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'एंटी-इंडिया' अमेरिकी सांसद इल्‍हान उमर और राहुल गांधी का मेल क्यों चौंकाता नहीं है

राहुल गांधी क्या अमेरिकी सांसद इल्‍हान उमर की भारत विरोधी करतूतों को नहीं जानते थे? अगर जानते थे तो फिर मिलने की क्या जरूरत थी? और अगर मिले हैं तो देश को यह बताना चाहिए कि इस मुलाकात में देश के हित में क्या बात हुई?

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वर्जिनिया में अमेरिकी सांसदों के साथ राहुल गांधी, क्या इल्हान उमर के भारत विरोधी कारनामे नहीं जानती थी कांग्रेस.
वर्जिनिया में अमेरिकी सांसदों के साथ राहुल गांधी, क्या इल्हान उमर के भारत विरोधी कारनामे नहीं जानती थी कांग्रेस.

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अमेरिका के तीन दिनों के दौरे पर हैं. राहुल अमेरिका में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में इस तरह बह गए हैं कि उनकी कई बार भारत विरोध की जद में पहुंच जा रहे हैं. सिखों के उत्पीड़न, जातियों के आरक्षण आदि पर दिए गए पर भारत में जबरदस्त विवाद पैदा हो गया है. पर इस बीच हद तब हो गई जब राहुल गांधी ने अमेरिकी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की जिसमें भारत विरोधी अमेरिकी सांसद इल्हान उमर भी नजर आ रही हैं. जाहिर है एक ऐसी नेता जो भारत से कश्मीर को अलग करना चाहती हो, जो खलिस्तान का समर्थन करती हो , जो भारत के खिलाफ आए दिन जहर उगलती हो उसके साथ राहुल गांधी को देखकर  भारत में कुछ लोग जरूर चौंक गए होंगे. पर जो लोग राहुल गांधी की अंतरराष्ट्रीय यात्राओं से परिचित हैं उन्हें इस खबर में कुछ भी नया नहीं लगा होगा.क्योंकि राहुल लगातार एंटी इंडिया गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए खाद पानी मुहैया करा रहे हैं. हो सकता है कि ये बातें आम आदमी तक न पहुंच रही हों पर अब बीजेपी ने इसे लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा है.जाहिर है कि भविष्य में उनकी अमेरिका यात्रा के हर पल की चर्चा पूरे देश में होने वाली है. 

1-क्या राहुल गांधी को नहीं पता थे इल्हान उमर के भारत विरोधी कारनामे

वॉशिंगटन डीसी में रेबर्न हाउस ऑफिस बिल्डिंग में हुई राहुल गांधी और मेजबानी कांग्रेस मैन ब्रेडली जेम्स शर्मन के साथ इल्हान उमर कई अन्य सांसदों के साथ मौजूद थीं.

इल्हान उमर अमेरिकी सांसद हैं. वह 2019 से अमेरिकी कांग्रेस की डेमोक्रेट सदस्य हैं. वह अमेरिका में अपने इजरायल विरोधी रुख की वजह से जानी जाती हैं.उन्होंने अमेरिका ट्विन्स टावर हमले   9/11 में आतंकियों का फेवर किया था. भारत में उनका नाम तब चर्चा में आया जब इल्हान ने साल 2022 में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का दौरा किया था. एक अमेरिका रिपोर्ट का कहना है कि पाकिस्तान ने इल्हान के इस दौरे को फंड किया था.

 जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी संसद में भाषण दिया था उसका भी बहिष्कार उमर ने किया था. इल्हान कई बार भारत के खिलाफ विदेशी मंचों से बोल चुकी हैं. वे भारत को अल्पसंख्यक विरोधी भी बता चुकी हैं.भारतीय के लिए अमेरिकी सिटिजनशिप ग्रीन कार्ड के लिए रहने की अवधि घटाने का भी उन्होंने विरोध किया था. बीजेपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता संजू वर्मा का कहती हैं कि राहुल गांधी सत्ता में आने के लिए उतावले हैं. इसी उतावलेपन की वजह से ही कोई कट्टरपंथी इस्लामिक इल्हान उमर से मुलाकात कर सकता है.  बीजेपी नेता निशिकांत दुबे ने कहा कि लाल घेरे में यह महिला अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता इल्हान उमर है, जो खालिस्तान और कश्मीर को अलग देश बनाने का लगातार समर्थन करती हैं. अभी अमेरिका में राहुल गांधी जी इसी एजेंडे के लिए समर्थन जुटा रहे हैं.

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ऐसा हो नहीं सकता कि इल्हान के बारे में राहुल गांधी को पता नहीं था. अगर राहुल को इल्हान के बारे में पता था उन्हें देश को बताना चाहिए कि एक एंटी इंडिया एलिमेंट से मिलने का उनका मकसद क्या था? क्योंकि राहुल गांधी अब देश के नेता प्रतिपक्ष हैं.वो एक संवैधानिक पोस्ट पर हैं.देश की जनता के टैक्स से उनको सैलरी सहित बहुत सी सुविधाएं मिलती हैं.देश को जानने का हक है कि उन्होंने इल्हान उमर से क्या बात की. यदि वो इल्हान उमर के भारत विरोधी करतूतों के बारे में नहीं जानते थे तो सादगी से इस सचाई से स्वीकार कर लेना चाहिए कि उन्हें नहीं पता था कि इस तरह का भारत विरोधी कोई व्यक्ति भी मुलाकातियों की सूची में था.

2-जार्ज सोरोस के भारत विरोधी अभियान के लिए भी खाद-पानी उपलब्ध करा चुके हैं राहुल गांधी

राहुल गांधी ही नहीं पूरे देश को पता है कि हिंडनबर्ग में अमेरिकी बिजनेस जॉर्ज सोरोस की बड़ी हिस्सेदारी है. हिडनबर्ग कई बार भारतीय शेयर बाजार को ध्वस्त करने की साजिश रच चुका है. जॉर्ज सोरोस पर लगे आरोपों की लिस्ट देखेंगे तो यही कहेंगे कि ये तो इल्हान उमर जिस स्कूल की छात्रा हैं ये उसके प्रिंसिपल हैं.भारतीय प्रधानमंत्री के बारे में अनाप शनाप बातें तो सोरोस कहते ही रहे हैं , उन पर 1992 में बैंक ऑफ इंग्लैंड को तबाह कर मोटी कमाई करने का आरोप है.सोरोस ओपन सोसाइटी फाउंडेशन की मदद से वह करीब 100 देशों में सक्रिय हैं. सोरोस पर  अमेरिकी प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ रहे जॉर्ज बुश को हराने के लिए 125 करोड़ रुपये खर्च करने का आरोप लगा था. यह भी कहा जाता है कि उन्होंने मीडिया कंपनी फॉक्स न्यूज को बर्बाद करने के लिए 10 लाख डॉलर लगा दिए थे. इसी तरह ब्रेक्जिट के खिलाफ अभियान चलाने में चार लाख पाउंड खर्च किए थे. 

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कुछ दिन पहले बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने राहुल और जॉर्ज सोरोस के रिश्तों पर सवाल उठाया था? राहुल गांधी पर आरोप लगाया जाता है कि उन्होंने पीएम मोदी की अमेरिकी यात्रा से पहले 30 मई 2023 को अमेरिका पहुंच कर भारतीय लोकतंत्र के खिलाफ माहौल तैयार करने का काम किया था. इस दौरान राहुल गांधी ने सोरोस की करीबी सहयोगी सुनीता विश्वनाथ के साथ बैठक करते नजर आए थे. 

3-पन्नू को दिया खालिस्तान के लिए अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत को घेरने का मौका 

राहुल गांधी ने वर्जिनिया में प्रवासी भारतीयों के एक सम्मेलन में सिख समुदाय को लेकर मंगलवार को कुछ ऐसा कहा जिसकी चौतरफा निंदा हो रही है. राहुल गांधी ने आरएसएस और बीजेपी को टार्गेट करते हुए कहा कि  RSS कुछ धर्मों, भाषाओं और समुदायों को अन्य की तुलना में कमतर मानता है... क्या एक सिख को भारत में पगड़ी या कड़ा पहनने का अधिकार है या नहीं. या एक सिख के रूप में वह गुरुद्वारा जा सकते हैं या नहीं. राहुल गांधी के कहने का मतलब था कि भारत में सिख को न पगड़ी पहनने की आजादी है और न ही कड़ा पहनने की. गुरुद्वारे जाने में भी दिक्कत है.जाहिर है राहुल के इस बयान का विरोध तो देश में होना ही था. पर इस तरह की बात तो देश में कट्टर राष्ट्रदोहियों ने भी नहीं कभी की. 
पर अब राहुल के बयान से कट्टरपंथियों को एक बहाना मिल गया. यही कारण है कि कुख्यात खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने राहुल गांधी के बयान को जायज ठहराते हुए कहा है कि उनका ये बयान सिख फॉर जस्टिस के अलग खालिस्तान देश की मांग को जस्टिफाई करता है.

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पन्नू ने कहा कि भारत में सिखों की हालत पर राहुल गांधी ने जो बयान दिया है वो न केवल साहसिक है बल्कि 1947 के बाद से भारत में सिखों पर हो रहे अत्याचार को दिखाता है. यह पंजाब की आजादी के लिहाज से सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के रुख की भी पुष्टि करता है. 

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