमान की वजह से ग्लेशियर पिघलते जा रहे हैं. इसलिए U आकार की घाटी की सतह से 100 मीटर ऊपर मौजूद अमरावती नाला पर कचरा जमा हो रहा है. सर्दियों में जमा होने वाली बर्फ गर्मियों में पिघलने लगती है. यह कई वर्षा मार्गों को भर देती हैं. ये सब अमरावती नाला में आकर मिल जाते हैं. जिससे उस नाले पर दबाव बनता है. 

साल 2021 में भी हुआ था ऐसा हादसा

भारी बारिश होने पर अमरावती नाला में ऊपर की तरफ से काफी मिट्टी और पत्थर बहकर आते हैं. नाला की क्षमता जब खत्म हो जाती है तो वह फट पड़ता है. जैसा कि 8 जुलाई 2022 को हुआ. नाला के ऊपर और नीचे की तरफ लगातार इरोज़न होता रहता है. मिट्टी कमजोर है. पत्थर ढीले हैं. बारिश की वजह से ये टूटने लगते हैं. यही मिट्टी और पत्थर भारी बारिश में बहकर अमरावती नाला तक आए. फिर वहां से नीचे की ओर. इससे पहले ऐसी ही एक घटना 28 जुलाई 2021 को भी हुई थी. वह भी इसी नाले पर हुई थी. 

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