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साहित्य तक बुक कैफे टॉप 10: वर्ष 2023 की 'कथेतर' श्रेणी की ये 10 पुस्तकें बताती हैं कि जीवन इन शब्दों में भी छिपा हो सकता है

'साहित्य तक: बुक कैफे टॉप 10' पुस्तकों में 'कथेतर' श्रेणी में प्रभाष जोशी, नामवर सिंह, आरएन भास्कर, लीलाधर जगूड़ी, काशीनाथ सिंह, गगन गिल, व्योमेश शुक्ल की पुस्तके हैं, तो अश्नीर ग्रोवर और डॉ दीपक आचार्य की भी. इन लेखकों की, या इनसे जुड़ी पुस्तकों की पूरी सूची देखें यहां-

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साहित्य तक बुक कैफे टॉप 10: वर्ष 2023 की 'कथेतर' श्रेणी की टॉप 10 पुस्तकें
साहित्य तक बुक कैफे टॉप 10: वर्ष 2023 की 'कथेतर' श्रेणी की टॉप 10 पुस्तकें

'साहित्य तक: बुक कैफे टॉप 10' पुस्तकों में 'कथेतर' श्रेणी में प्रभाष जोशी, नामवर सिंह, आरएन भास्कर,  लीलाधर जगूड़ी, काशीनाथ सिंह, गगन गिल, व्योमेश शुक्ल की पुस्तके हैं, तो अश्नीर ग्रोवर और डॉ दीपक आचार्य की भी. इन लेखकों की, या इनसे जुड़ी पुस्तकों की पूरी सूची देखें यहां-
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शब्द की दुनिया समृद्ध हो और बची रहे पुस्तक-संस्कृति इसके लिए इंडिया टुडे समूह के साहित्य, कला, संस्कृति और संगीत के प्रति समर्पित डिजिटल चैनल 'साहित्य तक' ने पुस्तक-चर्चा पर आधारित एक खास कार्यक्रम 'बुक कैफे' की शुरुआत वर्ष 2021 में की थी... आरंभ में सप्ताह में एक साथ पांच पुस्तकों की चर्चा से शुरू यह कार्यक्रम आज अपने वृहद स्वरूप में सर्वप्रिय है.
साहित्य तक के 'बुक कैफे' में इस समय पुस्तकों पर आधारित कई कार्यक्रम प्रसारित हो रहे हैं. इन कार्यक्रमों में 'एक दिन, एक किताब' के तहत हर दिन एक पुस्तक की चर्चा, 'शब्द-रथी' कार्यक्रम में किसी लेखक से उनकी सद्य: प्रकाशित कृति पर बातचीत और 'बातें-मुलाकातें' कार्यक्रम में किसी वरिष्ठ रचनाकार से उनके जीवनकर्म पर संवाद होता है. इनके अतिरिक्त 'आज की कविता' के तहत कविता पाठ का विशेष कार्यक्रम भी बेहद लोकप्रिय है.
भारतीय मीडिया जगत में जब 'पुस्तक' चर्चाओं के लिए जगह छीजती जा रही थी, तब 'साहित्य तक' पर हर शाम 4 बजे 'बुक कैफे' में प्रसारित कार्यक्रमों की लोकप्रियता बढ़ती ही गई. हमारे इस कार्यक्रम को प्रकाशकों, रचनाकारों और पाठकों की बेपनाह मुहब्बत मिली. अपने दर्शक, श्रोताओं के अतिशय प्रेम के बीच जब पुस्तकों की आमद लगातार बढ़ने लगी, तो यह कोशिश की गई कि कोई भी पुस्तक; आम पाठकों, प्रतिबद्ध पुस्तक-प्रेमियों की नजर से छूट न जाए. आप सभी तक 'बुक कैफे' को प्राप्त पुस्तकों की जानकारी सही समय से पहुंच सके इसके लिए सप्ताह में दो दिन- हर शनिवार और रविवार को - सुबह 10 बजे 'किताबें मिलीं' कार्यक्रम भी शुरू कर दिया गया. यह कार्यक्रम 'नई किताबें' के नाम से अगले वर्ष भी जारी रहेगा.  
'साहित्य तक' ने वर्ष 2021 में ही पूरे वर्ष की चर्चित पुस्तकों में से उम्दा पुस्तकों के लिए 'बुक कैफे टॉप 10' की शृंखला शुरू की थी, ताकि आप सब श्रेष्ठ पुस्तकों के बारे में न केवल जानकारी पा सकें, बल्कि अपनी पसंद और आवश्यकतानुसार विधा और विषय विशेष की पुस्तकें चुन सकें. तब से हर वर्ष के आखिरी में 'बुक कैफे टॉप 10' की यह सूची जारी होती है. 'साहित्य तक बुक कैफे टॉप 10' की यह शृंखला अपने आपमें अनूठी है, और इसे भारतीय साहित्य जगत, प्रकाशन उद्योग और पाठकों के बीच खूब आदर प्राप्त है.
'साहित्य तक के 'बुक कैफे' की शुरुआत के समय ही इसके संचालकों ने यह कहा था कि एक ही जगह बाजार में आई नई पुस्तकों की जानकारी मिल जाए, तो पुस्तकों के शौकीनों के लिए इससे लाजवाब बात क्या हो सकती है? अगर आपको भी है किताबें पढ़ने का शौक, और उनके बारे में है जानने की चाहत, तो आपके लिए सबसे अच्छी जगह है साहित्य तक का 'बुक कैफे'.
हमें खुशी है कि हमारे इस अभियान में प्रकाशकों, लेखकों, पाठकों, पुस्तक प्रेमियों का बेपनाह प्यार मिला. हमने पुस्तक चर्चा के कार्यक्रम को 'एक दिन, एक किताब' के तहत दैनिक उत्सव में बदल दिया है. वर्ष 2021 में 'साहित्य तक- बुक कैफे टॉप 10' की शृंखला में केवल अनुवाद, कथेतर, कहानी, उपन्यास, कविता श्रेणी की टॉप 10 पुस्तकें चुनी गई थीं. वर्ष 2022 में लेखकों, प्रकाशकों और पुस्तक प्रेमियों के अनुरोध पर कुल 17 श्रेणियों में टॉप 10 पुस्तकें चुनी गईं. साहित्य तक ने इन पुस्तकों को कभी क्रमानुसार कोई रैंकिंग करार नहीं दिया, बल्कि हर चुनी पुस्तक को एक समान टॉप 10 का हिस्सा माना. यह पूरे वर्ष भर पुस्तकों के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता और श्रमसाध्य समर्पण का द्योतक है. फिर भी हम अपनी सीमाओं से भिज्ञ हैं. संभव है कुछ बेहतरीन पुस्तकें हम तक पहुंची ही न हों, संभव है कुछ श्रेणियों में कई बेहतरीन पुस्तकें बहुलता के चलते रह गई हों. संभव है कुछ पुस्तकें समयावधि के चलते चर्चा से वंचित रह गई हों. पर इतना अवश्य है कि 'बुक कैफे' में शामिल ये पुस्तकें अपनी विधा की चुनी हुई 'साहित्य तक बुक कैफे टॉप 10' पुस्तकें अवश्य हैं.
पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने की 'साहित्य तक' की कोशिशों को समर्थन, सहयोग और प्यार देने के लिए आप सभी का आभार.
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साहित्य तक 'बुक कैफे-टॉप 10' वर्ष 2023 की 'कथेतर' श्रेणी की श्रेष्ठ पुस्तकें हैं-
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* 'विनोबा दर्शन: विनोबा के साथ उनतालीस दिन' - प्रभाष जोशी

आचार्य विनोबा भावे ने 1960 में इन्दौर और आसपास के कुछ क्षेत्रों की यात्रा की थी. इस दौरान उन्होंने न केवल समाज के हर तबके से संवाद किया, बल्कि धर्म, संस्कृति और मानव-व्यवहार की व्याख्या करते हुए उन्हें जाग्रत करने का प्रयास किया. इस दौरान विनोबा ने लगभग डेढ़ सौ भाषण दिए और 'जय जगत' जैसी अपनी अवधारणा से लोगों को परिचित कराया. उनतालीस दिनों की इस यात्रा की 'नई दुनिया' अखबार के लिए तब रिपोर्टिंग की थी प्रभाष जोशी ने. एक पत्रकार के रूप में यह उनका पहला काम था. इन रिपोर्टों को पढ़ते हुए हम कह सकते हैं कि इसी दौरान जोशी ने पत्रकारिता के उन आधारभूत मूल्यों की पहचान की, जिनका अनुसरण उन्होंने आजीवन किया. इस पुस्तक में वे विनोबा जी के साथ-साथ चलते दिखाई देते हैं. विनोबा ने इस यात्रा में जहां समाज, देश और विश्व के अपने स्वप्न को व्याख्यायित करने की कोशिश की, वहीं जोशी ने उनके भावों को अपने शब्दों में विशाल पाठक समुदाय तक पहुंचाने का प्रयास किया. सूचनाओं, विचारों और परिवेश के सजीव चित्रण के साथ दैनिक रिपोर्टिंग भी साहित्यिक रचना की तरह कैसे दीर्घजीवी हो सकती है, यह पुस्तक इसका जीवन्त उदाहरण है. इस किताब को पत्रकारिता के अध्येता एक पाठशाला की तरह बरत सकते हैं. पुस्तक का संपादन मनोज कुमार मिश्र और संकलन कमलेश सेन ने किया है.
- प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन
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* 'गौतम अदाणी: भारत और विश्व में बिज़नेस की पुनर्कल्पना' - आरएन भास्कर

- यह पुस्तक देश और दुनिया में अपनी व्यावसायिक सफलता का झंडा गाड़ चुके गौतम अदाणी के जीवन के उन निजी प्रसंगों की बात करती है, जिसने उन्हें आज वहां पहुंचा दिया, जहां दूर-दूर तक कोई दूसरा नहीं है. पुस्तक अदाणी के जीवन, उनके बचपन, व्यवसाय में आने, परिवार और विवाह के बारे में बताने के साथ, उनकी बिज़नेस स्ट्रैटेजीज़ व उन्हें मिले अवसरों और सीखों का विश्लेषण करती है, जिन्होंने न केवल अदाणी की कंपनी को सुपर फ़ास्ट विकास दिलाया बल्कि एक मील का पत्थर भी बनाया. गौतम अदाणी आज एक ऐसे व्यावसायिक साम्राज्य के संचालक हैं जिसके पास बंदरगाह, विमान पत्तन, रिन्युअल एनर्जी, उपभोक्ता वस्तुएं, सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन, पावर ट्रांसमिशन, थर्मल पावर, खाद्य तेल, सीमेंट और रेलवे लाइनें शामिल हैं. अदाणी समूह जल्दी ही टेलीकम्युनिकेशंस, डेटा सर्विसेज़, तांबा, एल्यूमिनियम और इस्पात उत्पादन जैसे क्षेत्रों में प्रवेश करने की तैयारी में है. वर्तमान में वे एशिया के साथ ही विश्व के टॉप वेल्थ जेनेरेटर्स में गिने जाते हैं. समाचारों की सुर्ख़ियों में होने के बावजूद सार्वजनिक जगत को इस कामयाब उद्यमी के बारे में, या उनकी प्रेरणाओं, दृष्टिकोण, जीवन और सफलता से जुड़ी यात्रा के बारे में बहुत कम जानकारियां उपलब्ध हैं. यह पुस्तक इस कमी को पूरी करती है. लंबे समय से गौतम अदाणी के करियर को अपनी पैनी दृष्टि से देखने वाले पत्रकार भास्कर ने अदाणी से जुड़े कठिन तथ्यों को कहानी की तरह प्रस्तुत किया है. पुस्तक पहले अंग्रेज़ी में Gautam Adani: Reimagining Business in India and the World नाम से प्रकाशित हुई थी.
- प्रकाशक: पेंगुइन स्वदेश
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* 'तुम्हारा नानू: नामवर सिंह' - समीक्षा ठाकुर

- यह पुस्तक हमारे समय के सर्वाधिक चर्चित आलोचक, प्राध्यापक रहे नामवर सिंह के अपनी बेटी समीक्षा को लिखे पत्रों का संकलन है. ये पत्र उन्होंने 1986 से 2005 के बीच लिखे थे और इनका उद्देश्य यात्राओं में अपने देखे स्थलों और अनुभवों से अपनी बेटी का परिचय कराना था. इन पत्रों को संकलित करते हुए लेखिका बताती हैं कि रोज़-रोज़ की यात्राओं और व्यस्तताओं का हवाला देते हुए नामवर सिंह वापस घर आने पर रस ले-लेकर उन स्थानों, लोगों के बारे में बताते और चाहते कि बेटी भी उन जगहों को देखे. इसीलिए बाद में उन्होंने अपनी देखी-जानी चीजों को पत्रों में लिखना शुरू कर दिया. पत्रों की अपनी एक उष्मा होती है, जो अब मोबाइल और मेल के ज़माने में दुर्लभ है. इन पत्रों को पढ़ते हुए हम वह उष्मा भी महसूस करते हैं, और नामवर सिंह की दृष्टि की बारीकी से भी परिचित होते हैं. पुस्तक में समीक्षा ठाकुर लिखित दो आलेख भी शामिल हैं, जिसमें उन्होंने अपने पिता नामवर, हिंदी के महान आलोचक नामवर, सबके चहेते नामवर, और वक्ता नामवर के साथ उनके जीवन के कई पहलुओं पर रौशनी डाली है.
- प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन
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* 'तेजस्विनी: अक्का महादेवी के वचन' - भाव रूपांतरण - गगन गिल

- बारहवीं सदी के तीसरे दशक यानी सन 1130 के आसपास कभी अक्का महादेवी का जन्म दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य के शिवमोगा जिले के एक गांव उदूतड़ी में शिव-भक्त माता-पिता के घर में हुआ था. परम्परा कहती है, वह अनन्य सुंदरी थीं. मनुष्य सुंदरता सहन करने के लिए नहीं बने. सुंदरता उनमें सदा से हिंसा जगाती आई है. तिस पर एक स्त्री की सुंदरता, भक्त मन वाला उसका आलोक, उसकी आभा, उसकी तन्मयता! सुंदरी महादेवी को कभी न कभी वेध्य होना ही था. लेकिन उन्हें किसी दूसरे ने नहीं वेधा. यह उपक्रम उन्होंने स्वयं ही किया. कब महादेवी पहले-पहल स्त्री देह के वस्त्र से मुक्त हुईं, फिर काया के भीतर के मल-मूत्र से, कब वह मात्र आलोक खोजता केवल एक भक्त-मन रह गईं - कहना मुश्किल है. अक्का देवी की जीवन-यात्रा हमें सदियों से न केवल सहज ही रोमांचित करती आ रही है, बल्कि लगभग विमूढ़ और अवाक करती है. अक्का महादेवी के ये वचन हमें आज भी व्याकुल कर देते हैं, ये उनके बोल हैं, जो उन्होंने कभी लिखे नहीं थे, सुधारे या काटे-छांटे नहीं थे. न ये कविताएं थीं, न छंद. एक भक्त स्त्री के दिल की अग्नि ने इन स्ववचनों को, एकालापों को, तपाया था. यह अक्का देवी के वचनों का हिंदी रूपांतरण है.
- प्रकाशक: राजकमल पेपरबैक्स
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* 'आग और पानी' - व्योमेश शुक्ल

-  बनारस, दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता और संसार की सबसे ज़िंदा और रौशन जगहों में से एक है, जिसके ज़र्रे-ज़र्रे में कोई न कोई बात है. इसके बारीक तार अतीत से होकर भविष्य तक जाते हैं. यह पुस्तक तुलसीदास, गंगा के उल्लेख से शुरू होती है और हमें 18वीं, 19वीं, 20वीं शताब्दी के वाराणसी के बारे में एक समझ देती है. यह बनारस को उसके सबसे गाढ़े और मनोहर रंगों में पहचानती है. यूं तो इस किताब का वास्ता उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ की शहनाई और पंडित किशन महाराज के तबले से बराबर पड़ता है. बनारस का गाना-बजाना, यहां के नायक, इस अनूठे शहर की आदतें और यहां की गंगा सब इस किताब में साथ-साथ, दोस्तों की तरह मौजूद हैं. यह किताब अपने आत्मीय और सम्मोहक गद्य के साथ-साथ इस बात के लिये भी पढ़ी और साथ रखी जानी चाहिए कि यह सदियों के आर-पार फैली हुई उत्थान और पतन की नगर-गाथा को खिलाड़ियों और लोकगायकों के शिल्प में हमसे कहती है, लेकिन तासीर उसमें इतिहास की-सी है.
- प्रकाशक: रुख प्रकाशन
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* 'प्रश्नब्यूह में प्रज्ञा' - लीलाधर जगूड़ी

- जिनकी कविताओं में प्रकृति का वास है. जिनकी रचनाओं में नदियां, झील, पहाड़, झरने, पेड़, पौधे सांस लेते हैं. ऐसे ही विलक्षण कवि के साक्षात्कारों की यह पुस्तक है. यह पुस्तक अपने आप में इसलिए भी  अनोखी है कि इसमें लेखक के व्यक्तित्व, साक्षात्कार और चिंतन का अनोखा मिश्रण सामने आता है. नामवर सिंह, केदारनाथ सिंह, कुंवर नारायण जैसे साहित्यकारों ने इस पुस्तक पर अपनी मूल्यवान प्रतिक्रियाएं देते हुए जगुड़ी के नए प्रयोग, नई दृष्टि और कविताओं की प्रशंसा की है. इस पुस्तक में कुल 24 साक्षात्कार हैं जो जगुड़ी के जीवनकर्म के साथ ही कविता, साहित्य, भाषा, समय, समाज, संस्कृति, सभ्यता, सियासत पर उनके दृष्टिकोण को तो सामने रखते ही हैं, उनके पूर्ववर्ती, समकालीन और युवा रचनाकारों पर उनके मंतव्य को भी स्पष्ट करते हैं और बताते हैं कि- हर कवि ने पुराने से जन्म लिया है. फिर नया कवि बना है, दुनिया से समझने के बाद उसने कविता के माध्यम से एक नई छवि बनाई है...जो नवोदित पुराने को नहीं पढ़ेगा, वो अनजाने में ही पुरानेपन का शिकार हो जाएगा.
- प्रकाशक: वाणी प्रकाशन
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* 'मेरे बड़े भाई शमशेर' - डॉ तेज बहादुर चौधरी

- मूर्धन्य कवि शमशेर बहादुर सिंह के निजी और पारिवारिक जीवन के बारे में हम बहुत कम जानते हैं. वे इतने संकोची थे कि इस बारे में उन्होंने कभी कोई सूत्र भी हमें नहीं दिया. उनके पिता को कहानियां, नावेल उपन्यास, ड्रामे इत्यादि पढ़ने की आदत थी. घर में हिंदी उर्दू की पत्र-पत्रिकाएं आया करती थीं. घर पर ही उन्हें अनेक पत्र-पत्रिकाओं के अलावा देवकीनंदन खत्री की विख्यात कृतियां चंद्रकांता, संतति, भूतनाथ, कविता में निराला का 'परिमल' इत्यादि बचपन में ही पढ़ने को मिल गया था. मां की अचानक मृत्यु के पश्चात शमशेर को देहरादून के ए पी मिशन स्कूल में दाखिल करा दिया जाए. वहां नाना नानी की देखरेख में इनके पढने की अच्छी व्यवस्था हो जाएगी. छोटे तेजबहादुर को दादा दादी के पास गांव के स्कूल में दाखिल करा दिया गया. यहां तेज बहादुर बीमार पड़ गए, जिससे उन्हें भी देहरादून के उसी स्कूल में दाखिल कराया गया जिसमें शमशेर पढ़ रहे थे. बालक शमशेर क्रमशः दीन-दुनिया से कटता अंतर्मुखी होता चला जा रहा था. यहां भी उसने किताबों की दुनिया में मन लगा लिया. परंतु पिता ने पाया कि मिशन स्कूल में बच्चे पढ़ने के साथ-साथ ईसाई धर्म की शिक्षा में भी दिलचस्पी ले रहे हैं. अगले साल दोनों बच्चों को वहां से हटा कर उन्होंने डीएवी कॉलेज के बोर्डिंग स्कूल में दाखिल करा दिया. पिता ने शमशेर से कहा कि छोटे का हर वक्त ध्यान रखना. शमशेर ने बड़े भाई की तरह इस बात का हमेशा ध्यान रखा... उसी भाई तेज बहादुर चौधरी ने बरसों पहले शमशेर पर जो पुस्तक लिखी थी, वह किसी हद तक कवि के जीवन पर आधारित जानकारी के अभाव की पूर्ति करती है. हालांकि यह पुस्तक अप्राप्य हो चुकी थी, जिसे रज़ा पुस्तक माला के तहत पुनर्प्रकाशित किया गया है.
- प्रकाशक: सेतु प्रकाशन
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* 'जंगल लैबोरेटरी: स्वस्थ जीवन के लिए परम्परागत हर्बल ज्ञान की पोटली' - डॉ दीपक आचार्य

- आधुनिक औषधि विज्ञान यानी मॉडर्न मेडिकल साइंस प्रयोगों पर आधारित ज्ञान पर भरोसा करता है जबकि भारतवर्ष के सुदूर जंगलों में रहने वाले आदिवासियों और ग्रामीणजनों द्वारा अपनाए जाने वाला सदियों पुराना पारंपरिक हर्बल ज्ञान बुजुर्गों के अनुभवों को आधार मानता है. हिंदुस्तान के सुदूर आदिवासी अंचलों से एकत्र किए गए ज्ञान को समेटकर एक पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करने के पीछे लेखक का उद्देश्य यही था कि आदिवासियों के पारंपरिक हर्बल ज्ञान को एक 'शॉर्ट-कट टूल' की तरह आज़माया जाए तो न केवल समय और रुपए की बचत तो की जा सकेगी, बल्कि आम जनों तक सस्ती सुलभ दवाएं भी आसानी से उपलब्ध हो जाएंगी. पिछले दो दशकों में माइक्रोबायोलॉजी और इथनोबॉटनी जैसे विषयों का गहनता से अध्ययन और बतौर वैज्ञानिक कार्य करते हुए लेखक ने आदिवासियों के हर्बल ज्ञान को बेहद करीब से जांचा-परखा और स्वास्थ्य और बेहतर जीवन के लिए प्राकृतिक परंपरा के जिज्ञासुओं के लिए यह पुस्तक लिख दी. दुर्भाग्य है कि इसी वर्ष लेखक डॉ डॉ दीपक आचार्य हमारे बीच नहीं रहे. इस सूची में उनकी पुस्तक का होना, उनके कार्यों के प्रति एक नमन भी है.
- प्रकाशक: पेंगुइन रैंडम हाउस
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* 'हंसा करो पुरातन बात' - काशीनाथ सिंह, संकलन-संपादन, शशि कुमार सिंह

'हंसा करो पुरातन बात' कथाकार-उपन्यासकार काशीनाथ सिंह के साक्षात्कारों का संकलन है. इस किताब में उनके 1989 से 2022 तक के साक्षात्कार हैं. इन साक्षात्कारों को प्रकाशन-क्रम से रखा गया है ताकि पाठक उनकी रचनात्मक और वैचारिक यात्रा को प्रमाणिकता के साथ समझ सकें. काशीनाथ सिंह से जुड़ा वह हर सवाल यहां मौजूद है जिसमें एक पाठक की जिज्ञासा हो सकती है. ये सभी साक्षात्कार वे हैं जो उनकी पूर्व-प्रकाशित दोनों पुस्तकों, 'गपोड़ी से गपशप' और 'बातें हैं बातों का क्या' में नहीं हैं. पुस्तक की 'परिशिष्ट' में ऐसे साक्षात्कार हैं जिनमें सीधे-सीधे सवाल-जवाब की पद्धति नहीं है, लेकिन साक्षात्कारकर्ता या पत्र-पत्रिका ने उन्हें 'बातचीत' या 'बातचीत पर आधारित' कहा है. इन साक्षात्कारों में 'सदी का सबसे बड़ा आदमी' कहानी के प्रति उनका मोह दृष्टिगोचर होता है. 'काशी का अस्सी' को वे अपना सर्वश्रेष्ठ उपन्यास तथा 'अपना मोर्चा' को भूमिका मात्र मानते हैं. सामासिक संस्कृति की पक्षधरता और मनुष्यता में उनका विश्वास भी प्रकट होता है. कहानी लेखन में बदलाव, कहानी से संस्मरण की ओर अग्रसर होने के कारण, देश-विदेश-छात्र राजनीति एवं वर्तमान लेखन पर उनके विचार इन साक्षात्कारों में अभिव्यक्त हैं.
- प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन
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* 'दोगलापनः ज़िंदगी और स्टार्ट-अप्स का खरा सच' - अश्नीर ग्रोवर

- यह दिल्ली के मालवीय नगर के एक ऐसे शरणार्थी परिवार में पैदा हुए मध्यवर्गीय परिवार के नौजवान की कहानी है, जो अपनी कड़ी मेहनत से न केवल कामयाबी के झंडे गाड़ता है, बल्कि अपने समकालीनों में उस ईर्ष्या का कारण बनता है, जिससे उसकी पूरी जिंदगी बदल जाती है. पर इन सबके बीच वह लड़का आईआईटी दिल्ली में रैंक होल्डर बनता है, आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए करता है, कोटक और एमेक्स में इन्वेस्टमेंट बैंकर बनता है और भारत के दो-दो मशहूर यूनिकॉर्न को खड़ा करना का श्रेय हासिल करता है. यह ग्रोफर के सीएफओ और भारत-पे के को-फाउंडर अश्नीर ग्रोवर का एक लाजवाब संस्मरण है, जो मशहूर टीवी शो शार्क टैंक इंडिया में जज बनकर घर-घर जाना पहचाना नाम बन चुके हैं, हालांकि उनकी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव भी हैं, जिसका ज़िक्र अश्नीर ने खुलकर किया है. मूल रूप से अंग्रेज़ी में 'Doglapan: The Hard Truth about Life' के नाम से प्रकाशित पुस्तक का अनुवाद मंजीत ठाकुर ने किया है.
- प्रकाशक: पेंगुइन बुक्स
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वर्ष 2023 के 'साहित्य तक बुक कैफे टॉप 10' में शामिल सभी पुस्तक लेखकों, प्रकाशकों, अनुवादकों और प्रिय पाठकों को बधाई!

 

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