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9 बच्चों की मौत के बाद Coldrif कफ सिरप की बिक्री MP में बैन, CM मोहन यादव बोले- दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा

Coldrif Cough Syrup Banned in MP: 30 दिन के भीतर छिंदवाड़ा जिले में 9 मासूमों की मौतों के बाद MP सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूरे मध्यप्रदेश में Coldrif सिरप की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. सिरप बनाने वाली कंपनी के अन्य उत्पादों की बिक्री पर भी रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

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⁠Coldrif कफ सिरप तमिलनाडु की Sresan Pharmaceutical बनाती है.(Photo:ITG)
⁠Coldrif कफ सिरप तमिलनाडु की Sresan Pharmaceutical बनाती है.(Photo:ITG)

छिंदवाड़ा में 9 बच्चों की मौत के बाद मध्य प्रदेश में Coldrif कफ सिरप पर बैन लगा दिया गया है. प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस संबंध में बयान जारी कर कहा है कि दोषियों को छोड़ेंगे नहीं. 

CM यादव ने 'X' पर लिखा, ''छिंदवाड़ा में Coldrif सिरप के कारण हुई बच्चों की मृत्यु अत्यंत दुखद है. इस सिरप की बिक्री को पूरे मध्यप्रदेश में बैन कर दिया है. सिरप को बनाने वाली कंपनी के अन्य प्रोडक्ट की बिक्री पर भी बैन लगाया जा रहा है.

सिरप बनाने वाली फैक्ट्री कांचीपुरम में है, इसलिए घटना के संज्ञान में आने के बाद राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार को जांच के लिए कहा था. आज सुबह जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई. रिपोर्ट के आधार पर कड़ा एक्शन लिया गया है.

बच्चों की दुखद मृत्यु के बाद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई चल रही थी. राज्य स्तर पर भी इस मामले में जांच के लिए टीम बनाई गई है. दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.''

स्थानीय स्तर पर छिंदवाड़ा प्रशासन ने पहले ही Coldrif और Nextro-DS सिरप पर जिला-व्यापी प्रतिबंध लगा दिया था. अब राज्य स्तर पर विशेष जांच टीम गठित की गई है, जो सिरप के वितरण, आपूर्ति चेन और चिकित्सकों की भूमिका की गहन जांच करेगी. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच चुकी है, जो सैंपल जांच में सहयोग कर रही है. 

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बता दें कि छिंदवाड़ा के परासिया क्षेत्र में वायरल फीवर के इलाज के लिए स्थानीय डॉक्टरों के सुझाए गए इस सिरप के सेवन के बाद बच्चों की हालत बिगड़ने लगी. वे छिंदवाड़ा और नागपुर के अस्पतालों में भर्ती हुए, लेकिन कई को बचाया नहीं जा सका.

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मृतकों में शिवम, विधि, अदनान, उसैद, ऋषिका, हेतांश, विकास, चंचलेश और संध्या जैसे मासूम शामिल हैं. परिवारों का आरोप है कि सर्दी-खांसी की सामान्य दवा ने उनके बच्चों की जान ले ली.

स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को कोई भी दवा बिना डॉक्टर की सलाह के न दें. साथ ही, जिला स्तर पर 1,400 से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग अभियान जारी है, ताकि संभावित प्रभावित बच्चे समय रहते पहचाने जा सकें.

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